वन पर्व
अध्याय
१४६
वैशम्पाय़न उवाच
हरेरिदं मे कामाय़ काम्यके पुनराश्रमे ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३१
जनमेजय़ उवाच
हरेर्विश्वेश्वरस्येह सर्वपापप्रणाशनीम् ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६८
भीष्म उवाच
हरेय़ुः सहसा पापा यदि राजा न पालय़ेत् ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६८
भीष्म उवाच
हरेय़ुर्वलवन्तो हि दुर्वलानां परिग्रहान् |
१४ क
वन पर्व
अध्याय
१८६
मार्कण्डेय़ उवाच
हर्तुं व्यवसिता राजन्माय़ाचारसमन्विताः ||
५० ख
आदि पर्व
अध्याय
२६
वृहस्पतिरु उवाच
हर्तुं सोममनुप्राप्तो वलवान्कामरूपवान् ||
३६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
हर्तुमैच्छच्छिरः काय़ात्क्रोधसंरक्तलोचनः ||
४९ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
११६
नारद उवाच
हर्म्येषु रमणीय़ेषु प्रासादशिखरेषु च |
१९ क
वन पर्व
अध्याय
२९२
वैशम्पाय़न उवाच
हर्यक्षं वृषभस्कन्धं यथास्य पितरं तथा ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
हर्यक्षः ककुभो वज्री दीप्तजिह्वः सहस्रपात् ||
१२८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३१
भीष्म उवाच
हर्यश्व इति विख्यातो वभूव जय़तां वरः ||
१० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
११४
नारद उवाच
हर्यश्वं पृथिवीपालमिदं वचनमव्रवीत् ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
११४
नारद उवाच
हर्यश्वः सत्यवचने स्थितः स्थित्वा च पौरुषे |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय
११४
नारद उवाच
हर्यश्वस्त्वव्रवीद्राजा विचिन्त्य वहुधा ततः |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३१
भीष्म उवाच
हर्यश्वस्य तु दाय़ादः काशिराजोऽभ्यषिच्यत |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
हर्याश्च हरय़ोऽपत्यं वानराश्च तरस्विनः |
६२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७६
सञ्जय़ उवाच
हर्ष एव तय़ोरासीद्द्रोणानीकप्रमुक्तय़ोः |
३४ क
शल्य पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
हर्षं प्राप तदा वीरो दुरापमकृतात्मभिः ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९२
उतथ्य उवाच
हर्षं सञ्जनय़न्नॄणां स राज्ञो धर्म उच्यते ||
३४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३१
व्राह्मण उवाच
हर्षः स्तम्भोऽभिमानश्च त्रय़स्ते सात्त्विका गुणाः ||
१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४९
सञ्जय़ उवाच
हर्षकाले तु सम्प्राप्ते कस्मात्त्वा मन्युराविशत् ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१
लुव्धक उवाच
हर्षक्रोधौ कथं स्यातामेतदिच्छामि वेदितुम् ||
५९ ख
वन पर्व
अध्याय
१६३
वैशम्पाय़न उवाच
हर्षगद्गदय़ा वाचा प्रहृष्टोऽर्जुनमव्रवीत् ||
२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४५
भीम उवाच
हर्षगद्गदय़ा वाचा प्रीतः प्राह परन्तपौ ||
७३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
हर्षणे युद्धशौण्डानां भीरूणां भय़वर्धने |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५२
सञ्जय़ उवाच
हर्षमाहारय़ां चक्रुः कुरवः सर्व एव ते ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय
१७८
वैशम्पाय़न उवाच
हर्षमाहारय़ां चक्रुर्विजह्रुश्च मुदा युताः ||
५० ख
शल्य पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
हर्षमुत्पादय़त्येतद्वचो मे जनमेजय़ ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
२६४
मार्कण्डेय़ उवाच
हर्षमेष्यसि वैदेहि क्षिप्रं भर्तृसमन्विता |
७१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४०
श्रीभगवानु उवाच
हर्षशोकान्वितः कर्ता राजसः परिकीर्तितः ||
२७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३८
व्रह्मो उवाच
हर्षस्तुष्टिर्विस्मय़श्च विनय़ः साधुवृत्तता |
७ क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
हर्षस्थानं किमर्थं वा तवाद्य मुनिपुङ्गव ||
१०३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
हर्षस्थानं किमर्थं वै तवेदं मुनिसत्तम |
३८ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
५
सूत उवाच
हर्षस्थानसहस्राणि भय़स्थानशतानि च |
४८ क
आदि पर्व
अध्याय
१२६
वैशम्पाय़न उवाच
हर्षाच्चोभौ समाश्लिष्य परां मुदमवापतुः ||
३९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
हर्षात्सौख्यात्सुखैश्वर्याद्धृषीकेशत्वमश्नुते |
९ क
आदि पर्व
अध्याय
१४
सूत उवाच
हर्षादप्रतिमां प्रीतिं प्रापतुः स्म वरस्त्रिय़ौ ||
७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
उपमन्युरु उवाच
हर्षादश्रूण्यवर्तन्त लोमहर्षश्च जाय़ते ||
१७७ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२४
वैशम्पाय़न उवाच
हर्षादारुरुहुर्मञ्चान्मेरुं देवस्त्रिय़ो यथा ||
१४ ग
शल्य पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
हर्षादुत्फुल्लनय़नो जितकाशी विशां पते ||
३८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
हर्षादुद्वीक्ष्य पलितं स्वागतेनाभ्यपूजय़त् ||
७४ ख
आदि पर्व
अध्याय
११९
वैशम्पाय़न उवाच
हर्षादेतान्क्रीडमानान्गृह्य काकनिलीय़ने |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१३९
कर्ण उवाच
हर्षाद्भय़ाद्वा गोविन्द अनृतं वक्तुमुत्सहे ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५१
सञ्जय़ उवाच
हर्षान्विता युय़ुधुस्तत्र राज; न्समन्ततः पाण्डवय़ोधवीराः ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३४
श्रीभगवानु उवाच
हर्षामर्षभय़ोद्वेगैर्मुक्तो यः स च मे प्रिय़ः ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४२
भीष्म उवाच
हर्षेण महता युक्तः कपोतः पुनरव्रवीत् ||
३८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
हर्षेण महता युक्तः कृतसञ्ज्ञे वृकोदरे ||
३५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५१
भीष्म उवाच
हर्षेण महता युक्तः सहामात्यपुरोहितः ||
२३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३५
सञ्जय़ उवाच
हर्षेण महता युक्ते परिगृह्य परस्परम् ||
५० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
हर्षेण महता युक्तो भारद्वाजे निपातिते |
४८ क