अनुशासन पर्व
अध्याय
५१
निषादा ऊचुः
हवींषि सर्वाणि यथा ह्युपभुङ्क्ते हुताशनः |
३६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२०
वासुदेव उवाच
हवींष्यग्निषु होतारः सप्तधा सप्त सप्तसु |
२२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१०
व्यास उवाच
हवींष्युच्चैराह्वय़न्देवसङ्घा; ञ्जुहावाग्नौ मन्त्रवत्सुप्रतीतः ||
३१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४७
भीष्म उवाच
हव्यं कव्यं च यच्चान्यद्धर्मय़ुक्तं भवेद्गृहे ||
३२ ख
वन पर्व
अध्याय
२२०
स्कन्द उवाच
हव्यं कव्यं च यत्किञ्चिद्द्विजा मन्त्रपुरस्कृतम् |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३१
नारद उवाच
हव्यं कव्यं च सततं विधिपूर्वं प्रय़ुञ्जते |
४९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२३
युधिष्ठिर उवाच
हव्यं कव्यं तथा दानं को दोषः स्यात्पितामह ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७६
भीष्म उवाच
हव्यं कव्यं तर्पणं शान्तिकर्म; यानं वासो वृद्धवालस्य पुष्टिम् |
३३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६३
भीष्म उवाच
हव्यं कव्यं यानि चान्यानि राज; न्देय़ान्यदेय़ानि भवन्ति तस्मिन् ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय
२१३
मार्कण्डेय़ उवाच
हव्यं गृहीत्वा वह्निं च प्रविशन्तं दिवाकरम् ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
जनमेजय़ उवाच
हव्यकव्यभुजो विष्णोरुदक्पूर्वे महोदधौ |
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०
भीष्म उवाच
हव्यकव्यविधिं कृत्स्नमुक्तं तेन तपस्विना ||
२९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६८
भीष्म उवाच
हव्यकव्यव्यपेताय़ न देय़ा गौः कथञ्चन ||
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८२
भीष्म उवाच
हव्यकव्येषु यज्ञेषु पितृकार्येषु चैव ह |
४४ ख
वन पर्व
अध्याय
२६०
मार्कण्डेय़ उवाच
हव्यवाहं पुरस्कृत्य व्रह्माणं शरणं गताः ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३९
युधिष्ठिर उवाच
हसन्तं प्रहसन्त्येता रुदन्तं प्ररुदन्ति च |
६ क
वन पर्व
अध्याय
१०२
लोमश उवाच
हसन्तमिव फेनौघैः स्खलन्तं कन्दरेषु च |
२२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
हसन्ति गान्ति नृत्यन्ति स्त्रीभिर्मत्ता विवाससः |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२६
वैशम्पाय़न उवाच
हसन्ति व्यसने तस्य दुर्हृदो नचिरादिव ||
२९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
देवा ऊचुः
हसन्निवाव्रवीद्देवो सारथिः को भविष्यति ||
९४ ख
आदि पर्व
अध्याय
३९
सूत उवाच
हसन्नेव च भोगेन तक्षकेणाभिवेष्टितः |
३३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
हसमानौ नृशार्दूलावभीतौ समगच्छताम् ||
२० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५१
वैशम्पाय़न उवाच
हसितं तेऽमला ज्योत्स्ना ऋतवश्चेन्द्रिय़ान्वय़ाः ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९०
भीष्म उवाच
हसितोत्क्रुष्टनिर्घोषं नानाज्ञानसुदुस्तरम् |
६६ क
वन पर्व
अध्याय
२५२
द्रौपद्यु उवाच
हस्तं समाहत्य धनञ्जय़स्य; भीमाः शव्दं घोरतरं नदन्ति ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३३
महेश्वर उवाच
हस्तपादैः सुनिय़तैर्विश्वास्यः सर्वजन्तुषु ||
३८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९५
सञ्जय़ उवाच
हस्तप्राप्तमहं मन्ये साम्प्रतं सव्यसाचिनम् |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
हस्तप्राप्तस्य वीरस्य तं चैव पुरुषं विदुः ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७३
सञ्जय़ उवाच
हस्तलाघवमस्त्रेषु दर्शय़न्तौ महावलौ |
३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६२
सञ्जय़ उवाच
हस्तसंस्पर्शमापन्नान्परान्वाप्यथ वा स्वकान् |
२९ क
आदि पर्व
अध्याय
१२३
वैशम्पाय़न उवाच
हस्तस्तेजस्विनो नित्यमन्नग्रहणकारणात् |
४ ख
वन पर्व
अध्याय
१६८
अर्जुन उवाच
हस्ताद्धिरण्मय़श्चास्य प्रतोदः प्रापतद्भुवि |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
हस्तानामुत्तमाङ्गानां कार्मुकाणां च भारत |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३३
महेश्वर उवाच
हस्ताभ्यां यदि वा पद्भ्यां रज्ज्वा दण्डेन वा पुनः ||
३२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४२
व्रह्मो उवाच
हस्तावध्यात्ममित्याहुरध्यात्मविदुषो जनाः |
३६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०१
याज्ञवल्क्य उवाच
हस्तावध्यात्ममित्याहुर्यथासाङ्ख्यनिदर्शनम् |
४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८३
वैशम्पाय़न उवाच
हस्तावापं पताकां च ध्वजं चास्य न्यपातय़त् ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
हस्तावापं सुवाहोस्तु भल्लेन युधि पाण्डवः |
१९ क
विराट पर्व
अध्याय
५०
अर्जुन उवाच
हस्तावापी वृहद्धन्वा रथे तिष्ठति वीर्यवान् ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१७४
भीष्म उवाच
हस्तावापेन गच्छन्ति नास्तिकाः किमतः परम् ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
हस्तिकक्ष्या पुनर्हैमी वभूवाधिरथेर्ध्वजे |
१२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
हस्तिकक्ष्यां च कर्णस्य वानरं च किरीटिनः ||
७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
हस्तिकक्ष्यां रणे पश्य चरन्तीं तत्र तत्र ह |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
हस्तिकक्ष्यामहाकेतुर्वभौ सूर्यसमद्युतिः ||
९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
हस्तिकक्ष्यो महानस्य भल्लेनोन्मथितस्त्वय़ा |
८८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
हस्तिकक्ष्यो ह्यसौ कृष्ण केतुः कर्णस्य धीमतः |
८१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
हस्तिग्राहां केतुवृक्षां क्षत्रिय़ाणां निमज्जनीम् |
३६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८८
भीष्म उवाच
हस्तिच्छाय़ासु विधिवत्कर्णव्यजनवीजितम् ||
१३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
हस्तिदन्तत्सरून्खड्गाञ्जातरूपपरिष्कृतान् |
३० क
भीष्म पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
हस्तिदन्तत्सरून्खड्गाञ्जातरूपपरिष्कृतान् |
४९ क