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आदि पर्व
अध्याय १८१
वैशम्पाय़न उवाच
वारय़िष्यामि सङ्क्रुद्धान्मन्त्रैराशीविषानिव ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०८
धृतराष्ट्र उवाच
वारय़ेद्यो रणे कर्णः सय़क्षासुरमानवान् ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय १४
वासुदेव उवाच
वारय़ेय़महं द्यूतं वहून्दोषान्प्रदर्शय़न् |
३ क
आदि पर्व
अध्याय १२५
वैशम्पाय़न उवाच
वारय़ैतौ महावीर्यौ कृतय़ोग्यावुभावपि |
४ क
आदि पर्व
अध्याय ९७
वैशम्पाय़न उवाच
वाल एव गतः स्वर्गमपुत्रः पुरुषर्षभ ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय ४५
सूत उवाच
वाल एवाभिजातोऽसि सर्वभूतानुपालकः ||
१६ ग
स्त्री पर्व
अध्याय २०
गान्धार्यु उवाच
वालं त्वां परिवार्यैकं मम दुःखाय़ जघ्नुषाम् |
१८ क
सभा पर्व
अध्याय १६
कृष्ण उवाच
वालं पुत्रमुपादातुं मेघलेखेव भास्करम् ||
४६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४९
भीष्म उवाच
वालं मृतं गृहीत्वाथ श्मशानाभिमुखाः स्थिताः |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३५
सुधन्वो उवाच
वालः सुखैधितो गेहे न त्वं किञ्चन वुध्यसे ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
वालः स्वपिति यश्चैकस्तस्मै माय़ात्मने नमः ||
३८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२१
श्रीरु उवाच
वालकोट्यग्रमात्रेण स्वार्थेनाघ्नत तद्वसु ||
६९ ख
वन पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
वालकोट्यां वृषप्रस्थे गिरावुष्य च पाण्डवाः |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७५
सञ्जय़ उवाच
वालक्रीडनकेनेव कदर्थीकृत्य नो वलम् ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय ११९
वैशम्पाय़न उवाच
वालक्रीडासु सर्वासु विशिष्टाः पाण्डवाभवन् ||
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
वासुदेव उवाच
वालखिल्या मघवता अवज्ञाताः पुरा किल |
६२ क
शल्य पर्व
अध्याय ३६
वैशम्पाय़न उवाच
वालखिल्या महाराज अश्मकुट्टाश्च तापसाः |
४५ क
आदि पर्व
अध्याय २६
सूत उवाच
वालखिल्यांस्तपःसिद्धानिदमुद्दिश्य कारणम् ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय २७
सूत उवाच
वालखिल्यानुपागम्य कर्मसिद्धिमपृच्छत ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३६
वैशम्पाय़न उवाच
वालखिल्यानृषीन्सर्वान्धर्ममेतमपाठय़त् |
१६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२९
महेश्वर उवाच
वालखिल्यास्तपःसिद्धा मुनय़ः सूर्यमण्डले |
३९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १५१
भीष्म उवाच
वालखिल्यास्तपःसिद्धाः कृष्णद्वैपाय़नस्तथा |
८ क
वन पर्व
अध्याय ८८
धौम्य उवाच
वालखिल्यैर्महाराज यत्रेष्टमृषिभिः पुरा ||
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०
भीष्म उवाच
वालखिल्यैश्च वहुभिर्यतिभिश्च निषेवितम् ||
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
वालभावमतिक्रान्तान्यौवनस्थांश्च तानहम् |
७ क
वन पर्व
अध्याय २८७
वैशम्पाय़न उवाच
वालभावाद्विकुर्वन्ति प्राय़शः प्रमदाः शुभे ||
२६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८३
वैशम्पाय़न उवाच
वालभावान्महाराज प्रोवाचेदं न कौशलात् ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५
भीष्म उवाच
वालभावे च सङ्गुप्तः शत्रुभिश्च न धर्षितः ||
२१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६०
वैशम्पाय़न उवाच
वालभावेन विजय़मात्मनोऽकथय़त्प्रभुः ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १७३
व्यास उवाच
वालमङ्कगतं कृत्वा स्वय़ं पञ्चशिखं पुनः |
५९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३२
धृतराष्ट्र उवाच
वालमत्यन्तसुखिनं विचरन्तमभीतवत् |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ४१
धृतराष्ट्र उवाच
वालमत्यन्तसुखिनमवार्यवलदर्पितम् |
१ क
वन पर्व
अध्याय २२९
वैशम्पाय़न उवाच
वालवत्साश्च या गावः कालय़ामास ता अपि ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३४६
भीष्म उवाच
वालवृद्धमिदं सर्वं पीड्यते धर्मसङ्कटात् ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४९
गृध्र उवाच
वालवृद्धसहस्राणि सदा सन्त्यज्य वान्धवाः |
६८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६६
भीष्म उवाच
वालवृद्धेषु कौरव्य सर्वावस्थं युधिष्ठिर |
१४ क
कर्ण पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
वालश्चन्द्रं मातुरङ्के शय़ानो; यथा कश्चित्प्रार्थय़तेऽपहर्तुम् |
३३ क
शान्ति पर्व
अध्याय १०४
भीष्म उवाच
वालसंसेवितं ह्येतद्यदमर्षो यदक्षमा |
७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०९
अङ्गिरा उवाच
वालसूर्यप्रतीकाशे विमाने हेमवर्चसि |
५९ क
सभा पर्व
अध्याय १६
कृष्ण उवाच
वालस्ताम्रतलं मुष्टिं कृत्वा चास्ये निधाय़ सः |
४२ क
वन पर्व
अध्याय १८३
गौतम उवाच
वालस्त्वमसि मूढश्च वृद्धः केनापि हेतुना ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८४
पराशर उवाच
वालस्नेहपरीतात्मा तत्क्षय़ाच्चानुतप्यते ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय १४७
वैशम्पाय़न उवाच
वालस्य वाक्यमव्यक्तं हर्षः समभवन्महान् ||
२३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७७
वैशम्पाय़न उवाच
वालस्य हतवन्धोश्च पार्थ किञ्चिदजानतः |
३७ क
वन पर्व
अध्याय २७८
नारद उवाच
वालस्याश्वाः प्रिय़ाश्चास्य करोत्यश्वांश्च मृन्मय़ान् |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८४
देवा ऊचुः
वालस्येव प्रवृद्धस्य कलमव्यक्तमद्भुतम् ||
४१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९३
श्वशुर उवाच
वाला क्षुधार्ता नारी च रक्ष्या त्वं सततं मय़ा |
४९ क
सभा पर्व
अध्याय ३४
शिशुपाल उवाच
वाला यूय़ं न जानीध्वं धर्मः सूक्ष्मो हि पाण्डवाः |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
वाला विहीनाः पित्रा ते त्वय़ैव परिवर्धिताः |
३८ क
उद्योग पर्व
अध्याय ८८
वैशम्पाय़न उवाच
वाला विहीनाः पित्रा ते मय़ा सततलालिताः |
९ क