आदि पर्व
अध्याय
२०२
नारद उवाच
ततः सर्वां महीं जेतुमारव्धावुग्रशासनौ |
९ क
आदि पर्व
अध्याय
१३४
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सर्वाः प्रकृतय़ो नगराद्वारणावतात् |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४६
वासुदेव उवाच
ततः सर्वाः प्रजास्तात धृतराष्ट्रं जनेश्वरम् |
७ क
स्त्री पर्व
अध्याय
४
विदुर उवाच
ततः सर्वाङ्गसम्पूर्णो गर्भो मासे प्रजाय़ते ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय
१६०
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सर्वाणि भूतानि कालः शिशिरमृच्छति ||
३० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२१
सञ्जय़ उवाच
ततः सर्वाणि भूतानि विस्मय़ं जग्मुरुत्तमम् |
४० क
भीष्म पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
ततः सर्वाणि सैन्यानि तावकानि विशां पते |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८४
सञ्जय़ उवाच
ततः सर्वाणि सैन्यानि धर्मपुत्रस्य शासनात् |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८५
सञ्जय़ उवाच
ततः सर्वाणि सैन्यानि धर्मपुत्रस्य शासनात् |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
ततः सर्वाणि सैन्यानि व्यद्रवन्त सुतस्य ते |
७१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३८
सञ्जय़ उवाच
ततः सर्वाणि सैन्यानि सेनागोपाश्च भारत |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
ततः सर्वाणि सैन्यानि सेनामुख्याश्च सर्वशः |
५८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३८
सञ्जय़ उवाच
ततः सर्वाणि सैन्यानि हतशिष्टानि यानि वै |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
ततः सर्वाण्यनीकानि तव पुत्रस्य शासनात् |
२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
ततः सर्वात्मनाद्य त्वं युद्धातिथ्यं प्रय़च्छ मे ||
१९ ख
आदि पर्व
अध्याय
१६३
गन्धर्व उवाच
ततः सर्वानवद्याग्नीं तपतीं तपनः स्वय़म् |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६३
भीष्म उवाच
ततः सर्वानिमाँल्लोकान्व्राह्मणोऽनुचचार ह |
५२ क
शल्य पर्व
अध्याय
३८
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सर्वानुपादाय़ तनय़ान्वै महातपाः |
२५ क
वन पर्व
अध्याय
२८०
मार्कण्डेय़ उवाच
ततः सर्वान्द्विजान्वृद्धाञ्श्वश्रूं श्वशुरमेव च |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०
धृतराष्ट्र उवाच
ततः सर्वान्नरव्याघ्रो हत्वा नरपतीन्रणे |
३५ क
आदि पर्व
अध्याय
९६
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सर्वान्महीपालान्प्रत्यविध्यत्त्रिभिस्त्रिभिः ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
ततः सर्वान्समानाय़्य भ्रातॄन्सैन्यांश्च सर्वशः |
३ क
वन पर्व
अध्याय
२७९
मार्कण्डेय़ उवाच
ततः सर्वान्समानीय़ द्विजानाश्रमवासिनः |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
२६८
मार्कण्डेय़ उवाच
ततः सर्वाभिसारेण हरीणां वातरंहसाम् |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५२
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सर्वार्तवं दिव्यं पुष्पवर्षं नभस्तलात् |
२३ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
ततः सर्वाय़ुधाभावे वीक्षमाणस्ततस्ततः |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७१
सञ्जय़ उवाच
ततः सर्वे च पाञ्चाला भीमसेनश्च पाण्डवः |
६७ क
आदि पर्व
अध्याय
१४२
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सर्वे तथेत्युक्त्वा सह मात्रा परन्तपाः |
३४ क
आदि पर्व
अध्याय
८
सूत उवाच
ततः सर्वे द्विजवराः समाजग्मुः कृपान्विताः |
२० क
वन पर्व
अध्याय
५१
वृहदश्व उवाच
ततः सर्वे महाराज सगणाः सहवाहनाः |
२४ क
वन पर्व
अध्याय
१५१
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सर्वे महावाहुं समासाद्य वृकोदरम् |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६६
सञ्जय़ उवाच
ततः सर्वे महाशङ्खान्दध्मुः पुरुषसत्तमाः ||
५७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७२
सञ्जय़ उवाच
ततः सर्वे रथास्तूर्णं पाञ्चाला जय़गृद्धिनः |
३५ क
शल्य पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
ततः सर्वे समागम्य पुत्रेण तव सैनिकाः |
७ क
शल्य पर्व
अध्याय
५०
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सर्वे समाजग्मुस्तत्र राजन्महर्षय़ः |
४३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८३
वसिष्ठ उवाच
ततः सर्वे समुद्विग्ना भगवन्तमुपागमन् ||
४१ ग
वन पर्व
अध्याय
९६
लोमश उवाच
ततः सर्वे समेत्याथ ते नृपास्तं महामुनिम् |
१८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१३
शल्य उवाच
ततः सर्वे सुरगणाः सोपाध्याय़ाः सहर्षिभिः |
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१९०
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सर्वे सुहृदस्तत्र तस्य; समाजग्मुः सचिवा मन्त्रिणश्च |
७ क
वन पर्व
अध्याय
१३
अर्जुन उवाच
ततः सर्वेश्वरत्वं च सम्प्रदाय़ शचीपतेः |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७६
सञ्जय़ उवाच
ततः सर्वेषु सैन्येषु वादित्राणि प्रहृष्टवत् |
३९ क
वन पर्व
अध्याय
१३
वासुदेव उवाच
ततः सर्वेऽभिषिञ्चामो धर्मराजं युधिष्ठिरम् |
६ क
सभा पर्व
अध्याय
५२
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सर्वैर्महावाहुर्भ्रातृभिः परिवारितः |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७६
भृगुरु उवाच
ततः सलिलमुत्पन्नं तमसीवापरं तमः |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
ततः सवाणानि महास्वनानि; विस्फार्यमाणानि धनूंषि वीरैः |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय
१२६
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सविद्युत्स्तनितैः सेन्द्राय़ुधपुरोजवैः |
२३ क
शल्य पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
ततः सविशिखं चापं सहदेवस्य धन्विनः |
८ क
शल्य पर्व
अध्याय
४९
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सविस्मय़श्चिन्तां जगामाथासितः प्रभुः |
१६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१७
सिद्ध उवाच
ततः सवेदनः सद्यो जीवः प्रच्यवते क्षरन् |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
ततः सशिष्येण मय़ा सूर्येणेव गभस्तिभिः |
१८ क