शल्य पर्व
अध्याय
२५
सञ्जय़ उवाच
श्रुतान्तमवधीद्भीमस्तव पुत्रं महारथः ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२७
सिद्ध उवाच
श्रुताभिलषिता दृष्टा स्पृष्टा पीतावगाहिता |
६२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
श्रुताश्च राजधर्मास्ते भीष्माद्भागीरथीसुतात् |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८५
सञ्जय़ उवाच
श्रुताश्च वहवोऽस्माभी राजानो ये दिवं गताः |
४९ क
विराट पर्व
अध्याय
४१
वैशम्पाय़न उवाच
श्रुतास्ते शङ्खशव्दाश्च भेरीशव्दाश्च पुष्कलाः |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१८९
युधिष्ठिर उवाच
श्रुतास्त्वत्तः कथाश्चैव धर्मय़ुक्ता महामते |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
श्रुताह्वय़ं च राजेन्द्र द्रौणिर्निन्ये यमक्षय़म् ||
१२७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
श्रुताय़ुधश्च कालिङ्गो जय़त्सेनश्च पार्थिवः |
३४ क
सभा पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
श्रुताय़ुधश्च कालिङ्गो जय़त्सेनश्च मागधः |
२३ क
शल्य पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
श्रुताय़ुधे च नृपतौ नैवाशाम्यत वैशसम् ||
२५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६९
सञ्जय़ उवाच
श्रुताय़ुधे च विक्रान्ते निहते सव्यसाचिना ||
२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
श्रुताय़ुरपि चाम्वष्ठः क्षत्रिय़ाणां धनुर्धरः |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
श्रुताय़ुरम्वष्ठपतिश्च राजा; तथैव दुर्मर्षणचित्रसेनौ |
१३१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
श्रुताय़ुरम्वष्ठपतिश्च राजा; विन्दानुविन्दौ च सुदक्षिणश्च ||
७३ ख
आदि पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
श्रुताय़ुरुद्धवश्चैव वृहत्सेनस्तथैव च ||
५९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३५
सञ्जय़ उवाच
श्रुताय़ुर्दुर्धरः क्राथो विवित्सुर्विकटः समः |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
श्रुताय़ुश्च ततः क्रुद्धस्तोमरेण धनञ्जय़म् |
११ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४
द्रुपद उवाच
श्रुताय़ुश्च दृढाय़ुश्च शाल्वपुत्रश्च वीर्यवान् ||
२४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७१
सञ्जय़ उवाच
श्रुताय़ुश्च शताय़ुश्च सौमदत्तिश्च मारिष |
२१ क
शल्य पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
श्रुताय़ुश्चाच्युताय़ुश्च किमन्यद्भागधेय़तः ||
३३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
श्रुताय़ुश्चाच्युताय़ुश्च धनञ्जय़मय़ुध्यताम् ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६९
दुर्योधन उवाच
श्रुताय़ुश्चाच्युताय़ुश्च म्लेच्छाश्च शतशो हताः ||
३० ख
शल्य पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
श्रुताय़ुश्चाच्युताय़ुश्च शताय़ुश्चापि वीर्यवान् ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
श्रुताय़ुश्चित्रसेनश्च पुरुमित्रो विविंशतिः ||
२१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५४
दुर्योधन उवाच
श्रुताय़ुश्चित्रसेनश्च पुरुमित्रो विविंशतिः |
६१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
श्रुताय़ुषं च निहतं प्रेक्ष्य चैवाच्युताय़ुषम् |
२७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७७
सञ्जय़ उवाच
श्रुताय़ुषं तु राजानं धर्मपुत्रो युधिष्ठिरः ||
३० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
श्रुताय़ुषं महावीर्यमच्युताय़ुषमेव च |
५२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
श्रुताय़ुषः प्रचिच्छेद मुष्टिदेशे महद्धनुः ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
श्रुताय़ुषमभिप्रेक्ष्य चोदय़ामास वाजिनः ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
श्रुताय़ुषमभिप्रेक्ष्य भीमसेनः समभ्ययात् ||
६१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
श्रुताय़ुषश्च निधनं वधश्चैवाच्युताय़ुषः |
२५ क
शल्य पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
श्रुताय़ुषि हते शूरे जलसन्धे च पौरवे |
२५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
श्रुताय़ुस्त्वथ सङ्क्रुद्धः फाल्गुनेः समरे हय़ान् |
६८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
११०
भीष्म उवाच
श्रुतिधर्म इति ह्येके नेत्याहुरपरे जनाः |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१२
भीष्म उवाच
श्रुतिप्रमाणागममङ्गलैश्च; शेते जरामृत्युभय़ादतीतः ||
४५ ग
वन पर्व
अध्याय
१९७
स्त्र्यु उवाच
श्रुतिप्रमाणो धर्मः स्यादिति वृद्धानुशासनम् ||
३९ ख
वन पर्व
अध्याय
२००
मार्कण्डेय़ उवाच
श्रुतिप्रमाणो धर्मो हि वृद्धानामिति भाषितम् |
२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९३
पुत्र उवाच
श्रुतिरेषा हि विप्रर्षे त्रिषु लोकेषु विश्रुता ||
३२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४९
कृष्ण उवाच
श्रुतिर्धर्म इति ह्येके वदन्ति वहवो जनाः ||
४८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२७
व्यास उवाच
श्रुतिविज्ञानतत्त्वज्ञः शिष्टाचारो विचक्षणः |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३४
वैशम्पाय़न उवाच
श्रुतिविनय़निधिर्द्विजपरमहित; स्तव भवतु गतिर्हरिरमरहितः ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२४
श्रीभगवानु उवाच
श्रुतिविप्रतिपन्ना ते यदा स्थास्यति निश्चला |
५३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७१
भीष्म उवाच
श्रुतिशास्त्रग्रहोपेतः षोडशर्त्विक्क्रतुश्च सः |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३३
नारद उवाच
श्रुतिश्चाप्यपरा देव पुत्रान्हि पितरोऽय़जन् |
८ क
वन पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
श्रुतिस्मृतिसमाय़ुक्तां सा राजंस्त्वय़्यवस्थिता ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३७
भीष्म उवाच
श्रुतिस्मृतीतिहासादिपुराणारण्यवेदिनः |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४७
भीष्म उवाच
श्रुतीरलभमानानां संविदं वेदनिश्चय़ात् ||
६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५
सञ्जय़ उवाच
श्रुते महर्षिप्रतिमः कृतकृत्योऽसि पार्थिव |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
श्रुते वय़सि जातौ च सद्भावो नाधिगम्यते |
२१ क