कर्ण पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
अथारेर्लाघवं दृष्ट्वा मण्डलीकृतकार्मुकः |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
अथार्जुन उवाचेदमधिक्षिप्त इवाक्षमी |
१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
अथार्जुनं प्राह दशार्हनाथः; प्रमाद्यसे किं जहि योधमेतम् |
६७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
अथार्जुनं स्वे परिवार्य सैनिकाः; पुरन्दरं देवगणा इवाव्रुवन् |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२०
सञ्जय़ उवाच
अथार्जुनः सर्वतोधारमस्त्रं; प्रादुश्चक्रे त्रासय़न्धार्तराष्ट्रान् |
८३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
अथार्जुनरथं वीरास्त्वदीय़ाः समुपाद्रवन् |
१८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
अथार्जुनस्योत्तमगात्रभूषणं; धराविय़द्द्योसलिलेषु विश्रुतम् |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
अथार्जुनाय़ प्रजहार भल्ला; न्भूरिश्रवाः सप्त सुवर्णपुङ्खान् |
१०७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
अथार्जुनो ज्यातलनेमिनिस्वने; मृदङ्गभेरीवहुशङ्खनादिते |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
अथार्जुनो रणे भीष्मं योधय़न्वै महारथम् |
४३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
अथार्जुनोऽव्रवीत्पार्थं युधिष्ठिरममित्रहा |
६ क
आदि पर्व
अध्याय
१४५
वैशम्पाय़न उवाच
अथार्तिजं महाशव्दं व्राह्मणस्य निवेशने |
९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
अथार्धचन्द्रेण हृतं किरीटिना; पपात दण्डस्य शिरः क्षितिं द्विपात् |
१९ क
वन पर्व
अध्याय
६२
वृहदश्व उवाच
अथार्धरात्रसमय़े निःशव्दस्तिमिते तदा |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८०
भीष्म उवाच
अथावताप्य पृथिवीं पूषा दिवससङ्क्षय़े |
३९ क
शल्य पर्व
अध्याय
६१
सञ्जय़ उवाच
अथावतीर्णे भूतानामीश्वरे सुमहात्मनि |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय
१६१
गन्धर्व उवाच
अथावभाषे कल्याणी वाचा मधुरय़ा नृपम् |
३ क
आदि पर्व
अध्याय
१७
सूत उवाच
अथावरणमुख्यानि नानाप्रहरणानि च |
१ क
वन पर्व
अध्याय
१८५
मार्कण्डेय़ उवाच
अथावर्धत मत्स्यः स पुनर्वर्षगणान्वहून् ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय
१३९
लोमश उवाच
अथावलोककोऽगच्छद्गृहानेकः परावसुः |
४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
अथावसन्नः स्वरथे मुहूर्तात्पुनरुत्थितः |
६४ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
७
द्रौणिरु उवाच
अथाविष्टो भगवता भूय़ो जज्वाल तेजसा |
६५ क
विराट पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
अथावृणोद्दश दिशः शरैरतिरथस्तदा |
२८ क
आदि पर्व
अध्याय
२५
कश्यप उवाच
अथाव्रवीच्च तं भ्राता सुप्रतीकं विभावसुः |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
२५३
वैशम्पाय़न उवाच
अथाव्रवीच्चारुमुखं प्रमृज्य; धात्रेय़िका सारथिमिन्द्रसेनम् |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
५५
वृहदश्व उवाच
अथाव्रवीत्कलिं शक्रः सम्प्रेक्ष्य वलवृत्रहा |
२ क
मौसल पर्व
अध्याय
५
वैशम्पाय़न उवाच
अथाव्रवीत्केशवः संनिवर्त्य; शव्दं श्रुत्वा योषितां क्रोशतीनाम् ||
१० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
अथाव्रवीत्क्रोधसंरक्तनेत्रः; कर्णः शल्यं सन्धितेषुः प्रसह्य |
८ क
विराट पर्व
अध्याय
२५
वैशम्पाय़न उवाच
अथाव्रवीत्ततः कर्णः क्षिप्रं गच्छन्तु भारत |
८ क
सभा पर्व
अध्याय
७१
विदुर उवाच
अथाव्रवीत्ततो द्रोणो दुर्योधनममर्षणम् |
३३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
अथाव्रवीत्तदा द्रोणं कर्णो वैकर्तनो वृषा |
१७ क
मौसल पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
अथाव्रवीत्तदा वृष्णीञ्श्रुत्वैवं मधुसूदनः |
१३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
अथाव्रवीत्पाणिना पाणिमाघ्न; न्सन्दष्टौष्ठो नृत्यति वादय़न्निव |
१४ ख
वन पर्व
अध्याय
१६५
अर्जुन उवाच
अथाव्रवीत्पुनर्देवः सम्प्रहृष्टतनूरुहः |
३ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
अथाव्रवीत्पुनर्वाक्यं धृतराष्ट्रो युधिष्ठिरम् |
११ क
आदि पर्व
अध्याय
२११
वैशम्पाय़न उवाच
अथाव्रवीत्पुष्कराक्षः प्रहसन्निव भारत |
१६ क
विराट पर्व
अध्याय
३२
वैशम्पाय़न उवाच
अथाव्रवीत्प्रीतमना मत्स्यराजो युधिष्ठिरम् |
४२ क
वन पर्व
अध्याय
२९६
वैशम्पाय़न उवाच
अथाव्रवीत्स विजय़ं कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः |
२० क
वन पर्व
अध्याय
२२२
वैशम्पाय़न उवाच
अथाव्रवीत्सत्यभामा कृष्णस्य महिषी प्रिय़ा |
३ क
वन पर्व
अध्याय
१८३
मार्कण्डेय़ उवाच
अथाव्रवीत्सदस्यांस्तु गौतमो मुनिसत्तमान् |
१९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
अथाव्रवीत्सूतपुत्रः शल्यमाभाष्य सस्मितम् |
७३ क
वन पर्व
अध्याय
९७
लोमश उवाच
अथाव्रवीदगस्त्यस्तान्राजर्षीनृषिसत्तमः |
४ क
वन पर्व
अध्याय
१८५
मार्कण्डेय़ उवाच
अथाव्रवीदनिमिषस्तानृषीन्सहितांस्तदा |
४८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४५
भीम उवाच
अथाव्रवीदर्जुनं भीमसेनः; स्ववीर्यमाश्रित्य कुरुप्रवीर |
६४ क
शल्य पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
अथाव्रवीदर्जुनस्तु वासुदेवं यशस्विनम् ||
१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
अथाव्रवीदृषिर्देवान्पश्यध्वं मां दिवौकसः |
४२ क
शल्य पर्व
अध्याय
४९
सिद्धा ऊचुः
अथाव्रवीदृषिवरो देवान्वै नारदस्तदा |
६३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६४
सञ्जय़ उवाच
अथाव्रवीद्द्रोणसुतस्तवात्मजं; करं करेण प्रतिपीड्य सान्त्वय़न् |
२० क
वन पर्व
अध्याय
२५०
वैशम्पाय़न उवाच
अथाव्रवीद्द्रौपदी राजपुत्री; पृष्टा शिवीनां प्रवरेण तेन |
१ क
वन पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
अथाव्रवीद्द्रौपदीं च नकुलं च युधिष्ठिरः |
२० क