सभा पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
स गत्वा राजभवनं दुर्योधनवशानुगः |
११ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१७
वैशम्पाय़न उवाच
स गत्वा राजवचनादुवाचाच्युतमीश्वरम् |
२ क
सभा पर्व
अध्याय
२६
वैशम्पाय़न उवाच
स गत्वा राजशार्दूलः पाञ्चालानां पुरं महत् |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२४
शङ्ख उवाच
स गत्वा वाहुदां शीघ्रं तर्पय़स्व यथाविधि |
२२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९४
राम उवाच
स गत्वा विषमं घोरं पर्वतं गन्धमादनम् |
१७ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
४
कृप उवाच
स गत्वा शिविरं तेषां नाम विश्राव्य चाहवे |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय
१०१
वैशम्पाय़न उवाच
स गत्वा सदनं विप्रो धर्मस्य परमार्थवित् |
२२ क
शल्य पर्व
अध्याय
३८
वैशम्पाय़न उवाच
स गत्वा सरितः सर्वाः समुद्रांश्च महातपाः |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०९
अङ्गिरा उवाच
स गत्वा स्त्रीशताकीर्णे रमते भरतर्षभ ||
५४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
स गत्वा हास्तिनपुरं धृतराष्ट्रं समेत्य च |
६ क
सभा पर्व
अध्याय
३१
वैशम्पाय़न उवाच
स गत्वा हास्तिनपुरं नकुलः समितिञ्जय़ः |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४२
भीष्म उवाच
स गत्वाङ्गारकर्मान्तं गृहीत्वाग्निमथागमत् |
३० क
शल्य पर्व
अध्याय
५०
वैशम्पाय़न उवाच
स गत्वाचष्ट तेभ्यश्च सारस्वतमतिप्रभम् |
४२ क
आदि पर्व
अध्याय
४९
सूत उवाच
स गत्वापश्यदास्तीको यज्ञाय़तनमुत्तमम् |
२७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९४
मन्त्रिणः ऊचुः
स गत्वाहवनीय़ेऽग्नौ तीव्रं निय़ममास्थितः |
३९ क
वन पर्व
अध्याय
१९०
वैशम्पाय़न उवाच
स गत्वैवं तं राजानमव्रवीत् ||
५६ क
वन पर्व
अध्याय
१९०
वैशम्पाय़न उवाच
स गत्वैवमुपाध्याय़ाय़ाचष्ट ||
५८ क
वन पर्व
अध्याय
२३४
वैशम्पाय़न उवाच
स गदां वहुधा दृष्ट्वा कृत्तां वाणैस्तरस्विना |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
स गदामुद्यतां दृष्ट्वा ज्वलन्तीमशनीमिव |
५ क
आदि पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
स गन्धर्वपतिर्जज्ञे कुरुवंशविवर्धनः ||
७७ ख
आदि पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
स गन्धर्वपतिर्मुख्यः क्षितौ जज्ञे नराधिपः ||
६२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१६४
वैशम्पाय़न उवाच
स गन्धर्ववचः श्रुत्वा तत्तदा भरतर्षभ |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
स गरुत्मानिवाकाशे प्रार्थय़न्भुजगोत्तमम् |
८७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२२
वसुहोम उवाच
स गर्भं शिरसा देवो वर्षपूगानधारय़त् |
१६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८६
भीष्म उवाच
स गर्भो दिव्यसंस्थानो दीप्तिमान्पावकप्रभः |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९५
अत्रिरु उवाच
स गां स्पृशतु पादेन सूर्यं च प्रतिमेहतु |
५६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
स गाढविद्धः क्रुद्धश्च तोत्त्रैर्गज इवार्दितः |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
स गाढविद्धस्तेनाशु महाराज स्तनान्तरे |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
स गाढविद्धो वलवान्हार्दिक्यस्य शरोत्तमैः |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
स गाढविद्धो वलिना भारद्वाजो महाय़शाः |
४७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
स गाढविद्धो व्यथितः प्रत्यपाय़ाद्रथान्तरम् |
३९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
स गाढविद्धो व्यथितः सृक्किणी परिसंलिहन् |
५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
स गाढविद्धो व्यथितः स्यन्दनोपस्थ आविशत् |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८९
सञ्जय़ उवाच
स गाढविद्धो व्यथितस्तोत्त्रार्दित इव द्विपः |
५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
स गाढविद्धो व्यथितो नागो भरतसत्तम |
४७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
स गाढविद्धो व्यथितो भीमसेनेन संय़ुगे |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
स गाढविद्धो व्यथितो रथोपस्थ उपाविशत् ||
३७ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
स गाढविद्धो व्यथितो रथोपस्थ उपाविशत् ||
३३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
स गाढविद्धो व्यथितो रथोपस्थ उपाविशत् |
७१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३९
सञ्जय़ उवाच
स गाढविद्धो व्यथितो रथोपस्थ उपाविशत् |
११ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३७
सञ्जय़ उवाच
स गाढविद्धो व्यथितो रथोपस्थ उपाविशत् ||
३० ग
द्रोण पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
स गाढविद्धो व्यथितो रथोपस्थ उपाविशत् |
४२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७९
सञ्जय़ उवाच
स गाढविद्धो व्यथितो रथोपस्थे महारथः |
५१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
स गाढविद्धो व्यथितो वय़ोवृद्धश्च भारत |
१८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७८
वैशम्पाय़न उवाच
स गाढवेदनो धीमानालम्व्य धनुरुत्तमम् |
२३ क
विराट पर्व
अध्याय
५५
वैशम्पाय़न उवाच
स गाढवेदनो हित्वा रणं प्राय़ादुदङ्मुखः |
२५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५७
कर्ण उवाच
स गाण्डिवाभ्याय़तपूर्णमण्डल; स्तपन्रिपूनर्जुनभास्करो वभौ |
५७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
स गार्हस्थ्याच्च्युतश्च त्वं मोक्षं नावाप्य दुर्विदम् |
१७५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२७
भीष्म उवाच
स गिरिस्तपसा तस्य भूतेशस्य व्यरोचत |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१२
भीष्म उवाच
स गिरींश्चाप्यतिक्रम्य नदीस्तीर्त्वा सरांसि च |
१३ क