सभा पर्व
अध्याय
६३
द्रौपद्यु उवाच
राजपुत्रः पुरा भूत्वा यथा नान्यः पुमान्क्वचित् |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय
५१
युधिष्ठिर उवाच
राजपुत्रशतं चाग्र्यं वीरांश्चालक्षितान्वहून् ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
राजपुत्रशतं तद्वत्सौभद्रेणापतद्धतम् ||
२७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११९
व्यास उवाच
राजपुत्रसुखं प्राप्य ऋतूंश्चैवाप्तदक्षिणान् |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय
११०
वैशम्पाय़न उवाच
राजपुत्रस्तु कौरव्यः पाण्डुर्मूलफलाशनः |
४२ क
सभा पर्व
अध्याय
५८
युधिष्ठिर उवाच
राजपुत्रा इमे राजञ्शोभन्ते येन भूषिताः |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
राजपुत्रा महेष्वासाः सर्वे विक्रान्तय़ोधिनः ||
१३ ग
आदि पर्व
अध्याय
१३३
वैशम्पाय़न उवाच
राजपुत्रानिमान्वालान्धृतराष्ट्रो न मृष्यते ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२२
वैशम्पाय़न उवाच
राजपुत्रास्तथैवान्ये समेत्य भरतर्षभ |
४६ क
वन पर्व
अध्याय
१४१
भीम उवाच
राजपुत्री श्रमेणार्ता दुःखार्ता चैव भारत |
८ क
स्त्री पर्व
अध्याय
१४
वैशम्पाय़न उवाच
राजपुत्रीं च पाञ्चालीमेकवस्त्रां रजस्वलाम् |
५ क
स्त्री पर्व
अध्याय
१८
गान्धार्यु उवाच
राजपुत्रीं महावाहो मनो न व्युपशाम्यति ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१३८
धृतराष्ट्र उवाच
राजपुत्रैः परिवृतस्तथामात्यैश्च सञ्जय़ |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
राजपुत्रो भवानत्र राजभ्राता महारथः |
३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७१
वैशम्पाय़न उवाच
राजपुत्रो महावाहुः श्यामो राजीवलोचनः |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
२६६
मार्कण्डेय़ उवाच
राजपुत्रौ कुशलिनौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ |
६१ क
वन पर्व
अध्याय
२७७
मार्कण्डेय़ उवाच
राजपुत्र्यां तु गर्भः स मालव्यां भरतर्षभ |
२२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१७४
भीष्म उवाच
राजपुत्र्याः प्रकृत्या च कुमार्यास्तव भामिनि ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय
७१
वृहदश्व उवाच
राजप्रेष्यैरनुगतो दिष्टं वेश्म समाविशत् ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६३
भीष्म उवाच
राजप्रैष्यं कृषिधनं जीवनं च वणिज्यया |
३ क
शल्य पर्व
अध्याय
३१
धृतराष्ट्र उवाच
राजभावेन मान्यश्च सर्वलोकस्य सोऽभवत् ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३९
युधिष्ठिर उवाच
राजभिः पीडिते लोके चोरैर्वापि विशां पते ||
२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१११
सञ्जय़ उवाच
राजभिः समरे सार्धमभिपेतुर्जिघांसवः ||
३२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
राजभिर्नालभच्छर्म सूतपुत्रवधं स्मरन् ||
६ ख
सभा पर्व
अध्याय
६
वैशम्पाय़न उवाच
राजभिर्यद्यथा कार्यं पुरा तत्तन्न संशय़ः |
३ क
वन पर्व
अध्याय
२४८
वैशम्पाय़न उवाच
राजभिर्वहुभिः सार्धमुपाय़ात्काम्यकं च सः ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
राजभिर्वेदितव्या ये सम्यङ्नय़वुभुत्सुभिः ||
१९७ ख
सभा पर्व
अध्याय
३२
वैशम्पाय़न उवाच
राजभिश्च समावृत्तैरतीवश्रीसमृद्धिभिः |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय
१७१
और्व उवाच
राजभिश्चेश्वरैश्चैव यदि वै पितरो मम |
१२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
राजभिस्तत्र वार्ष्णेय़ः समागच्छद्यथावय़ः ||
७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९१
वैशम्पाय़न उवाच
राजभ्योऽपि ततः प्रादाद्रत्नानि विविधानि च |
३१ क
आदि पर्व
अध्याय
९४
वैशम्पाय़न उवाच
राजमध्ये प्रतिज्ञातमनुरूपं तवैव तत् ||
८३ ख
वन पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
राजमध्ये सभाय़ां तु रजसाभिसमीरिताम् |
५५ क
वन पर्व
अध्याय
६२
वृहदश्व उवाच
राजमाताव्रवीदार्तां भैमीमार्ततरा स्वय़म् ||
३४ ख
वन पर्व
अध्याय
६२
वृहदश्व उवाच
राजमातुर्वचः श्रुत्वा दमय़न्ती वचोऽव्रवीत् |
३७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
राजमानाश्च निस्त्रिंशाः संसिक्ता नरशोणितैः |
१६ क
विराट पर्व
अध्याय
६३
वैशम्पाय़न उवाच
राजमार्गाः क्रिय़न्तां मे पताकाभिरलङ्कृताः |
२३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६९
वैशम्पाय़न उवाच
राजमार्गाश्च तत्रासन्सुमनोभिरलङ्कृताः |
१६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४८
भीष्म उवाच
राजमार्गे गवां मध्ये गोष्ठमध्ये च धर्मिणः |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१८६
भीष्म उवाच
राजमार्गे गवां मध्ये धान्यमध्ये च ते शुभाः ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८७
वैशम्पाय़न उवाच
राजमार्गे नरा न स्म सम्भवन्त्यवनिं गताः |
८ क
सभा पर्व
अध्याय
१९
वैशम्पाय़न उवाच
राजमार्गेण गच्छन्तः कृष्णभीमधनञ्जय़ाः ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३९
भीष्म उवाच
राजमूला महाराज योगक्षेमसुवृष्टय़ः |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३९
भीष्म उवाच
राजमूलानि सर्वाणि मम नास्त्यत्र संशय़ः ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६८
भीष्म उवाच
राजमूलो महाराज धर्मो लोकस्य लक्ष्यते |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१००
पृथिव्यु उवाच
राजर्त्विजं स्नातकं च गुरुं श्वशुरमेव च |
२१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९२
वैशम्पाय़न उवाच
राजर्षिचरितं काले कृष्णो धीमाञ्श्रिय़ा ज्वलन् ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय
९३
वैशम्पाय़न उवाच
राजर्षिणा पुण्यकृता गय़ेनानुपमद्युते ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६३
भीष्म उवाच
राजर्षित्वेन राजेन्द्र भैक्षचर्याध्वसेवय़ा |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
राजर्षिभिक्षुकाचार्या मुच्यन्ते केन हेतुना ||
४५ ख