शल्य पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
आसाद्य च कुरुश्रेष्ठ तदा द्वैपाय़नह्रदम् |
२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८३
वैशम्पाय़न उवाच
आसाद्य च महातेजा मेघसन्धिर्धनञ्जय़म् |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
आसाद्य च रणे यत्तो युय़ुधानमय़ोधय़त् ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२०
भीष्म उवाच
आसाद्य तमृषिं सर्वाः सम्भ्रान्ता गतचेतसः ||
२८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४९
वैशम्पाय़न उवाच
आसाद्य तु कुरुक्षेत्रं व्यूढानीकाः प्रहारिणः |
६३ क
वन पर्व
अध्याय
५६
वृहदश्व उवाच
आसाद्य तु नलं वीरं पुष्करः परवीरहा |
७ क
आदि पर्व
अध्याय
१५१
वैशम्पाय़न उवाच
आसाद्य तु वनं तस्य रक्षसः पाण्डवो वली |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९२
वैशम्पाय़न उवाच
आसाद्य तु सभाद्वारमृषभः सर्वसात्वताम् |
३० क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२८
वैशम्पाय़न उवाच
आसाद्य न भविष्यन्ति पतङ्गा इव पावकम् ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय
२५२
धौम्य उवाच
आसाद्य पाण्डवान्वीरान्धर्मराजपुरोगमान् ||
२६ ख
विराट पर्व
अध्याय
६३
वैशम्पाय़न उवाच
आसाद्य भवनद्वारं पित्रे स प्रत्यहारय़त् ||
४९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
आसाद्य भीमसेनं तु संरव्धा युद्धदुर्मदाः |
४२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
आसाद्य माममोघेषुं गमिष्यन्ति दिशो दश |
२१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५८
सञ्जय़ उवाच
आसाद्य माममोघेषुं द्रविष्यन्ति दिशो दश ||
३६ ख
आदि पर्व
अध्याय
९२
वैशम्पाय़न उवाच
आसाद्य शन्तनुस्तां च वुभुजे कामतो वशी |
३७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
आसाद्य शरतल्पस्थमृषिभिः परिवारितम् ||
१७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४९
वैशम्पाय़न उवाच
आसाद्य सरितं पुण्यां कुरुक्षेत्रे हिरण्वतीम् |
७३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
२१
वैशम्पाय़न उवाच
आसाद्येमान्कुरुश्रेष्ठान्स्मरिष्यन्ति वचो मम ||
१५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१९
व्राह्मण उवाच
आसादय़ति तद्व्रह्म यद्दृष्ट्वा स्यात्प्रधानवित् ||
४३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१३
जनक उवाच
आसादय़ति शुद्धात्मा मोक्षं वै प्रथमाश्रमे ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३४
कर्ण उवाच
आसादय़तु मद्वीर्यं मुञ्चेमं कुरुसत्तम ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६९
सञ्जय़ उवाच
आसादय़तु मामेष धराधरमिवानिलः ||
५५ ख
वन पर्व
अध्याय
१८६
मार्कण्डेय़ उवाच
आसादय़ामि नैवान्तं तस्य राजन्महात्मनः ||
१११ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२९
सञ्जय़ उवाच
आसादय़िष्याम्यहमुग्रवीर्यं; द्विपोत्तमं मत्तमिवाभिमत्तः ||
२६ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
१६
वैशम्पाय़न उवाच
आसामपरिपूर्णार्थं निशम्य परिदेवितम् |
४६ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२०
गान्धार्यु उवाच
आसामातपतप्तानामाय़ासेन च योषिताम् |
३१ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२५
गान्धार्यु उवाच
आसामाय़तनेत्राणां सुस्वराणां जनार्दन |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७६
भीष्म उवाच
आसामैश्वर्यमश्नीहि सर्वामृतमय़ं शुभम् ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३१
नारद उवाच
आसिष्ये तत्परो भूत्वा युवाभ्यां सह नित्यशः ||
५२ ख
वन पर्व
अध्याय
१३
अर्जुन उवाच
आसीः कृष्ण सरस्वत्यां सत्रे द्वादशवार्षिके ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय
२२१
मार्कण्डेय़ उवाच
आसीच्च निश्चितं तेषां जितमस्माभिरित्युत ||
५९ ख
विराट पर्व
अध्याय
९
सहदेव उवाच
आसीच्च स मय़ा तुष्टः कुरुराजो युधिष्ठिरः ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
आसीच्छक्त्यसिसम्पातो युद्धमासीत्परश्वधैः ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय
२७८
मार्कण्डेय़ उवाच
आसीच्छाल्वेषु धर्मात्मा क्षत्रिय़ः पृथिवीपतिः |
७ क
वन पर्व
अध्याय
३३
द्रौपद्यु उवाच
आसीत न चिरं जीवेदनाथ इव दुर्वलः ||
१३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३३
भीष्म उवाच
आसीताधोमुखस्तूष्णीं समुत्थाय़ व्रजेत वा ||
२३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
आसीत्कटकटाशव्दः सुमहान्रोमहर्षणः ||
६६ ग
आदि पर्व
अध्याय
११२
वैशम्पाय़न उवाच
आसीत्काक्षीवती चास्य भार्या परमसंमता |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३४१
भीष्म उवाच
आसीत्किल कुरुश्रेष्ठ महापद्मे पुरोत्तमे |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२०
भीष्म उवाच
आसीत्किल महाराज शुकाभिपतने तदा ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
आसीत्किलकिलाशव्दः प्रहृष्टानां दिवौकसाम् |
४१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
आसीत्किलकिलाशव्दस्तलशङ्खरवैः सह |
३ क
आदि पर्व
अध्याय
६३
वैशम्पाय़न उवाच
आसीत्किलकिलाशव्दस्तस्मिन्गच्छति पार्थिवे ||
४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४
व्यास उवाच
आसीत्कृतय़ुगे पूर्वं मनुर्दण्डधरः प्रभुः |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
आसीत्केशपरामर्शो मुष्टिय़ुद्धं च दारुणम् |
२६ क
आदि पर्व
अध्याय
१५७
वैशम्पाय़न उवाच
आसीत्तपोवने काचिदृषेः कन्या महात्मनः |
६ क
आदि पर्व
अध्याय
१८९
व्यास उवाच
आसीत्तपोवने काचिदृषेः कन्या महात्मनः |
४१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
आसीत्तस्मिन्समास्तीर्णा पतितैर्भूर्नगैरिव ||
५१ ख
वन पर्व
अध्याय
१५८
वैशम्पाय़न उवाच
आसीत्तस्यामवस्थाय़ां कुवेरमपि पश्यतः ||
३९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
आसीत्तावत्तु मैत्री नौ यावद्धेतुरभूत्पुरा |
१५५ क