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द्रोण पर्व
अध्याय ९
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणाय़ाभिमुखं यान्तं के वीराः पर्यवारय़न् ||
५८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणाय़ाभिमुखं यान्तं के शूराः पर्यवारय़न् ||
२८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
सञ्जय़ उवाच
द्रोणाय़ाभिमुखं यान्तं दीप्यमानमिवानलम् ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
द्रोणाय़ाभिमुखं यान्तं वत्सदन्तैरवारय़त् ||
३६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणाय़ाभिमुखं यान्तं व्यात्ताननमिवान्तकम् ||
६६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
द्रोणाय़ाभिमुखं यान्तं शरैस्तीक्ष्णैस्ततक्षतुः ||
४५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
द्रोणाय़ाभिमुखं वीरं विविंशतिरवारय़त् ||
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
द्रोणाय़ावसृजद्राजन्स रथादवपुप्लुवे ||
८७ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३०
दुर्योधन उवाच
द्रोणे कर्णे च संशान्ते निहते च पितामहे ||
४४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणे च परमेष्वासे भृशं मे व्यथितं मनः ||
३४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १६२
दुर्योधन उवाच
द्रोणे च पुरुषव्याघ्रे स्थिते युद्धाभिनन्दिनि ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
द्रोणे च मोघसङ्कल्पे रक्षिते च युधिष्ठिरे ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५४
सञ्जय़ उवाच
द्रोणे चास्त्रविदां श्रेष्ठे सपुत्रे ससुहृज्जने |
३३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
द्रोणे चित्रास्त्रतां सङ्ख्ये राजंस्त्वमनुचिन्तय़ ||
३४ ख
सभा पर्व
अध्याय ३४
शिशुपाल उवाच
द्रोणे तिष्ठति वार्ष्णेय़ं कस्मादर्चितवानसि ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
द्रोणे युधि पराक्रान्ते नर्दमाने मुहुर्मुहुः |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६७
सञ्जय़ उवाच
द्रोणे हते कौरवार्थं व्यक्तमभ्येति वासवः ||
२२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५
धृतराष्ट्र उवाच
द्रोणे हते च यद्वृत्तं कौरवाणां परैः सह |
१०९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४८
सञ्जय़ उवाच
द्रोणेन च दिशः सर्वा वीक्षमाणाः प्रदुद्रुवुः ||
१९ ख
विराट पर्व
अध्याय ३६
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणेन च सपुत्रेण महेष्वासेन धीमता |
८ क
शल्य पर्व
अध्याय ६२
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणेन च सपुत्रेण विदुरेण च धीमता |
४४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३०
सञ्जय़ उवाच
द्रोणेन चरता सङ्ख्ये प्रभग्नानि शितैः शरैः ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय १२३
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणेन तु तदाहूय़ रहस्युक्तोऽन्नसाधकः |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११
सञ्जय़ उवाच
द्रोणेन त्वेवमुक्तस्य तव पुत्रस्य भारत |
१३ क
स्त्री पर्व
अध्याय २५
गान्धार्यु उवाच
द्रोणेन द्रुपदं सङ्ख्ये पश्य माधव पातितम् |
१५ क
उद्योग पर्व
अध्याय ८७
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणेन धार्तराष्ट्रैश्च तैर्वृतो नगरं यय़ौ ||
५ ख
स्त्री पर्व
अध्याय २५
गान्धार्यु उवाच
द्रोणेन निहतं शूरं हरन्ति हृतचेतसः ||
१८ ख
स्त्री पर्व
अध्याय २५
गान्धार्यु उवाच
द्रोणेन निहताः शूराः शेरते रुचिराङ्गदाः |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
द्रोणेन निहतास्तत्र क्षत्रिय़ा वहवो रणे |
२२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
द्रोणेन परमेष्वासौ गमितौ यमसादनम् ||
७६ ख
विराट पर्व
अध्याय ५३
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणेन मुक्तं मुक्तं तु ग्रसते स्म पुनः पुनः ||
४८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७२
सञ्जय़ उवाच
द्रोणेन मोचय़ामास पाञ्चाल्यं शिनिपुङ्गवः ||
३२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
द्रोणेन युगपद्राजन्दिवं सम्प्रेषितौ शरैः ||
७१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९८
सञ्जय़ उवाच
द्रोणेन युधि निर्मुक्ते तस्मिन्नस्त्रे महामृधे |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११६
सञ्जय़ उवाच
द्रोणेन रामेण जनार्दनेन; मुहुर्मुहुः सञ्जय़ेनापि चोक्तम् ||
३४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४७
सञ्जय़ उवाच
द्रोणेन वध्यमानानां पाञ्चालानां विशां पते |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०१
सञ्जय़ उवाच
द्रोणेन वध्यमानेषु सैन्येषु भरतर्षभ ||
४८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०७
सञ्जय़ उवाच
द्रोणेन वारिता यत्ता न चचाल पदात्पदम् ||
४९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३२
सञ्जय़ उवाच
द्रोणेन वार्यमाणास्ते स्वय़ं तव सुतेन च |
४२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३६
सञ्जय़ उवाच
द्रोणेन वार्यमाणास्ते स्वय़ं तव सुतेन च |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
द्रोणेन वार्यमाणोऽपि निजघ्ने यत्सुतांस्तव ||
३० ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७
सञ्जय़ उवाच
द्रोणेन विहितं दिक्षु वाणजालमदृश्यत ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
द्रोणेन विहितं दृष्ट्वा व्यूहं क्षुव्धार्णवोपमम् ||
३१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
द्रोणेन विहितो राजन्राज्ञा शान्तनवेन च |
३९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
द्रोणेन विहितो व्यूहः पदात्यश्वरथद्विपैः |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय १२८
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणेन वैरं द्रुपदः संस्मरन्न शशाम ह |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
द्रोणेन व्याहृते त्वेवं संशप्तकगणाः पुनः |
१५ क
स्त्री पर्व
अध्याय २५
गान्धार्यु उवाच
द्रोणेन समरे पश्य निकृत्तं वहुधा शरैः ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
द्रोणेन समरे राजन्समिय़ाय़ेन्द्रकर्मणा ||
१० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
द्रोणेन समसज्जन्त सपुत्रेण महात्मना |
२१ ख