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शान्ति पर्व
अध्याय २५६
तुलाधार उवाच
सद्भिर्वा यदि वासद्भिरय़ं पन्थाः समाश्रितः |
१ क
स्त्री पर्व
अध्याय १४
गान्धार्यु उवाच
सद्भिर्विगर्हितं घोरमनार्यजनसेवितम् |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३३
मातो उवाच
सद्भिर्विगर्हितं मार्गं त्यज मूर्खनिषेवितम् |
७ क
विराट पर्व
अध्याय ३०
वैशम्पाय़न उवाच
सद्भिश्च मन्त्रिभिः सार्धं पाण्डवैश्च नरर्षभैः ||
५ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
सद्भिश्च राजप्रवरैर्य इमे स्वर्गवासिनः ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७६
नारद उवाच
सद्भिश्च समुदाचारः श्रेय़ एतदसंशय़म् ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
सद्भिश्च सह संसर्गः कार्यः शमपराय़णैः ||
२४ ख
शल्य पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
सद्भिश्चानुगतः पन्थाः स सर्वैरनुगम्यते ||
६२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८२
पराशर उवाच
सद्भिस्तु सह संसर्गः शोभते धर्मदर्शिभिः |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय १९०
युधिष्ठिर उवाच
सद्भूतो जापकः कस्मात्स शरीरमथाविशेत् ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२७
व्यास उवाच
सद्भ्य आगतविज्ञानः शिष्टः शास्त्रविचक्षणः |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६५
भीष्म उवाच
सद्भ्यो ददाति यश्चान्नं सदैकाग्रमना नरः |
५८ क
शान्ति पर्व
अध्याय १८४
भृगुरु उवाच
सद्भ्यो यद्दीय़ते किञ्चित्तत्परत्रोपतिष्ठति ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २०
अष्टावक्र उवाच
सद्म चेदं वनं चेदं यच्चान्यदपि पश्यसि |
५६ क
वन पर्व
अध्याय ११०
लोमश उवाच
सद्यः प्रवर्षेत्पर्जन्य इति मे नात्र संशय़ः ||
२६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०१
शुक्र उवाच
सद्यः प्रीणाति देवान्वै ते प्रीता भावय़न्त्युत |
३५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२६
नारद उवाच
सद्यः फलमवाप्तं वै दृष्टो यद्भगवान्मय़ा ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २३६
व्यास उवाच
सद्यःप्रक्षालकाः केचित्केचिन्मासिकसञ्चय़ाः ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३९
सञ्जय़ उवाच
सद्यश्चोग्रमधर्मस्य फलं प्राप्नुहि दुर्मते |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २३६
व्यास उवाच
सद्यस्कारां निरूप्येष्टिं सर्ववेदसदक्षिणाम् ||
२२ ग
शान्ति पर्व
अध्याय २३६
व्यास उवाच
सद्यस्क्रांश्च यजेद्यज्ञानिष्टीश्चैवेह सर्वदा |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
सद्यो जातो मातरमत्ति गर्भ; स्तावश्विनौ मुञ्चथो जीवसे गाः ||
७० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११७
भीष्म उवाच
सद्यो वर्धय़ति प्राणान्पुष्टिमग्र्यां ददाति च |
८ क
वन पर्व
अध्याय २३८
वैशम्पाय़न उवाच
सद्यो वशं समापन्नः शत्रूणां शत्रुकर्शन ||
३८ ग
द्रोण पर्व
अध्याय ९
वैशम्पाय़न उवाच
सद्यो वृकोदराज्जातो महावलपराक्रमः |
६८ क
आदि पर्व
अध्याय १४३
वैशम्पाय़न उवाच
सद्यो हि गर्भं राक्षस्यो लभन्ते प्रसवन्ति च |
३२ क
आदि पर्व
अध्याय २१८
वैशम्पाय़न उवाच
सद्रुमं व्यसृजच्छक्रो जिघांसुः पाण्डुनन्दनम् ||
४७ ख
आदि पर्व
अध्याय ११४
वैशम्पाय़न उवाच
सद्वा वृहद्वा वृहकः करालश्च महाय़शाः ||
४६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१६
नारद उवाच
सद्वृत्तिः समुदाचारः श्रेय़ एतदनुत्तमम् ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ९५
वामदेव उवाच
सधना धान्यवन्तश्च दृढमूलः स पार्थिवः ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय १४७
हनूमानु उवाच
सधनुर्धन्विनां श्रेष्ठो दण्डकारण्यमाश्रितः ||
२९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९६
सञ्जय़ उवाच
सधनुर्मण्डलः सङ्ख्ये तेजोभास्वररश्मिवान् |
५ क
आदि पर्व
अध्याय १२६
वैशम्पाय़न उवाच
सधनुर्वद्धनिस्त्रिंशः पादचारीव पर्वतः ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४५
सञ्जय़ उवाच
सधनुर्वाणकेय़ूरौ वाहू समुकुटं शिरः |
२५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
सधनुश्च रथस्थश्च प्रवपन्साय़कान्रणे ||
६५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
सधनुश्चापरस्यापि सशरः साङ्कुशस्तथा ||
२७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४७
सञ्जय़ उवाच
सधनुष्को न शक्योऽय़मपि जेतुं सुरासुरैः |
३० क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२७
उमो उवाच
सधर्मचारिणी चाहं भक्ता चेति वृषध्वज ||
४९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२७
भीष्म उवाच
सधातुशिखराभोगो दीनदग्धवनौषधिः ||
३५ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
सधूमं सार्चिषं चाग्निं मुमोचोग्रा महास्वना ||
२९ ख
सभा पर्व
अध्याय ६४
वैशम्पाय़न उवाच
सधूमः सस्फुलिङ्गार्चिः पावकः समजाय़त ||
१४ ख
शल्य पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
सधूममिव निःश्वस्य करौ धुन्वन्पुनः पुनः |
२ क
आदि पर्व
अध्याय २६
सूत उवाच
सधूमा चापतत्सार्चिर्दिवोल्का नभसश्च्युता ||
२८ ख
आदि पर्व
अध्याय १६
सूत उवाच
सधूमाः सार्चिषो वाता निष्पेतुरसकृन्मुखात् ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११३
सञ्जय़ उवाच
सध्वजं सरथं साश्वं भीष्ममन्तर्दधे शरैः ||
३४ ख
वन पर्व
अध्याय १८
वासुदेव उवाच
सध्वजः सपताकश्च सानुकर्षः सतूणवान् ||
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
सध्वजः सह सूतेन जगाम धरणीतलम् ||
२२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
सध्वजा रथिनः पेतुर्हय़ारोहा हय़ैः सह |
११५ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ७
द्रौणिरु उवाच
सध्वजाः सपताकाश्च सघण्टाः सपरश्वधाः ||
२८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५२
वैशम्पाय़न उवाच
सध्वजाः सपताकाश्च सशरासनतोमराः |
४ क