chevron_left  सत्यभामाarrow_drop_down
मौसल पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यभामा प्रकुपिता कोपय़न्ती जनार्दनम् ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १८९
भीष्म उवाच
सत्यमग्निपरीचारो विविक्तानां च सेवनम् |
९ क
वन पर्व
अध्याय १८३
सनत्कुमार उवाच
सत्यमन्युर्युधाजीवः सत्यधर्मप्रवर्तकः |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२४
धृतराष्ट्र उवाच
सत्यमस्म्यसुरेन्द्राग्र्य यास्येऽहं धर्ममन्विह ||
५१ ख
वन पर्व
अध्याय २४५
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यमार्जवमक्रोधः संविभागो दमः शमः |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०९
भीष्म उवाच
सत्यमार्जवमक्रोधमनसूय़ां दमं तपः |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ८९
भीष्म उवाच
सत्यमार्जवमक्रोधमानृशंस्यं च पालय़ ||
२८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४४
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यमाह पृथा वाक्यं कर्ण मातृवचः कुरु |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय ७९
सात्यकिरु उवाच
सत्यमाह महावाहो सहदेवो महामतिः |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७४
भीष्म उवाच
सत्यमाहुः परं धर्मं तस्मात्सत्यं न लङ्घय़ेत् ||
३१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १५६
युधिष्ठिर उवाच
सत्यमिच्छाम्यहं श्रोतुं तन्मे व्रूहि पितामह ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३३
सञ्जय़ उवाच
सत्यमुक्तं त्वय़ा व्रह्मन्पाण्डवान्प्रति यद्वचः |
४५ क
वन पर्व
अध्याय २९७
युधिष्ठिर उवाच
सत्यमेकपदं स्वर्ग्यं शीलमेकपदं सुखम् ||
४९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १९२
व्राह्मण उवाच
सत्यमेकाक्षरं व्रह्म सत्यमेकाक्षरं तपः |
६३ क
शान्ति पर्व
अध्याय १९२
व्राह्मण उवाच
सत्यमेकाक्षरो यज्ञः सत्यमेकाक्षरं श्रुतम् ||
६३ ख
वन पर्व
अध्याय २४३
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यमेतत्त्वय़ा वीर पाण्डवेषु दुरात्मसु ||
११ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ११९
राजान ऊचुः
सत्यमेतद्भवतु ते काङ्क्षितं पुरुषर्षभ |
१८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७
संवर्त उवाच
सत्यमेतद्भवानाह स मां जानाति सत्रिणम् |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२६
ऋषभ उवाच
सत्यमेतद्यथा विप्र त्वय़ोक्तं नास्त्यतो मृषा ||
४५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९५
शुनःसख उवाच
सत्यमेतन्न मिथ्यैतद्विसस्तैन्यं कृतं मय़ा ||
७७ ख
वन पर्व
अध्याय २८२
गौतम उवाच
सत्यमेतन्निवोध त्वं ध्रिय़ते सत्यवानिति ||
१३ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय ४
कृप उवाच
सत्यमेतन्महावाहो प्रव्रवीमि तवानघ ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०३
भीष्म उवाच
सत्यमेतन्महावाहो यथा वदसि पाण्डव |
७० क
आदि पर्व
अध्याय ९९
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यमेतन्महावाहो यथा वदसि भारत |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
सत्यमेतन्मय़ोक्तं ते याहि यत्र धनञ्जय़ः ||
९९ ख
वन पर्व
अध्याय १९८
व्याध उवाच
सत्यमेव गरीय़स्तु शिष्टाचारनिषेवितम् |
७० क
शान्ति पर्व
अध्याय १५६
भीष्म उवाच
सत्यमेव नमस्येत सत्यं हि परमा गतिः ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय १८२
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यमेवाभिजानीमो नानृते कुर्महे मनः |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५५
तुलाधार उवाच
सत्ययज्ञा दमय़ज्ञा अलुव्धाश्चात्मतृप्तय़ः |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय ९९
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यवत्यभिवीक्ष्यैनमुवाचेदमनन्तरम् ||
२७ ख
आदि पर्व
अध्याय ९४
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यवत्या भृशं ह्यर्थी स आसीदृषिसत्तमः ||
७३ ख
आदि पर्व
अध्याय ९६
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यवत्या सह मिथः कृत्वा निश्चय़मात्मवान् ||
४६ ग
आदि पर्व
अध्याय ५६
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यवत्यात्मजेनेह व्याख्यातममितौजसा ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १७१
भीष्म उवाच
सत्यवत्यास्त्वनुमते विवाहे समुपस्थिते |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १७५
होत्रवाहन उवाच
सत्यवत्यै निवेद्याथ विवाहार्थमनन्तरम् |
२० क
वन पर्व
अध्याय २७९
मार्कण्डेय़ उवाच
सत्यवन्तं समुद्दिश्य सर्वमेव न्यवेदय़त् ||
७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ७४
भीष्म उवाच
सत्यवन्तः स्वर्गलोके मोदन्ते भरतर्षभ ||
३२ ग
द्रोण पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
सत्यवर्मा च सत्येषुः सत्यकर्मा तथैव च ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय १७८
सर्प उवाच
सत्यवाक्याच्च राजेन्द्र किञ्चिद्दानं विशिष्यते ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय ८
शकुनिरु उवाच
सत्यवाक्ये स्थिताः सर्वे पाण्डवा भरतर्षभ |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७
युधिष्ठिर उवाच
सत्यवाक्यो हि राजंस्त्वं यदि जीवति मे सुतः |
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८४
भीष्म उवाच
सत्यवाक्षीलसम्पन्नो गम्भीरः सत्रपो मृदुः |
४० क
शान्ति पर्व
अध्याय ३४३
अतिथिरु उवाच
सत्यवागनसूय़ुश्च शीलवानभिसंश्रितः ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय ९४
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यवागसि सत्येन समय़ं कुरु मे ततः ||
४८ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय १६
अश्वत्थामो उवाच
सत्यवागस्तु भगवानय़ं च पुरुषोत्तमः ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय ३९
सूत उवाच
सत्यवागस्तु स मुनिः कृमिको मां दशत्वय़म् |
३१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
सत्यवाग्दानशीलश्च व्रह्मण्यश्चानसूय़कः |
११ क
वन पर्व
अध्याय ६१
दमय़न्त्यु उवाच
सत्यवाग्धर्मवित्प्राज्ञः सत्यसन्धोऽरिमर्दनः |
७५ क
उद्योग पर्व
अध्याय ८
दुर्योधन उवाच
सत्यवाग्भव कल्याण वरो वै मम दीय़ताम् |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९०
भीष्म उवाच
सत्यवादी धर्मशीलः स्वकर्मनिरतश्च यः ||
२२ ख