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कर्ण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
वारणं जघनोपान्ते विषाणाभ्यामिव द्विपः ||
४० ख
शान्ति पर्व
अध्याय १०२
भीष्म उवाच
वारणा इव संमत्तास्ते भवन्ति दुरासदाः ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
वारणा दशसाहस्राः प्रभिन्नकरटामुखाः |
३० क
विराट पर्व
अध्याय ३८
उत्तर उवाच
वारणा यस्य सौवर्णाः पृष्ठे भासन्ति दंशिताः |
२१ क
उद्योग पर्व
अध्याय १९
वैशम्पाय़न उवाच
वारणा वाटधानं च यामुनश्चैव पर्वतः ||
३० ख
कर्ण पर्व
अध्याय १४
सञ्जय़ उवाच
वारणानां परिस्तोमान्सुय़ुक्ताम्वरकम्वलान् ||
४५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
वारणानां रवो जज्ञे मेघानामिव सम्प्लवे ||
४२ ख
आदि पर्व
अध्याय १३०
दुर्योधन उवाच
वारणावतमद्यैव नात्र दोषो भविष्यति ||
१९ ख
आदि पर्व
अध्याय १३२
वैशम्पाय़न उवाच
वारणावतमद्यैव यथा यासि तथा कुरु ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय १३३
वैशम्पाय़न उवाच
वारणावतमासाद्य ददृशुर्नागरं जनम् ||
३० ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
वारणावतय़ात्रा च मन्त्रो दुर्योधनस्य च |
८३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १११
सञ्जय़ उवाच
वारणाविव संसक्तौ रङ्गमध्ये विरेजतुः |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२८
सञ्जय़ उवाच
वारणाश्च महाराज समासाद्य परस्परम् |
५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६४
वैशम्पाय़न उवाच
वारणाश्च महाराज सहस्रशतसंमिताः |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११३
सञ्जय़ उवाच
वारणाश्वमनुष्याणां रुधिरौघसमुद्भवा |
१६ क
वन पर्व
अध्याय २३८
दुर्योधन उवाच
वारणाह्वय़मासाद्य किं वक्ष्यामि जनाधिपम् ||
१३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
वारणेनेव मत्तेन पुष्पितं जगतीरुहम् ||
८१ ख
विराट पर्व
अध्याय ५४
वैशम्पाय़न उवाच
वारणेनेव मत्तेन मत्तो वारणय़ूथपः ||
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
वारणेन्द्रनिभाश्चान्ये भीमा राजन्सहस्रशः ||
९५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४५
सञ्जय़ उवाच
वारणेन्द्रस्य विक्रम्य चिच्छेदाथ महाकरम् ||
४० ख
द्रोण पर्व
अध्याय ११३
सञ्जय़ उवाच
वारणैः पतितै राजन्वाजिभिश्च नरैः सह |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय ८४
धृतराष्ट्र उवाच
वारमुख्या महाभागं प्रत्युद्यास्यन्ति केशवम् ||
१५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६
नारद उवाच
वाराणसीं तु नगरीमभीक्ष्णमुपसेवते ||
२२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३१
भीष्म उवाच
वाराणसीं महातेजा निर्ममे शक्रशासनात् ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५३
भीष्म उवाच
वाराणस्यां तुलाधारं समासाद्याव्रवीद्वचः ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५३
भीष्म उवाच
वाराणस्यां महाप्राज्ञस्तुलाधारः प्रतिष्ठितः |
४३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२१
भीष्म उवाच
वाराणस्यामुपातिष्ठन्मैत्रेय़ं स्वैरिणीकुले ||
३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३०
सञ्जय़ उवाच
वाराहं कौक्कुटं मांसं गव्यं गार्दभमौष्ट्रकम् |
३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३७
वैशम्पाय़न उवाच
वाराहं नारसिंहं च वामनं मानुषं तथा |
३६ क
वन पर्व
अध्याय १००
लोमश उवाच
वाराहं रूपमास्थाय़ जगदर्थे समुद्धृता ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
वाराहं रूपमास्थाय़ तर्कय़न्तमिवार्जुनम् |
८ क
वन पर्व
अध्याय १८७
देव उवाच
वाराहं रूपमास्थाय़ मय़ेय़ं जगती पुरा |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८८
भीष्म उवाच
वाराहेण तु षण्मासान्सप्त वै शाकुनेन तु ||
६ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १७
वैशम्पाय़न उवाच
वारिणा नेत्रजेनोरः सिञ्चन्ती शोकतापिता |
४ ख
आदि पर्व
अध्याय १६
सूत उवाच
वारिणा मेघजेनेन्द्रः शमय़ामास सर्वतः ||
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय १६२
गन्धर्व उवाच
वारिणाथ सुशीतेन शिरस्तस्याभ्यषेचय़त् |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९१
सञ्जय़ उवाच
वारितं प्रेक्ष्य नागेन्द्रं दशार्णस्य महात्मनः |
४४ क
वन पर्व
अध्याय २९६
वैशम्पाय़न उवाच
वारितस्त्वव्रवीत्पार्थो दृश्यमानो निवारय़ |
२७ क
आदि पर्व
अध्याय ९२
वैशम्पाय़न उवाच
वारिता विप्रिय़ं चोक्ता त्यजेय़ं त्वामसंशय़म् ||
३५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६२
भीष्म उवाच
वारितोऽसि पुरा तात मुनिभिर्वेदपारगैः |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय १४१
भीष्म उवाच
वारिधारासमूहैश्च सम्प्रहृष्टः शतक्रतुः |
१८ क
सभा पर्व
अध्याय ४८
दुर्योधन उवाच
वारिषेणसमुद्रान्ते लोहित्यमभितश्च ये |
८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
वारुणं गाण्डिवं तत्र माहेन्द्रं विजय़ं धनुः ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३२
सञ्जय़ उवाच
वारुणं याम्यमाग्नेय़ं त्वाष्ट्रं सावित्रमेव च |
२९ ख
सभा पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
वारुणश्च महाशङ्खो देवदत्तः सुघोषवान् |
७ क
आदि पर्व
अध्याय १६
सूत उवाच
वारुणानि च भूतानि विविधानि महीधरः |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय १७१
सञ्जय़ उवाच
वारुणास्त्रप्रय़ोगाच्च वीर्यवत्त्वाच्च कृष्णय़ोः ||
१२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
वारुणेन ततः कर्णः शमय़ामास पावकम् |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय १८१
भीष्म उवाच
वारुणेनैव रामस्तद्वारय़ामास मे विभुः ||
१२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५९
वैशम्पाय़न उवाच
वारुणौ चाक्षय़ौ दिव्यौ शरपूर्णौ महेषुधी ||
१२ ख