chevron_left  अश्वमेधसहस्रंarrow_drop_down
अनुशासन पर्व
अध्याय २३
मार्कण्डेय़ उवाच
अश्वमेधसहस्रं च सत्यं च तुलय़ा धृतम् |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७४
भीष्म उवाच
अश्वमेधसहस्रं च सत्यं च तुलय़ा धृतम् |
२९ क
आदि पर्व
अध्याय ६९
शकुन्तलो उवाच
अश्वमेधसहस्रं च सत्यं च तुलय़ा धृतम् |
२२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
अश्वमेधसहस्रस्य फलं प्राप्नोत्यनुत्तमम् ||
४१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१०
भीष्म उवाच
अश्वमेधसहस्रस्य वाजपेय़शतस्य च |
९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७४
भीष्म उवाच
अश्वमेधसहस्राद्धि सत्यमेव विशिष्यते ||
२९ ख
आदि पर्व
अध्याय ६९
शकुन्तलो उवाच
अश्वमेधसहस्राद्धि सत्यमेव विशिष्यते ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १५६
भीष्म उवाच
अश्वमेधसहस्राद्धि सत्यमेवातिरिच्यते ||
२६ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १२
धृतराष्ट्र उवाच
अश्वमेधसहस्रेण यो यजेत्पृथिवीपतिः |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
अश्वमेधसहस्रेण राजसूय़शतेन च |
४२ क
वन पर्व
अध्याय ८०
पुलस्त्य उवाच
अश्वमेधसहस्रेण श्रेय़ान्सप्तार्चिषश्चरुः ||
१०७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७०
वैशम्पाय़न उवाच
अश्वमेधस्य कौरव्य चकाराहरणे मतिम् ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०९
अङ्गिरा उवाच
अश्वमेधस्य यज्ञस्य फलं प्राप्नोति मानवः ||
४२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
अश्वमेधस्य यज्ञस्य फलं प्राप्नोति मानवः |
३७ क
वन पर्व
अध्याय ८२
पुलस्त्य उवाच
अश्वमेधस्य यत्पुण्यं तन्मासेनाधिगच्छति ||
१२४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६
भीष्म उवाच
अश्वमेधादिभिर्यज्ञैः सत्कृतः कोसलाधिपः |
३२ क
वन पर्व
अध्याय ६१
दमय़न्त्यु उवाच
अश्वमेधादिभिर्वीर क्रतुभिः स्वाप्तदक्षिणैः |
१३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८२
अर्जुन उवाच
अश्वमेधे महाय़ज्ञे द्विजातिपरिवेषकः ||
२६ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
अश्वमेधे महाय़ज्ञे नकुलाख्यानमेव च ||
२०९ ग
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९२
वैशम्पाय़न उवाच
अश्वमेधे महाय़ज्ञे निवृत्ते यदभूद्विभो ||
२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९१
वैशम्पाय़न उवाच
अश्वमेधे महाय़ज्ञे पृथिवी दक्षिणा स्मृता |
११ क
आदि पर्व
अध्याय ११२
वैशम्पाय़न उवाच
अश्वमेधे महाय़ज्ञे व्युषिताश्वः प्रतापवान् |
१२ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४२
सूत उवाच
अश्वमेधे श्रुतिश्चेय़मश्वसञ्ज्ञपनं प्रति |
१० क
सभा पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
अश्वमेधे हय़ं मेध्यमुत्सृष्टं रक्षिभिर्वृतम् |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५९
भीष्म उवाच
अश्वमेधेन वापीष्ट्वा गोमेधेनापि वा पुनः |
४८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२७
यम उवाच
अश्वमेधैश्च यष्टव्यं वहुभिः स्वाप्तदक्षिणैः |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
अश्वमेधो महाय़ज्ञः प्राय़श्चित्तमुदाहृतम् |
२६ क
वन पर्व
अध्याय ३१
द्रौपद्यु उवाच
अश्वमेधो राजसूय़ः पुण्डरीकोऽथ गोसवः |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
अश्वमेधो राजसूय़स्तथेष्टः; पापस्यान्तं कर्मणो मा पुनर्गाः ||
१५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७०
व्यास उवाच
अश्वमेधो हि राजेन्द्र पावनः सर्वपाप्मनाम् |
१६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
अश्वरत्नोत्तरं राज्ञः कौन्तेय़स्य महात्मनः ||
३४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२८
वैशम्पाय़न उवाच
अश्वराजश्च निहतः कंसश्चारिष्टमाचरन् ||
४६ ख
आदि पर्व
अध्याय ८९
वैशम्पाय़न उवाच
अश्ववन्तमभिष्वन्तं तथा चित्ररथं मुनिम् |
४४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६०
भीष्म उवाच
अश्ववन्ति च यानानि वेश्मानि शय़नानि च ||
१३ ख
विराट पर्व
अध्याय ३
नकुल उवाच
अश्ववन्धो भविष्यामि विराटनृपतेरहम् |
२ क
विराट पर्व
अध्याय ३९
अर्जुन उवाच
अश्ववन्धोऽथ नकुलः सहदेवस्तु गोकुले |
६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७१
व्यास उवाच
अश्वविद्याविदश्चैव सूता विप्राश्च तद्विदः |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७२
सञ्जय़ उवाच
अश्ववृन्दान्यदृश्यन्त रथवृन्दानि चाभिभो |
२६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
अश्ववृन्देषु नागेषु रथानीकेषु चाभिभूः |
४० क
भीष्म पर्व
अध्याय ७७
सञ्जय़ उवाच
अश्ववृन्दैर्महद्भिश्च ऋष्टितोमरधारिभिः ||
१३ ख
विराट पर्व
अध्याय ४३
कर्ण उवाच
अश्ववेगपुरोवातो रथौघस्तनय़ित्नुमान् |
१४ क
वन पर्व
अध्याय ६९
वृहदश्व उवाच
अश्वशालामुपागम्य भाङ्गस्वरिनृपाज्ञय़ा ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
अश्वश्चातिप्रमाणय़ुक्तः |
१७० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७१
वैशम्पाय़न उवाच
अश्वश्चोत्सृज्यतामद्य पृथ्व्यामथ यथाक्रमम् |
११ क
आदि पर्व
अध्याय २१९
वैशम्पाय़न उवाच
अश्वसेनं मय़ं चापि चतुरः शार्ङ्गकानिति ||
४० ख
आदि पर्व
अध्याय २१८
वैशम्पाय़न उवाच
अश्वसेनस्तु तत्रासीत्तक्षकस्य सुतो वली |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ९९
इन्द्र उवाच
अश्वस्कन्धैर्गजस्कन्धैस्तस्य लोका यथा मम ||
३५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
अश्वस्तथैव मिथुनमेवमेवानुदृश्यते ||
३७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
अश्वस्तनमृषीणां हि विद्यते वेद तद्भवान् |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २३७
व्यास उवाच
अश्वस्तनविधानः स्यान्मुनिर्भावसमन्वितः |
६ क