द्रोण पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
सत्यं वः प्रतिजानामि श्वोऽस्मि हन्ता जय़द्रथम् |
२० क
सभा पर्व
अध्याय
१९
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यं वदत के यूय़ं सत्यं राजसु शोभते ||
४० ख
वन पर्व
अध्याय
२७८
नारद उवाच
सत्यं वदत्यस्य पिता सत्यं माता प्रभाषते |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६९
द्रोण उवाच
सत्यं वदसि कौरव्य दुराधर्षो धनञ्जय़ः |
३३ क
वन पर्व
अध्याय
१९८
व्याध उवाच
सत्यं वदे नाभ्यसूय़े यथाशक्ति ददामि च |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१९२
व्राह्मण उवाच
सत्यं वेदास्तथाङ्गानि सत्यं यज्ञस्तथा विधिः |
६५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१९२
व्राह्मण उवाच
सत्यं वेदेषु जागर्ति फलं सत्ये परं स्मृतम् |
६४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
सत्यं व्रवीमि ते सेना विनाशं समुपैष्यति ||
९८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७२
भीष्म उवाच
सत्यं व्रवीमि शाल्वैतत्सत्येनात्मानमालभे ||
१५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६०
सञ्जय़ उवाच
सत्यं व्रवीम्यहं ह्येतत्सर्वं सत्यं भविष्यति ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१९२
भीष्म उवाच
सत्यं व्रवीम्यहमिदं न मे धारय़ते भवान् |
८५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१८३
भृगुरु उवाच
सत्यं व्रह्म तपः सत्यं सत्यं सृजति च प्रजाः |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
सत्यं व्रुवन्प्रीतिय़ुक्त्यानृतेन; तितिक्षमाणः क्लिश्यमानोऽतिवेलम् ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय
६
विदुर उवाच
सत्यं श्रेष्ठं पाण्डव निष्प्रलापं; तुल्यं चान्नं सह भोज्यं सहाय़ैः |
२१ क
वन पर्व
अध्याय
१८८
मार्कण्डेय़ उवाच
सत्यं सङ्क्षिप्यते लोके नरैः पण्डितमानिभिः |
३८ क
वन पर्व
अध्याय
१८८
मार्कण्डेय़ उवाच
सत्यं सङ्क्षेप्स्यते लोके नरैः पण्डितमानिभिः |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५६
भीष्म उवाच
सत्यं सत्सु सदा धर्मः सत्यं धर्मः सनातनः |
४ क
वन पर्व
अध्याय
१७७
युधिष्ठिर उवाच
सत्यं सर्प वचो व्रूहि पृच्छति त्वां युधिष्ठिरः ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यं स्तेने वलं नार्यां राज्यं दुर्योधने तथा ||
७८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८८
हंस उवाच
सत्यं स्वर्गस्य सोपानं पारावारस्य नौरिव ||
३१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३३
विदुर उवाच
सत्यं स्वर्गस्य सोपानं पारावारस्य नौरिव ||
४६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३५
व्रह्मो उवाच
सत्यं हि गुणसंय़ुक्तं निय़तं पञ्चलक्षणम् ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६२
कपिल उवाच
सत्यं हि धर्ममास्थाय़ दुराधर्षतमा मताः |
११ क
उद्योग पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यं ह्येतदहं मन्ये प्रत्यक्षं नानुमानतः ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३१
महेश्वर उवाच
सत्यः सत्यानि कुरुते नित्यं यः सुखदर्शनः ||
३६ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यकः सात्यकिश्चैव कृतवर्मा च सात्वतः |
२७ क
आदि पर्व
अध्याय
२११
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यकः सात्यकिश्चैव भङ्गकारसहाचरौ |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७
युधिष्ठिर उवाच
सत्यकञ्चुकमास्थाय़ मय़ोक्तो गुरुराहवे |
१७ क
शल्य पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
सत्यकर्माणमाक्षिप्य क्षुरप्रेण महाय़शाः |
३६ क
आदि पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यकाद्धृदिकाच्चैव जज्ञातेऽस्त्रविशारदौ ||
८८ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
सत्यजित्प्रमुखैर्वीरैर्धृष्टद्युम्नपुरोगमैः ||
४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
सत्यजित्सत्यसन्धेन द्रोणेन निहतो रणे ||
६० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६८
भीष्म उवाच
सत्यजित्समरश्लाघी द्रुपदस्यात्मजो युवा ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२४२
व्यास उवाच
सत्यतीर्थानृतक्षोभां क्रोधपङ्कां सरिद्वराम् ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
सत्यदेवं च सत्यं च प्राहिणोद्यमसादनम् ||
६९ ख
आदि पर्व
अध्याय
६९
शकुन्तलो उवाच
सत्यधर्मच्युतात्पुंसः क्रुद्धादाशीविषादिव |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
सत्यधर्मपरो दाता विप्रपूजादिभिर्गुणैः |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
११७
नारद उवाच
सत्यधर्मरतश्चान्यो यज्वा चापि तथापरः ||
२१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३२
महेश्वर उवाच
सत्यधर्मरताः सन्तः सर्वलिप्साविवर्जिताः |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२९
महेश्वर उवाच
सत्यधर्मरतिः क्षान्तो मुनिधर्मेण युज्यते ||
५४ ख
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
सत्यनामा भवाशोक मम शोकविनाशनात् ||
१०२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यनामा वसुमती यं प्राप्यासीज्जनाधिप |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५५
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यनित्यः क्षमानित्यो ज्ञाननित्योऽतिथिप्रिय़ः |
९ क
वन पर्व
अध्याय
२६१
मार्कण्डेय़ उवाच
सत्यप्रतिज्ञ यन्मे त्वं काममेकं निसृष्टवान् |
२१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यप्रतिज्ञः किल सूतपुत्र; स्तथा स भारं विषहेत कस्मात् |
१५ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यप्रतिज्ञा लोकस्य शूरा वै सत्यवादिनः ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
सत्यप्रतिज्ञे त्वानीते पुनर्द्यूतेन निर्जिते |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
१४८
हनूमानु उवाच
सत्यप्रवृत्ताश्च नराः क्रिय़ाधर्मपराय़णाः ||
२३ ख
वन पर्व
अध्याय
२२४
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यभामा ततस्तत्र स्वजित्वा द्रुपदात्मजाम् |
३ क
मौसल पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यभामा तथैवान्या देव्यः कृष्णस्य संमताः |
७२ क