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शान्ति पर्व
अध्याय २८२
पराशर उवाच
तथा प्रय़त्नं कुर्वीत यथा मुच्येत संशय़ात् ||
२० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९८
भीष्म उवाच
तथा प्रय़ाचमानस्य मुनिरग्निसमप्रभः |
२ क
वन पर्व
अध्याय ७०
वृहदश्व उवाच
तथा प्रय़ाते तु रथे तदा भाङ्गस्वरिर्नृपः |
२ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
धृतराष्ट्र उवाच
तथा प्रय़ाते शिविरं द्रोणपुत्रे महारथे |
१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५२
वैशम्पाय़न उवाच
तथा प्रय़ान्तं वार्ष्णेय़ं द्वारकां भरतर्षभाः |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२८
सञ्जय़ उवाच
तथा प्रय़ुध्यमानेषु पाण्डवेय़ेषु निर्भय़ः |
११ क
वन पर्व
अध्याय ११२
ऋश्यशृङ्ग उवाच
तथा फलं वृत्तमथो विचित्रं; समाहनत्पाणिना दक्षिणेन |
१० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १४
वैशम्पाय़न उवाच
तथा भगवता चित्रं कल्याणं वहु भाषितम् |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ३४
पृथिव्यु उवाच
तथा भगसहस्रेण महेन्द्रं परिचिह्नितम् ||
२५ ख
विराट पर्व
अध्याय २१
भीमसेन उवाच
तथा भद्रे करिष्यामि यथा त्वं भीरु भाषसे |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३५
विरोचन उवाच
तथा भद्रे करिष्यामि यथा त्वं भीरु भाषसे |
९ क
वन पर्व
अध्याय २७५
मार्कण्डेय़ उवाच
तथा भरतशत्रुघ्नौ समेतौ गुरुणा तदा |
६३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५८
भीष्म उवाच
तथा भवति दत्तं वै द्विजेभ्योऽथ कृतात्मना ||
१९ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १३
वैशम्पाय़न उवाच
तथा भवद्भिः कर्तव्यमविचार्य वचो मम ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय ५१
जनमेजय़ उवाच
तथा भवन्तः प्रय़तन्तु सर्वे; परं शक्त्या स हि मे विद्विषाणः ||
४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६
सञ्जय़ उवाच
तथा भवानिमां सेनां धार्तराष्ट्रीं विभर्तु मे |
२९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २३
सञ्जय़ उवाच
तथा भवान्परित्रातु कर्णं वैकर्तनं रणे ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय २५९
मार्कण्डेय़ उवाच
तथा भविष्यतीत्युक्त्वा विभीषणमुवाच ह |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७८
अर्जुन उवाच
तथा भविष्यद्यच्चैव तत्सर्वं विदितं तव |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८५
वसिष्ठ उवाच
तथा भस्मव्यपोहेभ्यो व्रह्मर्षिगणसंमिताः |
१८ क
वन पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
तथा भारत धर्मेषु धर्मज्ञैरिह दृश्यते |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४
सञ्जय़ उवाच
तथा भीमगदावेगैस्ताड्यमानो महावलः |
२६ क
शल्य पर्व
अध्याय ११
सञ्जय़ उवाच
तथा भीमगदावेगैस्ताड्यमानो मुहुर्मुहुः |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ५३
सञ्जय़ उवाच
तथा भीमहतप्राय़ां मज्जन्तीं तव वाहिनीम् |
१५ क
उद्योग पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
तथा भीमार्जुनौ हृष्टौ स्वस्रीय़ौ च यमावुभौ |
१८ क
शल्य पर्व
अध्याय ११
सञ्जय़ उवाच
तथा भीमेन शल्यस्य ताडिता गदय़ा गदा |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
तथा भीमो गजानीकं गदय़ा पर्यकालय़त् ||
५९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०३
सञ्जय़ उवाच
तथा भीमो नरव्याघ्रः शरवर्षं समग्रहीत् ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय २३४
वैशम्पाय़न उवाच
तथा भीमो महेष्वासः संय़ुगे वलिनां वरः |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३१
युधिष्ठिर उवाच
तथा भीष्मं शान्तनवं भारतानां पितामहम् |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११३
सञ्जय़ उवाच
तथा भीष्मः पाण्डवेय़ांस्तापय़ामास भारत ||
३० ख
आदि पर्व
अध्याय १९८
वैशम्पाय़न उवाच
तथा भीष्मः शान्तनवः कौरवैः सह सर्वशः |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय १२९
वैशम्पाय़न उवाच
तथा भीष्मः शान्तनवः सत्यसन्धो महाव्रतः |
६ क
आदि पर्व
अध्याय ११७
वैशम्पाय़न उवाच
तथा भीष्मः शान्तनवः सोमदत्तोऽथ वाह्लिकः |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय १२३
वैशम्पाय़न उवाच
तथा भीष्मः शान्तनवस्तज्जुषस्व नराधिप ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
तथा भीष्मः शान्तनवो गङ्गाय़ाममितद्युतिः |
७६ क
आदि पर्व
अध्याय ११८
वैशम्पाय़न उवाच
तथा भीष्मः शान्तनवो विदुरश्च महामतिः |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७१
सञ्जय़ उवाच
तथा भीष्मकृपद्रोणशल्यदुर्योधनादिभिः |
२७ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०७
सञ्जय़ उवाच
तथा भीष्मजय़े गृध्नुः सौमदत्तिश्च पाण्डवम् |
४६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०३
सञ्जय़ उवाच
तथा भीष्मो रणे कृष्ण तीक्ष्णशस्त्रः प्रतापवान् ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय १६०
गन्धर्व उवाच
तथा भुवि महीपालो दीप्त्या संवरणोऽभवत् ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
तथा भूमिकृतं दानं सस्ये सस्ये विवर्धते ||
३० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
तथा भूमिकृतं दानं सस्ये सस्ये विसर्पति ||
८१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६५
भीष्म उवाच
तथा भूमिप्रदानं च शृणुष्वान्ने च भारत ||
५३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९
वैशम्पाय़न उवाच
तथा भूरिश्रवाः शूरः शल्यश्च कुरुनन्दन |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय १९१
वैशम्पाय़न उवाच
तथा भूय़ोऽभिनन्दिष्ये सूतपुत्रां गुणान्विताम् ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२१
श्रीरु उवाच
तथा भृत्यजनं सर्वं पर्यश्नन्ति च दानवाः ||
६१ ख
वन पर्व
अध्याय १६४
अर्जुन उवाच
तथा भ्रान्ते रथे राजन्विस्मितश्चेदमव्रवीत् ||
३६ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
तथा मङ्कणके प्रीतिं शुभां चक्रे हलाय़ुधः ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५०
भीष्म उवाच
तथा मत्स्यैः परिवृतं च्यवनं भृगुनन्दनम् |
१८ क