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वन पर्व
अध्याय १७६
वैशम्पाय़न उवाच
अथ वा नार्जुनो धीमान्विषादमुपय़ास्यति |
३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५७
सञ्जय़ उवाच
अथ वा निहते पार्थे पाण्डुष्वन्यतमं ततः |
२१ क
शल्य पर्व
अध्याय ३०
सञ्जय़ उवाच
अथ वा निहतोऽस्माभिर्भूमौ स्वप्स्यसि भारत ||
३३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५७
सञ्जय़ उवाच
अथ वा निहतोऽस्माभिर्वीरलोकं गमिष्यसि ||
१२ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३०
युधिष्ठिर उवाच
अथ वा निहतोऽस्माभिर्व्रज लोकाननुत्तमान् ||
६३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १८९
भीष्म उवाच
अथ वा नेच्छते तत्र व्रह्मकाय़निषेवणम् |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय ९
युधिष्ठिर उवाच
अथ वा नेच्छसि प्रष्टुमपृच्छन्नपि मे शृणु ||
३ ख
विराट पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
अथ वा नेह हन्तव्या दह्यतां कामिना सह |
६ क
सभा पर्व
अध्याय ३९
शिशुपाल उवाच
अथ वा नैतदाश्चर्यं येषां त्वमसि भारत |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४
व्यास उवाच
अथ वा पञ्च षट्सप्त विजय़न्त्यनिवर्तिनः ||
३३ ग
शान्ति पर्व
अध्याय १०३
भीष्म उवाच
अथ वा पञ्च षट्सप्त सहिताः कृतनिश्चय़ाः |
२१ क
स्त्री पर्व
अध्याय ३
विदुर उवाच
अथ वा परिभुज्यन्तमेवं देहाः शरीरिणाम् ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७२
धृतराष्ट्र उवाच
अथ वा पाण्डवार्थाय़ देवास्तत्र समागताः |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२
व्यास उवाच
अथ वा पुरुषः कर्ता कर्मणोः शुभपापय़ोः |
१६ क
वन पर्व
अध्याय २९७
वैशम्पाय़न उवाच
अथ वा पुरुषैर्गूढैः प्रय़ोगोऽय़ं दुरात्मनः |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३६
भीष्म उवाच
अथ वा पूर्ववैरं त्वं स्मरन्कालं विकर्षसि |
९८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४०
भीष्म उवाच
अथ वा पौरुषेणेय़मशक्या रक्षितुं मय़ा |
४५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६९
सञ्जय़ उवाच
अथ वा फल्गुनः सर्वान्वारय़िष्यति संय़ुगे |
५८ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०३
सञ्जय़ उवाच
अथ वा फल्गुनस्यैष भारः परिमितो रणे |
३७ क
शल्य पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
अथ वा फल्गुनेनाद्य त्वय़ा वा भरतर्षभ |
५८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११
सञ्जय़ उवाच
अथ वा भरतश्रेष्ठ निर्जित्य युधि पाण्डवान् |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७२
धृतराष्ट्र उवाच
अथ वा भाव्यमेवं हि सञ्जय़ैतेन सर्वथा |
२६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १
सर्प उवाच
अथ वा मतमेतत्ते तेऽप्यन्योन्यप्रय़ोजकाः |
३४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
अथ वा मत्प्रसूतश्च स्वस्रीय़ो माधवस्य च |
४८ क
वन पर्व
अध्याय २२८
धृतराष्ट्र उवाच
अथ वा मद्वचः श्रुत्वा तत्र यत्ता भविष्यथ |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २०८
गुरुरु उवाच
अथ वा मनसः सङ्गं पश्येद्भूतानुकम्पय़ा |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २०५
गुरुरु उवाच
अथ वा मन्त्रवद्व्रूय़ुर्मांसादानां यजुष्कृतम् |
३० क
सभा पर्व
अध्याय ३४
शिशुपाल उवाच
अथ वा मन्यसे कृष्णं स्थविरं भरतर्षभ |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय ७६
अर्जुन उवाच
अथ वा मन्यसे ज्याय़ान्वधस्तेषामनन्तरम् |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय १४२
अर्जुन उवाच
अथ वा मन्यसे भारं त्वमिमं राक्षसं युधि |
२६ क
विराट पर्व
अध्याय ६३
कङ्क उवाच
अथ वा मन्यसे राजन्दीव्याव यदि रोचते ||
३५ ख
वन पर्व
अध्याय २९८
युधिष्ठिर उवाच
अथ वा मरुतां श्रेष्ठो वज्री वा त्रिदशेश्वरः ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११६
भीष्म उवाच
अथ वा मासमप्येकं सर्वमांसान्यभक्षय़न् |
६२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९९
भीष्म उवाच
अथ वा मित्रसदनं मैत्रं मित्रविवर्धनम् |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय ७०
युधिष्ठिर उवाच
अथ वा मूलघातेन द्विषतां मधुसूदन |
६६ क
आदि पर्व
अध्याय १८०
वैशम्पाय़न उवाच
अथ वा यदि कन्येय़ं नेह कञ्चिद्वुभूषति |
७ क
वन पर्व
अध्याय ६९
वृहदश्व उवाच
अथ वा यां नलो वेद विद्यां तामेव वाहुकः |
२७ क
भीष्म पर्व
अध्याय २८
श्रीभगवानु उवाच
अथ वा योगिनामेव कुले भवति धीमताम् |
४२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १३
वासुदेव उवाच
अथ वा वसतः पार्थ वने वन्येन जीवतः |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३
सहदेव उवाच
अथ वा वसतो राजन्वने वन्येन जीवतः |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय ३२
श्रीभगवानु उवाच
अथ वा वहुनैतेन किं ज्ञातेन तवार्जुन |
४२ क
सभा पर्व
अध्याय ३४
शिशुपाल उवाच
अथ वा वासुदेवोऽपि प्रिय़कामोऽनुवृत्तवान् |
७ क
विराट पर्व
अध्याय २५
वैशम्पाय़न उवाच
अथ वा विषमं प्राप्य विनष्टाः शाश्वतीः समाः ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १९२
भीष्म उवाच
अथ वा वीक्षते लोकान्सर्वान्निरय़संस्थितान् |
१२६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३८
वाय़ुरु उवाच
अथ वा व्राह्मणश्रेष्ठमनु भूतानुपालकम् |
१४ क
वन पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
अथ वा वय़मेवैतान्निहत्य भरतर्षभ |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५९
भीष्म उवाच
अथ वा शिश्नवृषणावादाय़ाञ्जलिना स्वय़म् |
४७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १००
धृतराष्ट्र उवाच
अथ वा शून्यमासीत्तद्येन यातः स सात्यकिः |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
अथ वा श्रुतसङ्काशं श्रुतमन्यच्छ्रुतं त्वय़ा ||
१६५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २६७
असित उवाच
अथ वा संनिपातोऽय़ं शरीरं पाञ्चभौतिकम् |
३० क