शल्य पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
ददृशाते कुरुश्रेष्ठौ कालसूर्याविवोदितौ ||
३२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
ददृशाते च पुरुषं तमेवादिकरं प्रभुम् ||
५६ ग
आदि पर्व
अध्याय
१९
सूत उवाच
ददृशाते तदा तत्र समुद्रं निधिमम्भसाम् |
३ क
आदि पर्व
अध्याय
२१०
वैशम्पाय़न उवाच
ददृशाते तदान्योन्यं प्रभासे कृष्णपाण्डवौ ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
ददृशाते भृशास्वस्थान्पाण्डवान्नष्टचेतसः ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
ददृशाते महात्मानौ पुष्पिताविव किंशुकौ ||
२३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
ददृशाते महात्मानौ पुष्पिताविव किंशुकौ ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९६
कण्व उवाच
ददृशाते महात्मानौ लोकपालमपां पतिम् ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
ददृशाते महात्मानौ सपक्षाविव पर्वतौ ||
६५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५१
वैशम्पाय़न उवाच
ददृशाते महाराज धृतराष्ट्रं जनेश्वरम् ||
२५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५३
भीष्म उवाच
ददृशाते महाराज पुष्पिताविव किंशुकौ ||
४३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७६
सञ्जय़ उवाच
ददृशाते यथा राहोरास्यान्मुक्तौ प्रभाकरौ ||
५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५१
वैशम्पाय़न उवाच
ददृशाते स्थिताः सर्वा गान्धारीं परिवार्य वै ||
२७ ग
शल्य पर्व
अध्याय
५७
वासुदेव उवाच
ददृशाते हिमवति पुष्पिताविव किंशुकौ ||
३१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२४९
नारद उवाच
ददृशातेऽथ तौ कन्यां देवौ विश्वेश्वरावुभौ ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
ददृशातेऽरविन्दस्थं व्रह्माणममितप्रभम् |
२५ क
वन पर्व
अध्याय
२४४
वैशम्पाय़न उवाच
ददृशुः काम्यकं पुण्यमाश्रमं तापसाय़ुतम् ||
१५ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
ददृशुः कालरात्रिं ते स्मय़मानामवस्थिताम् |
६५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८६
भीष्म उवाच
ददृशुः कृत्तिकास्तं तु वालं वह्निसमद्युतिम् |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८४
गङ्गो उवाच
ददृशुः कृत्तिकास्तं तु वालार्कसदृशद्युतिम् |
७६ क
वन पर्व
अध्याय
१५७
वैशम्पाय़न उवाच
ददृशुः पञ्च वर्णानि द्रौपदी च यशस्विनी ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
ददृशुः पाण्डवा राजन्गन्धमादनमन्तिकात् |
१६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
ददृशुः पाण्डवा राजन्धर्मात्मानं युधिष्ठिरम् ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२३
वैशम्पाय़न उवाच
ददृशुः पाण्डवा राजन्नस्यन्तमनिशं शरान् ||
२२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७६
वैशम्पाय़न उवाच
ददृशुः पाण्डवा राजन्पथि द्वैपाय़नं तदा ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय
१४५
वैशम्पाय़न उवाच
ददृशुः पाण्डवा राजन्सहिता द्विजपुङ्गवैः ||
२३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
ददृशुः प्रेक्षका राजन्रौद्रीं विशसनीं गदाम् ||
१२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०२
कण्व उवाच
ददृशुः शक्रमासीनं देवराजं महाद्युतिम् ||
२१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
ददृशुः सर्वपाञ्चालाः पुत्रं तव जनाधिप ||
४० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१९
भीष्म उवाच
ददृशुः सर्वभूतानि जङ्गमानीतराणि च ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय
१५७
वैशम्पाय़न उवाच
ददृशुः सर्वभूतानि पाण्डवाश्च तदद्भुतम् ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१९
भीष्म उवाच
ददृशुः सर्वभूतानि मनोमारुतरंहसम् ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय
१५७
वैशम्पाय़न उवाच
ददृशुः सर्वभूतानि वाणखड्गधनुर्धरम् ||
३० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७१
सञ्जय़ उवाच
ददृशुः सर्वभूतानि शक्रजम्भौ यथा पुरा ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय
१५७
वैशम्पाय़न उवाच
ददृशुः सर्वभूतानि सिंहेनेव गवां पतिम् ||
६९ ख
वन पर्व
अध्याय
१५७
वैशम्पाय़न उवाच
ददृशुः सर्वभूतानि सूर्यमभ्रगणैरिव ||
४७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
ददृशुः सर्वराजानः कुरवः पाण्डवास्तथा ||
३४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
ददृशुर्गाण्डिवं योधा रुक्मपृष्ठं महारथे ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
१४५
वैशम्पाय़न उवाच
ददृशुर्गिरिपादांश्च नानाधातुसमाचितान् ||
१२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४६
वैशम्पाय़न उवाच
ददृशुर्ज्वलनं तत्र वसमानं यथाविधि ||
१८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
ददृशुर्ज्वलनाकारं तं गर्भमथ कृत्तिकाः ||
१० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४२
सञ्जय़ उवाच
ददृशुर्दर्शनीय़ं तं भीमं ज्ञातिसमागमम् ||
२३ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१६
वैशम्पाय़न उवाच
ददृशुर्द्रौपदीं कृष्णामार्तामार्ततराः स्वय़म् ||
२३ ख
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
ददृशुर्द्वारकां चापि सागरेण परिप्लुताम् ||
४३ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१
सञ्जय़ उवाच
ददृशुर्द्विपदां श्रेष्ठाः श्रेष्ठं तं वै वनस्पतिम् ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४०
वैशम्पाय़न उवाच
ददृशुर्धर्मराजानमादाय़ वहु मङ्गलम् ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
ददृशुर्निहतं तत्र भारद्वाजं महारथम् ||
३५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१५२
वैशम्पाय़न उवाच
ददृशुर्निहतं भूमौ राक्षसं रुधिरोक्षितम् ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
ददृशुर्निहतांश्चैव यक्षान्सुविपुलेक्षणान् ||
२४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
ददृशुर्भीमसेनस्य रौद्रां विशसनीं गदाम् ||
१६ ग