आदि पर्व
अध्याय
२०१
नारद उवाच
आवय़ोस्तपसानेन यदि प्रीतः पितामहः ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय
२५२
जय़द्रथ उवाच
आशंस वा त्वं कृपणं वदन्ती; सौवीरराजस्य पुनः प्रसादम् ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२६
सञ्जय़ उवाच
आशंसत परित्राणमर्जुनात्स महीपतिः ||
२३ ख
वन पर्व
अध्याय
१९६
मार्कण्डेय़ उवाच
आशंसते च पुत्रेषु पिता माता च भारत |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३४
धृतराष्ट्र उवाच
आशंसते च वीभत्सुं युद्धे जेतुं सुदारुणे ||
३६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
आशंसते धृतराष्ट्रस्य पुत्रो; महाराज्यमसपत्नं पृथिव्याम् |
२२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
२६
युधिष्ठिर उवाच
आशंसते वै धृतराष्ट्रः सपुत्रो; महाराज्यमसपत्नं पृथिव्याम् |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८
धृतराष्ट्र उवाच
आशंसन्तः पराञ्जेतुं जितश्वासा जितव्यथाः |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६२
नारद उवाच
आशंसन्ते हि पितरः सुवृष्टिमिव कर्षकाः |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
आशंसन्तो जय़ं युद्धे वधं वाभिमुखा रणे ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८५
विदुर उवाच
आशंसमानः कल्याणं कुरूनभ्येति केशवः |
१५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
६५
वैशम्पाय़न उवाच
आशंसमानो विजय़ं तेषां पुत्रवशानुगः |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२२
वैशम्पाय़न उवाच
आशंससीह समरे वीरमर्जुनमूर्जितम् ||
५४ ख
वन पर्व
अध्याय
१३३
राजो उवाच
आशंससे वन्दिनं त्वं विजेतु; मविज्ञात्वा वाक्यवलं परस्य |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४२
वैशम्पाय़न उवाच
आशंसे त्वद्य कर्णस्य मनोऽहं पाण्डवान्प्रति |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
आशंसे सारथे तत्र भवितास्य ध्रुवो जय़ः ||
३९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१५
धृतराष्ट्र उवाच
आशंसेऽहं पुरा त्राणं भीष्माच्छन्तनुनन्दनात् ||
५७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
आशंसेऽहं वासुदेवद्वितीय़ो; दुर्योधनं सानुवन्धं निहन्तुम् ||
८८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६०
सञ्जय़ उवाच
आशा ते जीविते मूढ राज्ये वा केन हेतुना ||
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४०
विदुर उवाच
आशा धृतिं हन्ति समृद्धिमन्तकः; क्रोधः श्रिय़ं हन्ति यशः कदर्यता |
७ क
शल्य पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
आशा वलवती राजन्पुत्राणां तेऽभवत्तदा |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७६
सञ्जय़ उवाच
आशा वलवती राजन्पुत्राणामभवत्तव |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२१
श्रीरु उवाच
आशा श्रद्धा धृतिः कान्तिर्विजितिः सन्नतिः क्षमा |
८२ क
आदि पर्व
अध्याय
१८५
वैशम्पाय़न उवाच
आशा हि नो व्यक्तमिय़ं समृद्धा; मुक्तान्हि पार्थाञ्शृणुमोऽग्निदाहात् ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२६
ऋषभ उवाच
आशा हि पुरुषं वालं लालापय़ति तस्थुषी |
३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३८
भीष्म उवाच
आशां कालवतीं कुर्यात्तां च विघ्नेन योजय़ेत् |
३२ क
वन पर्व
अध्याय
२७९
अश्वपतिरु उवाच
आशां नार्हसि मे हन्तुं सौहृदाद्प्रणय़ेन च |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२५
युधिष्ठिर उवाच
आशां महत्तरां मन्ये पर्वतादपि सद्रुमात् |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१९
नमुचिरु उवाच
आशाः सुशर्म्याः सुहृदां सुकुर्व; न्यथा निय़ुक्तोऽस्मि तथा वहामि ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३८
भीष्म उवाच
आशाकारणमित्येतत्कर्तव्यं भूतिमिच्छता ||
५५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२६
ऋषभ उवाच
आशाकृशं च राजेन्द्र तपो दीर्घं समास्थितः ||
३० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३४८
नागभार्यो उवाच
आशाछेदेन तस्याद्य नात्मानं दग्धुमर्हसि ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२९
महेश्वर उवाच
आशापाशविमोक्षश्च शस्यते मोक्षकाङ्क्षिणाम् ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३८
श्रीभगवानु उवाच
आशापाशशतैर्वद्धाः कामक्रोधपराय़णाः |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
आशाभङ्गं न कुर्वन्ति भक्तस्यार्याः कथञ्चन ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६८
पिङ्गलो उवाच
आशामनाशां कृत्वा हि सुखं स्वपिति पिङ्गला ||
५२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२६
ऋषभ उवाच
आशामपनय़स्वाशु ततः कृशतरीमिमाम् ||
४९ ख
वन पर्व
अध्याय
२६६
मार्कण्डेय़ उवाच
आशावांस्तेषु काकुत्स्थः प्राणानार्तोऽप्यधारय़त् ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२५
भीष्म उवाच
आशावान्पुरुषो यः स्यादन्तरिक्षमथापि वा |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७८
राजो उवाच
आशासते जना राष्ट्रे मामकान्तरमाविशः ||
२८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४१
सञ्जय़ उवाच
आशासिष्ये सदोत्थाय़ सत्यमेतद्व्रवीमि ते ||
७० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९
भीष्म उवाच
आशास्तस्य हताः सर्वाः क्लीवस्येव प्रजाफलम् ||
३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५४
भीम उवाच
आशास्तारः कर्म चाप्युत्तमं वा; तन्मे देवाः केवलं साधय़न्तु |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०६
धृतराष्ट्र उवाच
आशास्ते च सदा सूत पुत्रो दुर्योधनो मम |
१० क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
आशास्ते पाण्डुपुत्राणां समरेष्वपराजय़म् ||
८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६२
वैशम्पाय़न उवाच
आशास्य च महात्मानं प्रय़युर्मुदिता भृशम् ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२६
राजो उवाच
आशाय़ाः किं कृशत्वं च किं चेह भुवि दुर्लभम् |
३३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६३
भीष्म उवाच
आशाय़ास्तनय़ोऽधर्मः क्रोधोऽसूय़ासुतः स्मृतः |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२५
भीष्म उवाच
आशाय़ास्तपसि श्रेष्ठास्तथा नान्तमहं गतः ||
२९ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
५८
भीष्म उवाच
आशिषं ये न देवेषु न मर्त्येषु च कुर्वते |
१३ क