शल्य पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
ततस्तय़ोः संनिपातस्तुमुलो रोमहर्षणः |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय
७३
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्तय़ोर्मिथस्तत्र विरोधः समजाय़त |
७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
ततस्तय़ोर्युद्धमतीतमानुषं; प्रदीव्यतोः प्राणदुरोदरेऽभवत् |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
ततस्तय़ोर्वधेनाशु वेदापहरणेन च |
६५ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३८
कुन्त्यु उवाच
तताप लोकानेकेन द्वितीय़ेनागमच्च माम् ||
९ ग
आदि पर्व
अध्याय
१६५
गन्धर्व उवाच
तताप सर्वान्दीप्तौजा व्राह्मणत्वमवाप च |
४४ ख
सभा पर्व
अध्याय
३२
वैशम्पाय़न उवाच
ततृपुः सर्ववर्णाश्च तस्मिन्यज्ञे मुदान्विताः ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७९
सञ्जय़ उवाच
ततो गङ्गा सुतस्नेहाद्भीष्मं पुनरुपागमत् |
३० क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३९
वैशम्पाय़न उवाच
ततो गङ्गां समासाद्य क्रमेण स जनार्णवः |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१०६
मुनिरु उवाच
ततो गच्छत्वसिद्धार्थः पीड्यमानो महाजनम् ||
२१ ख
आदि पर्व
अध्याय
६५
वैशम्पाय़न उवाच
ततो गच्छन्महावाहुरेकोऽमात्यान्विसृज्य तान् |
१ क
वन पर्व
अध्याय
८३
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत कावेरीं वृतामप्सरसां गणैः |
२० क
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत धर्मज्ञ कारापतनमुत्तमम् |
२ क
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत धर्मज्ञ चम्पकारण्यमुत्तमम् |
११४ क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत धर्मज्ञ तीर्थं त्रैलोक्यविश्रुतम् |
१६० क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत धर्मज्ञ तीर्थं संनिहितीमपि |
१६६ क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत धर्मज्ञ दधीचस्य महात्मनः |
१६३ क
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत धर्मज्ञ दीर्घसत्रं यथाक्रमम् |
११६ क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत धर्मज्ञ द्वारपालं तरन्तुकम् |
१३ क
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत धर्मज्ञ धर्मतीर्थं पुरातनम् |
१ क
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत धर्मज्ञ नमस्कृत्य महागिरिम् |
२३ क
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत धर्मज्ञ पुण्यस्थानमुमापतेः |
६९ क
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत धर्मज्ञ प्रभासं लोकविश्रुतम् |
७७ क
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत धर्मज्ञ भीमाय़ाः स्थानमुत्तमम् |
१०० क
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत धर्मज्ञ रुद्रकोटिं समाहितः |
१२४ क
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत धर्मज्ञ वसोर्धारामभिष्टुताम् |
९२ क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत धर्मज्ञ वाराहं तीर्थमुत्तमम् |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत धर्मज्ञ विमलं तीर्थमुत्तमम् |
१०३ क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत धर्मज्ञ विष्णोः स्थानमनुत्तमम् |
८ क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत धर्मज्ञ व्रह्मावर्तं नराधिप |
४३ क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत धर्मज्ञ सुतीर्थकमनुत्तमम् |
४४ क
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत धर्मज्ञ हिमवत्सुतमर्वुदम् |
७४ क
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत मलदां त्रिषु लोकेषु विश्रुताम् |
१०५ क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत राजेन्द्र कुरुक्षेत्रमभिष्टुतम् |
१ क
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत राजेन्द्र कौशिकस्य मुनेर्ह्रदम् |
१२३ क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत राजेन्द्र तीर्थं त्रैलोक्यविश्रुतम् |
३६ क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत राजेन्द्र तीर्थं त्रैलोक्यविश्रुतम् |
१२२ क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत राजेन्द्र तीर्थं शतसहस्रकम् |
१३७ क
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत राजेन्द्र देव्याः स्थानं सुदुर्लभम् |
११ क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत राजेन्द्र द्वारपालमरन्तुकम् |
४२ क
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत राजेन्द्र धर्मपृष्ठं समाहितः |
८७ क
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत राजेन्द्र धेनुकां लोकविश्रुताम् |
७६ क
वन पर्व
अध्याय
८३
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत राजेन्द्र प्रय़ागमृषिसंस्तुतम् |
६५ क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत राजेन्द्र फलकीवनमुत्तमम् |
७२ क
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत राजेन्द्र भर्तृस्थानमनुत्तमम् |
६८ क
वन पर्व
अध्याय
८३
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत राजेन्द्र भर्तृस्थानमनुत्तमम् |
५७ क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत राजेन्द्र मानुषं लोकविश्रुतम् |
५३ क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत राजेन्द्र मिश्रकं तीर्थमुत्तमम् |
७६ क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत राजेन्द्र रेणुकातीर्थमुत्तमम् |
१३९ क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत राजेन्द्र व्रह्मणः स्थानमुत्तमम् |
५८ क