महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते भ्रातरः सर्वे धनञ्जय़मचोदय़न् |
४० क
शान्ति पर्व
अध्याय
२०२
भीष्म उवाच
ततस्ते मधुपर्केण पूजां चक्रुरथो मय़ि |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३३
नारद उवाच
ततस्ते मन्त्रदाः पुत्राः पितृत्वमुपपेदिरे ||
८ ग
वन पर्व
अध्याय
५६
वृहदश्व उवाच
ततस्ते मन्त्रिणः सर्वे ते चैव पुरवासिनः |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
५७
वृहदश्व उवाच
ततस्ते मन्त्रिणः सर्वे विज्ञाय़ नलशासनम् |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१७०
भीष्म उवाच
ततस्ते मां महीपालाः सर्व एव विशां पते |
१७ क
सभा पर्व
अध्याय
१९
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते मागधं दृष्ट्वा पुरं प्रविविशुस्तदा ||
१९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४७
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते मुनय़ः प्राप्ताः फलान्यादाय़ पर्वतात् |
३८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८६
भीष्म उवाच
ततस्ते मुनय़ः सर्वे नारदप्रमुखा नृप |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२६
भीष्म उवाच
ततस्ते मुनय़ः सर्वे परिवार्य नरर्षभम् |
२५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९५
भीष्म उवाच
ततस्ते मुनय़ः सर्वे पुष्कराणि विसानि च |
५० क
उद्योग पर्व
अध्याय
१७५
होत्रवाहन उवाच
ततस्ते मुनय़ः सर्वे समुत्तस्थुः सहस्रशः |
७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९५
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते मुनय़ो दृष्ट्वा मुनेस्तस्य तपोवलम् |
२६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८६
भीष्म उवाच
ततस्ते मुनय़ो राजन्नृचीकप्रमुखास्तदा |
२३ क
वन पर्व
अध्याय
२३०
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते मृदवोऽभूवन्गन्धर्वाः शरपीडिताः |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८१
भीष्म उवाच
ततस्ते मृदिताः सर्वे मम वाणाः सुसंशिताः |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय
१६९
वसिष्ठ उवाच
ततस्ते मोघसङ्कल्पा भय़ार्ताः क्षत्रिय़र्षभाः |
२२ क
वन पर्व
अध्याय
२९८
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते यक्षवचनादुदतिष्ठन्त पाण्डवाः |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते यन्तरि हते प्राद्रवंस्तुरगा भृशम् ||
५० ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
९५
भीष्म उवाच
ततस्ते यातुधानीं तां दृष्ट्वा विकृतदर्शनाम् |
१९ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते योधमुख्यास्तं सहसा पर्यवारय़न् |
३१ क
वन पर्व
अध्याय
२४८
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते यौगपद्येन यय़ुः सर्वे चतुर्दिशम् |
४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७३
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते रथघोषेण खुरनेमिस्वनेन च |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते रथिनो राजञ्शरैः संनतपर्वभिः |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय
१०१
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते राजपुरुषा विचिन्वानास्तदाश्रमम् |
९ क
वन पर्व
अध्याय
२७४
मार्कण्डेय़ उवाच
ततस्ते राममर्छन्तो लक्ष्मणं च क्षपाचराः |
९ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते रुधिरं हस्तैर्मुखान्निर्मृज्य तस्य ह |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते रुधिराभ्यक्ता भित्त्वा कर्णं महाहवे |
४० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते लव्धलक्ष्यत्वादन्योन्यमभिचुक्रुशुः |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२२
भीष्म उवाच
ततस्ते लोकपितरः सर्वलोकार्थचिन्तकाः |
५० क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
दुर्योधन उवाच
ततस्ते लोभमोहाभ्यामभिभूता विचेतसः |
२८ क
वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते वरवस्त्राणि शुभान्याभरणानि च |
२२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५०
भीष्म उवाच
ततस्ते वहुभिर्योगैः कैवर्ता मत्स्यकाङ्क्षिणः |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८७
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते वाजिनो हृष्टाः सुपुष्टा वातरंहसः |
६५ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३१
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते वाष्पमुत्सृज्य गान्धारीसहितं नृपम् |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२७
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते विवुधाः सर्वे व्रह्मा ते च महर्षय़ः ||
४८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७१
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते विव्यधुः सर्वे द्रौणिं राजन्महारथाः |
५९ क
आदि पर्व
अध्याय
१५२
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते विस्मिताः सर्वे कर्म दृष्ट्वातिमानुषम् |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११५
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते विस्मय़ं जग्मुर्नानाजनपदेश्वराः |
५६ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३३
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते वृक्षमूलेषु कृतवासपरिग्रहाः |
३७ क
शल्य पर्व
अध्याय
४७
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते वै महाभागा गत्वा तत्र सुसंशिताः |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३४
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते व्याकुलीभूता राजानः कर्णपीडिताः |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५२
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते व्याससहिताः सर्व एव महर्षय़ः |
२२ क
वन पर्व
अध्याय
२७५
मार्कण्डेय़ उवाच
ततस्ते व्रह्मणा प्रोक्ते तथेति वचने तदा |
४२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२७
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते व्रह्मणा सार्धमृषय़ो विवुधास्तथा |
३९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८३
भीष्म उवाच
ततस्ते व्राह्मणा राजन्नव्रुवन्परिगृह्य माम् |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय
१५२
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते व्राह्मणाः सर्वे क्षत्रिय़ाश्च सुविस्मिताः |
१८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९१
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते व्राह्मणाः सर्वे मुदिता जग्मुरालय़ान् |
२६ क
वन पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते व्राह्मणाः सर्वे वकं दाल्भ्यमपूजय़न् |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३९
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते व्राह्मणाः सर्वे स च राजा युधिष्ठिरः |
२९ क