अनुशासन पर्व
अध्याय
१३३
उमो उवाच
केन कर्मविपाकेन भवन्तीह वदस्व मे ||
५९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३१
उमो उवाच
केन कर्मविपाकेन वैश्यो गच्छति शूद्रताम् ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२०२
युधिष्ठिर उवाच
केन कार्यविसर्गेण तन्मे व्रूहि पितामह ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१४२
वैशम्पाय़न उवाच
केन कार्येण सुश्रोणि कुतश्चागमनं तव ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९४
सञ्जय़ उवाच
केन कालेन गाङ्गेय़ क्षपय़ेथा महाद्युते |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९५
वैशम्पाय़न उवाच
केन कालेन पाण्डूनां हन्याः सैन्यमिति प्रभो ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९५
ऋषय़ ऊचुः
केन क्षुधाभिभूतानामस्माकं पापकर्मणा |
५३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२५
वैशम्पाय़न उवाच
केन चाप्यपवादेन विरुध्यन्तेऽरिभिः सह |
१० क
शल्य पर्व
अध्याय
४१
जनमेजय़ उवाच
केन चास्याभवद्वैरं कारणं किं च तत्प्रभो |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२८
भीष्म उवाच
केन जातोऽस्मि चण्डालो व्राह्मण्यं येन मेऽनशत् |
१५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३५
शिष्य उवाच
केन जीवन्ति भूतानि तेषामाय़ुः किमात्मकम् |
८ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२६
धृतराष्ट्र उवाच
केन ज्ञानवलेनैवं पुत्र पश्यसि सिद्धवत् |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६२
युधिष्ठिर उवाच
केन तुष्यन्ति ते सद्यस्तुष्टाः किं प्रदिशन्त्युत |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८८
साध्या ऊचुः
केन त्यजति मित्राणि केन स्वर्गं न गच्छति ||
३९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१६
भीष्म उवाच
केन त्वां श्रेय़सा तात योजय़ामीति हृष्टवत् ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६१
धृतराष्ट्र उवाच
केन दत्तवरास्तात किं वा ज्ञानं विदन्ति ते |
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२
भीष्म उवाच
केन दुःखेन सन्तप्ता रोदिषि त्वं वरानने ||
२९ ख
आदि पर्व
अध्याय
४६
जनमेजय़ उवाच
केन दृष्टं श्रुतं चापि भवतां श्रोत्रमागतम् |
२७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८०
भीष्म उवाच
केन देवाः पवित्रेण स्वर्गमश्नन्ति वा विभो |
९ क
वन पर्व
अध्याय
२२२
वैशम्पाय़न उवाच
केन द्रौपदि वृत्तेन पाण्डवानुपतिष्ठसि |
४ क
वन पर्व
अध्याय
२९७
यक्ष उवाच
केन द्वितीय़वान्भवति राजन्केन च वुद्धिमान् ||
२८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६५
युधिष्ठिर उवाच
केन निर्वेदमादत्ते मोक्षं वा केन गच्छति ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
केन पौराश्च भृत्याश्च वर्धन्ते भरतर्षभ ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४७
युधिष्ठिर उवाच
केन प्रतिविशेषेण दशमोऽप्यस्य दीय़ते ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२५
भीष्म उवाच
केन भद्रमुखार्थेन सम्प्राप्तोऽसि तपोवनम् ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६८
भीष्म उवाच
केन भूतानि वर्धन्ते क्षय़ं गच्छन्ति केन च |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२
युधिष्ठिर उवाच
केन मृत्युर्गृहस्थेन धर्ममाश्रित्य निर्जितः |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१८
नारद उवाच
केन यत्नेन जीवन्तं गर्भं त्वमिह पश्यसि ||
२३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३०
उमो उवाच
केन वा कर्मणा देव भवन्ति वनगोचराः ||
३६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३१
उमो उवाच
केन वा कर्मणा विप्रः शूद्रय़ोनौ प्रजाय़ते |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७०
वृत्र उवाच
केन वा कर्मणा शक्यमथ ज्ञानेन केन वा |
३३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४७
युधिष्ठिर उवाच
केन वा किं ततो हार्यं पितृवित्तात्पितामह |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७४
उमा उवाच
केन वा प्रतिषेधेन गमनं ते न विद्यते ||
२४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
युधिष्ठिर उवाच
केन वा लभते कीर्तिं केन वा लभते श्रिय़म् ||
२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२१
व्राह्मण्यु उवाच
केन विज्ञानय़ोगेन मतिश्चित्तं समास्थिता |
६ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
केन वृत्तिं कल्पय़सीति ||
४३ घ
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
केन वृत्तिं कल्पय़सीति ||
४७ 6
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२४
भीष्म उवाच
केन वृत्तेन कल्याणि समाचारेण केन वा |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०७
भीष्म उवाच
केन वृत्तेन भगवन्नतिक्रामेज्जरान्तकौ |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
युधिष्ठिर उवाच
केन वृत्तेन राजेन्द्र वर्तमाना नरा युधि |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७१
युधिष्ठिर उवाच
केन वृत्तेन वृत्तज्ञ वर्तमानो महीपतिः |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७२
युधिष्ठिर उवाच
केन वृत्तेन वृत्तज्ञ वीतशोकश्चरेन्महीम् |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२११
युधिष्ठिर उवाच
केन वृत्तेन वृत्तज्ञो जनको मिथिलाधिपः |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३६
भीष्म उवाच
केन शम्वर वृत्तेन स्वजात्यानधितिष्ठसि |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३२
उमो उवाच
केन शीलेन वा देव कर्मणा कीदृशेन वा |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९१
युधिष्ठिर उवाच
केन सङ्कल्पितं श्राद्धं कस्मिन्काले किमात्मकम् |
१ क
वन पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
केन सार्धं कथय़सि आनय़ैनं ममान्तिकम् |
९० क
विराट पर्व
अध्याय
३
युधिष्ठिर उवाच
केन स्म कर्मणा कृष्णा द्रौपदी विचरिष्यति |
१३ क
वन पर्व
अध्याय
२९७
यक्ष उवाच
केन स्विच्छ्रोत्रिय़ो भवति केन स्विद्विन्दते महत् |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३४
वासुदेव उवाच
केन स्वित्कर्मणा पापं व्यपोहति नरो गृही ||
२० ख