आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४९
व्रह्मो उवाच
तथा सत्त्वप्रदीपेन गच्छन्ति परमैषिणः ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१९२
व्राह्मण उवाच
तथा सत्यं परे लोके यथा वै पुरुषर्षभ ||
६१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
७३
वैशम्पाय़न उवाच
तथा सत्यं व्रवीम्येतन्नास्ति तस्य व्यतिक्रमः |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय
५
सूत उवाच
तथा सत्यं समाख्याहि जिहीर्षाम्याश्रमादिमाम् ||
२० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
तथा सत्यधृतिर्वीरो मदिराश्वश्च वीर्यवान् |
८३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
तथा सत्यधृतिस्तात कृत्वा कदनमाहवे |
८१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६९
वैशम्पाय़न उवाच
तथा सत्यव्रता देवी गान्धारी धर्मदर्शिनी ||
४१ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
२८२
पराशर उवाच
तथा सत्संनिकर्षेण हीनवर्णोऽपि दीप्यते ||
४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
तथा सदृशकर्माणौ वरुणस्य महावलौ ||
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
तथा सनत्सुजातेन यत्राध्यात्ममनुत्तमम् |
१४३ क
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
तथा सन्धाय़ कर्माणि अष्टौ भारत सेवसे ||
१२ ख
विराट पर्व
अध्याय
४९
वैशम्पाय़न उवाच
तथा सपत्नान्विकिरन्किरीटी; चचार सङ्ख्येऽतिरथो रथेन ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
२७३
मार्कण्डेय़ उवाच
तथा समभवच्चापि यदुवाच विभीषणः |
१४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
तथा समाजग्मतुरुग्रवेगौ; धनञ्जय़श्चाधिरथिश्च वीरौ ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६५
भीष्म उवाच
तथा समापय़ामासुर्यथाकालं सुरर्षभाः ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८३
राजो उवाच
तथा समीक्ष्य भगवञ्श्रेय़से विनिय़ुङ्क्ष्व माम् ||
५७ ख
सभा पर्व
अध्याय
९
नारद उवाच
तथा समुद्राश्चत्वारो नदी भागीरथी च या |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३८
वाय़ुरु उवाच
तथा समुद्रो नृपते पूर्णो मृष्टेन वारिणा |
७ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
तथा समुपविष्टेषु पाण्डवेषु महात्मसु |
१ क
आदि पर्व
अध्याय
५४
सूत उवाच
तथा सम्पूजय़ित्वा तं यत्नेन प्रपितामहम् |
१५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८६
वैशम्पाय़न उवाच
तथा सम्प्रेषय़ामास दूतान्नृपतिशासनात् |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
तथा सम्भाषतां तेषां प्रादुरासीद्धनञ्जय़ः |
१ क
शल्य पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
तथा सम्भाषमाणं तु वासुदेवो वृकोदरम् |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
तथा सम्वन्धकं तुल्यमस्माकं त्वय़ि माधव ||
१० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४४
व्रह्मो उवाच
तथा सरोदपानानां सर्वेषां सागरोऽग्रजः ||
१३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७५
वैशम्पाय़न उवाच
तथा सर्वं कृतवान्धर्मराजो; भीष्मेणोक्तो विधिवद्गोप्रदाने |
२९ क
आदि पर्व
अध्याय
१३२
वैशम्पाय़न उवाच
तथा सर्वं विधातव्यं यावत्कालस्य पर्ययः ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
तथा सर्वं स नगरं प्रसाद्य जनमेजय़ |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२१
सञ्जय़ उवाच
तथा सर्वा दिशो राजन्सर्वांश्च रथिनो रणे |
९ क
शल्य पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
तथा सर्वाः स्त्रिय़श्चैव गान्धारी च यशस्विनी ||
४६ ख
विराट पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
तथा सर्वाङ्गसम्भुग्नं कूर्मं स्थल इवोद्धृतम् ||
२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३१
श्रीभगवानु उवाच
तथा सर्वाणि भूतानि मत्स्थानीत्युपधारय़ ||
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७८
वसिष्ठ उवाच
तथा सर्वाणि भूतानि स्थावराणि चराणि च |
४ क
शल्य पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
तथा सर्वाण्यनीकानि संनिपत्य जनाधिप |
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
९०
लोमश उवाच
तथा सर्वात्मना कार्यमिति मां विजय़ोऽव्रवीत् ||
४ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२६
वैशम्पाय़न उवाच
तथा सर्वे नारदं विप्रसङ्घाः; सम्पूजय़ामासुरतीव राजन् |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८३
सञ्जय़ उवाच
तथा सर्वेण सैन्येन राजा दुर्योधनस्तदा |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
२३२
युधिष्ठिर उवाच
तथा सर्वैरुपाय़ैस्त्वं यतेथाः कुरुनन्दन ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१७६
भृगुरु उवाच
तथा सलिलसंरुद्धे नभसोऽन्ते निरन्तरे |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय
२०३
नारद उवाच
तथा सहस्रनेत्रश्च वभूव वलसूदनः ||
२६ ख
वन पर्व
अध्याय
१६६
अर्जुन उवाच
तथा सहस्रशस्तत्र रत्नसङ्घाः प्लवन्त्युत |
५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
तथा सा कौरवी सेना मृदिता तेन भारत ||
४७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२२
सञ्जय़ उवाच
तथा सात्यकिना वीरे विरथे सूतजे कृते |
६५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८५
जनक उवाच
तथा सामान्यधर्मांश्च सर्वत्र कुशलो ह्यसि ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५०
भीष्म उवाच
तथा सार्थाधिवासैश्च शोभसे मेरुवद्द्रुम ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४४
भीष्म उवाच
तथा सिध्यन्ति ते मन्त्रा नादत्ताय़ाः कथञ्चन ||
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय
१०९
मृग उवाच
तथा सुखं त्वां सम्प्राप्तं दुःखमभ्यागमिष्यति ||
३० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
तथा सुतस्ते ज्वलनार्कवर्णं; रथं समास्थाय़ कुरुप्रवीर |
९७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
तथा सुषेणोऽप्यसिचर्मपाणि; स्तवात्मजः सत्यसेनश्च वीरः |
१०० क
उद्योग पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
तथा सुहृद्भिः सचिवैश्च राज; न्ये चापि त्वामुपजीवन्ति तैश्च ||
८ ख