शान्ति पर्व
अध्याय
२२१
भीष्म उवाच
अभ्यगच्छत्त्रिलोकेशं शक्रं चर्षिं च नारदम् ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८१
सञ्जय़ उवाच
अभ्यगच्छत्समाय़ान्तं विकर्णस्ते सुतः प्रभो ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२४
व्यास उवाच
अभ्यगच्छत्सहामात्यः पद्भ्यामेव नरेश्वरः ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय
२०८
वैशम्पाय़न उवाच
अभ्यगच्छत्सुपुण्यानि शोभितानि तपस्विभिः ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०४
नारद उवाच
अभ्यगच्छत्स्वय़ं भूत्वा वसिष्ठो भगवानृषिः ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय
५१
वृहदश्व उवाच
अभ्यगच्छददीनात्मा दमय़न्तीमनुव्रतः ||
२५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
६२
वैशम्पाय़न उवाच
अभ्यगच्छददीनात्मा धृतराष्ट्रनिवेशनम् |
३४ क
स्त्री पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
अभ्यगच्छन्त सहिताः पृथां पृथुलवक्षसः ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय
१४५
वैशम्पाय़न उवाच
अभ्यगच्छन्त सुप्रीताः सर्व एव महर्षय़ः |
३२ ख
वन पर्व
अध्याय
९२
लोमश उवाच
अभ्यगच्छन्धर्मशीलाः पुण्यान्याय़तनानि च ||
१३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२०
भीष्म उवाच
अभ्यगच्छन्नदीं पुण्यां वाहुदां धर्मदाय़िनीम् ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय
५८
वैशम्पाय़न उवाच
अभ्यगच्छन्नृतौ नारीं न कामान्नानृतौ तथा |
९ क
सभा पर्व
अध्याय
२४
वैशम्पाय़न उवाच
अभ्यगच्छन्महातेजाः पौरवं पुरुषर्षभः ||
१३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५८
वैशम्पाय़न उवाच
अभ्यगच्छन्महात्मानं देवा इव शतक्रतुम् ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
अभ्यगच्छन्महारण्यं हिडिम्ववनमन्तिकात् ||
८५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२४
व्यास उवाच
अभ्यगच्छन्महावाहो लिखितः संशितव्रतः ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
अभ्यगाज्जवनैरश्वैः काम्वोजानामनीकिनीम् ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
अभ्यगात्सह पुङ्खेन वल्मीकमिव पन्नगः ||
३८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
अभ्यगाद्धरणीं घोरः श्वसन्निव महोरगः ||
३८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
अभ्यगाद्धरणीं तूर्णं लोहितार्द्रो ज्वलन्निव ||
३४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
अभ्यगाद्धरणीं राजंश्च्युतं ज्योतिरिवाम्वरात् ||
३१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
अभ्यगाद्धरणीं वाणो हंसः पद्मसरो यथा ||
३६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
अभ्यगाद्धरणीमुग्रो रुधिरेण समुक्षितः ||
३८ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
अभ्यगाद्भारतीं सेनां निघ्नन्पार्थो वरान्वरान् ||
२६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
अभ्यगाद्भारतीं सेनां हतशेषां महारथः ||
४६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
अभ्यगाद्वाहिनीं भित्त्वा वृत्रहेवासुरीं चमूम् ||
४३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१११
सञ्जय़ उवाच
अभ्यगुर्धरणीं तीक्ष्णा वल्मीकमिव पन्नगाः ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८५
सञ्जय़ उवाच
अभ्यगुर्धरणीं राजञ्श्वसन्त इव पन्नगाः ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय
२७१
मार्कण्डेय़ उवाच
अभ्यघ्नंश्च महाकाय़ैर्वहुभिर्जगतीरुहैः |
२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
अभ्यघ्नंस्तावकान्युद्धे मुहूर्तादिव भारत |
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय
९
सूत उवाच
अभ्यघ्नद्रुषितो विप्रस्तमुवाचाथ डुण्डुभः ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय
१७०
अर्जुन उवाच
अभ्यघ्नन्दानवेन्द्रा मां क्रुद्धास्तीव्रपराक्रमाः ||
१७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७३
वैशम्पाय़न उवाच
अभ्यघ्नन्निशितैर्वाणैर्वीभत्सुः परवीरहा ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
अभ्यघ्नन्भारतांश्चैव सपत्नानां वलानि च ||
३२ ग
शल्य पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
अभ्यघ्नन्युय़ुधानश्च मद्रराजपदानुगान् ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
अभ्यघ्नन्समरे भीमं तैलधौताः सुतेजनाः ||
२१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
अभ्यचोदय़दव्यग्रः सहदेवं महावलम् ||
३२ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
अभ्यजानदमेय़ात्मा द्रोणपुत्रं महारथम् ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
१५६
वैशम्पाय़न उवाच
अभ्यतिक्रम्य शिखरं शैलस्यास्य युधिष्ठिर |
२३ क
वन पर्व
अध्याय
१७९
वैशम्पाय़न उवाच
अभ्यतीता शिवा तेषां चरतां मरुधन्वसु ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
अभ्यतीतानि कालेन कालो हि दुरतिक्रमः ||
४१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८२
वैशम्पाय़न उवाच
अभ्यतीत्य तु तत्सर्वमुवाच मधुसूदनः |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
अभ्यतीत्य रथानीकं दृढसेनमपातय़त् ||
४० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवंस्ते राधेय़ं वृकाः क्षुद्रमृगं यथा ||
४१ ख
आदि पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
अभ्यद्रवच्च तं सद्यो दृष्ट्वैवामिषशङ्कय़ा ||
४५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६९
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवञ्जिघांसन्तः परस्परवधैषिणः ||
३७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४०
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवत गच्छध्वं द्रोणमेव जिघांसय़ा ||
२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवत गाङ्गेय़ं पुत्रस्य तव पश्यतः ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवत गाङ्गेय़ं श्रुत्वा पार्थस्य भाषितम् ||
३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवत तां सेनां कौरवीं पाण्डुनन्दनः ||
५९ ख