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वन पर्व
अध्याय ८८
धौम्य उवाच
इमं श्लोकं तदा वीर प्रेक्ष्य वीर्यं महात्मनः ||
१५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २६
सञ्जय़ उवाच
इमं समास्थाय़ रथं रथर्षभं; रणे हनिष्याम्यहमर्जुनं वलात् ||
५८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४९
सञ्जय़ उवाच
इमं समीक्ष्याप्रतिवीर्यपौरुषं; निपातितं देववरात्मजात्मजम् ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
इमं स्तवं देववरस्य यो नरः; प्रकीर्तय़ेच्छुचिसुमनाः समाहितः |
३३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
इमं स्तवं भगवतो विष्णोर्व्यासेन कीर्तितम् |
१४१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १८
वैशम्पाय़न उवाच
इमं स्तवं संनिय़म्येन्द्रिय़ाणि; शुचिर्भूत्वा यः पुरुषः पठेत |
५६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
इमं स्तवमधीय़ानः श्रद्धाभक्तिसमन्वितः |
१३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६५
भीष्म उवाच
इमं हत्वा गृहीत्वा च यास्येऽहं समभिद्रुतम् ||
३१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२८
वैशम्पाय़न उवाच
इमं हि पुण्डरीकाक्षं जिघृक्षन्त्यल्पचेतसः |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १२८
वैशम्पाय़न उवाच
इमं हि पुण्डरीकाक्षमभिभूय़ प्रसह्य च |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २१२
भीष्म उवाच
इमं हि यः पठति विमोक्षनिश्चय़ं; न हीय़ते सततमवेक्षते तथा |
५२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २६
भीष्म उवाच
इममङ्गिरसा प्रोक्तं तीर्थवंशं महाद्युते |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५०
नारद उवाच
इममन्यं च ते कामं ददामि मनसेप्सितम् |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५२
युधिष्ठिर उवाच
इममन्यं प्रवक्ष्यामि न राजन्विग्रहादिव ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४१
भीष्म उवाच
इममर्थं पुरा पार्थ मुचुकुन्दो नराधिपः |
७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६२
भीष्म उवाच
इममर्थं पुरा पृष्टो नारदो देवदर्शनः |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७३
भीष्म उवाच
इममर्थं महाराज वक्तुं समुपचक्रमे ||
३४ ख
आदि पर्व
अध्याय ४३
सूत उवाच
इममव्यक्तरूपं मे गर्भमाधाय़ सत्तम |
३६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १०
मरुत्त उवाच
इममश्मानं प्लवमानमारा; दध्वा दूरं तेन न दृश्यतेऽद्य |
९ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ७
द्रौणिरु उवाच
इममात्मानमद्याहं जातमाङ्गिरसे कुले |
५४ क
उद्योग पर्व
अध्याय ८६
भीष्म उवाच
इममुत्पथि वर्तन्तं पापं पापानुवन्धिनम् |
२० क
शल्य पर्व
अध्याय ३१
युधिष्ठिर उवाच
इममेकं च ते कामं वीर भूय़ो ददाम्यहम् ||
५२ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय १४४
वासुदेव उवाच
इमा गाथा गाय़मानश्चत्वरेषु सभासु च ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७४
भीष्म उवाच
इमा हि देवताः सर्वा ऋषय़श्च परन्तप |
४४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७६
भीष्म उवाच
इमाँल्लोकान्भरिष्यन्ति हविषा प्रस्नवेन च |
२६ क
आदि पर्व
अध्याय ३०
सूत उवाच
इमां कथां यः शृणुय़ान्नरः सदा; पठेत वा द्विजजनमुख्यसंसदि |
२२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २७
भीष्म उवाच
इमां कश्चित्परिक्रम्य पृथिवीं शैलभूषिताम् |
२० क
कर्ण पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
इमां काकोपमां कर्ण प्रोच्यमानां निवोध मे |
३ क
वन पर्व
अध्याय ११४
लोमश उवाच
इमां गाथामत्र गाय़न्नपः स्पृशति यो नरः |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय ११२
वैशम्पाय़न उवाच
इमां च तावद्धर्म्यां त्वं पौराणीं शृणु मे कथाम् |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५३
भीष्म उवाच
इमां च देवीं पश्यामि मुने दिव्याप्सरोपमाम् |
६१ क
विराट पर्व
अध्याय २४
वैशम्पाय़न उवाच
इमां च नः प्रिय़ामीक्ष वाचं भद्रवतीं शुभाम् ||
१८ ख
मौसल पर्व
अध्याय ७
वसुदेव उवाच
इमां च नगरीं सद्यः प्रतिय़ाते धनञ्जय़े |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
इमां चाप्यपरां भूय़ः प्रतिज्ञां मे निवोधत |
३७ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ७
द्रौणिरु उवाच
इमां चाप्यापदं घोरां तराम्यद्य सुदुस्तराम् |
१२ क
सभा पर्व
अध्याय ६३
विदुर उवाच
इमां चेत्पूर्वं कितवोऽग्लहीष्य; दीशोऽभविष्यदपराजितात्मा ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७४
भीष्म उवाच
इमां ज्वरोत्पत्तिमदीनमानसः; पठेत्सदा यः सुसमाहितो नरः |
६० क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३७
वैशम्पाय़न उवाच
इमां तपस्विनीं सत्यां धारय़िष्यामि मेदिनीम् |
३३ क
आदि पर्व
अध्याय १३४
वैशम्पाय़न उवाच
इमां तु तां महावुद्धिर्विदुरो दृष्टवांस्तदा |
१६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३
व्यास उवाच
इमां तु नाभिजानामि अमावास्यां त्रय़ोदशीम् ||
२८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २१२
भीष्म उवाच
इमां तु यो वेद विमोक्षवुद्धि; मात्मानमन्विच्छति चाप्रमत्तः |
४४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३५
सञ्जय़ उवाच
इमां तु रजनीं प्राप्तामप्रभातां सुदुर्मते |
३१ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
इमां ते तरुणीं भार्यां त्वदाधिभिरभिप्लुताम् |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय ३२
व्रह्मो उवाच
इमां धरां धारय़ता त्वय़ा हि मे; महत्प्रिय़ं शेष कृतं भविष्यति ||
२१ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ५
सूत उवाच
इमां भारतसावित्रीं प्रातरुत्थाय़ यः पठेत् |
५१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३९
वाय़ुरु उवाच
इमां भूमिं व्राह्मणेभ्यो दित्सुर्वै दक्षिणां पुरा |
१ क
आदि पर्व
अध्याय १५०
युधिष्ठिर उवाच
इमां मन्यामहे प्राप्तां निहत्य धृतराष्ट्रजान् ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय ३२
व्रह्मो उवाच
इमां महीं शैलवनोपपन्नां; ससागरां साकरपत्तनां च |
१९ क
सभा पर्व
अध्याय ४१
शिशुपाल उवाच
इमां वसुमतीं कुर्यादशेषामिति मे मतिः ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय १५९
गन्धर्व उवाच
इमां वसुमतीं कृत्स्नां प्रभावः स्वकुलस्य ते ||
५ ख