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शान्ति पर्व
अध्याय २१४
युधिष्ठिर उवाच
द्विजातय़ो व्रतोपेता यदिदं भुञ्जते हविः |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९३
युधिष्ठिर उवाच
द्विजातय़ो व्रतोपेता हविस्ते यदि भुञ्जते |
१ क
वन पर्व
अध्याय ११७
वैशम्पाय़न उवाच
द्विजानां च परां पूजां चक्रे नृपतिसत्तमः ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८५
पराशर उवाच
द्विजानां परिचर्या च शूद्रकर्म नराधिप ||
२१ ख
सभा पर्व
अध्याय ११
नारद उवाच
द्विजानां परिवेष्टारस्तस्मिन्यज्ञे च तेऽभवन् ||
५६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
द्विजानां वेदकार्येषु कार्येष्वन्येषु चैव हि |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय ७
सूत उवाच
द्विजानामग्निहोत्रेषु यज्ञसत्रक्रिय़ासु च ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय १३८
लोमश उवाच
द्विजानामनधीता वै वेदाः सम्प्रतिभान्त्विति ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय १३५
यवक्रीरु उवाच
द्विजानामनधीता वै वेदाः सुरगणार्चित |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८६
पराशर उवाच
द्विजानामपि राजेन्द्र प्रज्ञावन्तः परा मताः |
२१ क
वन पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
द्विजानाममृतं धर्मो ह्येकश्चैवैकवर्णिकः |
३४ क
आदि पर्व
अध्याय ३७
शृङ्ग्यु उवाच
द्विजानामवमन्तारं कुरूणामय़शस्करम् ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय ६५
वृहदश्व उवाच
द्विजान्प्रस्थापय़ामास नलदर्शनकाङ्क्षय़ा ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३६
भीष्म उवाच
द्विजान्सम्पूजय़ामास महेन्द्रत्वमवाप च ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३९
वासुदेव उवाच
द्विजावमानादन्यत्र प्रादाद्वरमनुत्तमम् |
४१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९०
युधिष्ठिर उवाच
द्विजेभ्यः कुरुशार्दूल तन्मे व्याख्यातुमर्हसि ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १५३
वैशम्पाय़न उवाच
द्विजेभ्यो वलमुख्येभ्यो नैगमेभ्यश्च सर्वशः |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११३
वृहस्पतिरु उवाच
द्विजेभ्यो वेदवृद्धेभ्यः प्रय़तः सुसमाहितः |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११३
वृहस्पतिरु उवाच
द्विजेभ्यो वेदवृद्धेभ्यो दत्त्वा पापात्प्रमुच्यते ||
१९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ६
द्रुपद उवाच
द्विजेषु वैद्याः श्रेय़ांसो वैद्येषु कृतवुद्धय़ः |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १६
कृष्ण उवाच
द्विजेष्वकोपं पितृतः प्रसादं; शतं सुतानामुपभोगं परं च |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०२
अगस्त्य उवाच
द्विजेष्वधर्मय़ुक्तानि स करोति नराधमः ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय ११८
वैशम्पाय़न उवाच
द्विजैः पृथिव्यां प्रथितं महद्भि; स्तीर्थं प्रभासं समुपाजगाम ||
१५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २९
समुद्र उवाच
द्विजैरुत्पादितं क्षत्रं जामदग्न्यो न्यकृन्तत ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १९२
धर्म उवाच
द्विजो दानफलैर्युक्तो राजा सत्यफलेन च ||
७५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३०
सञ्जय़ उवाच
द्विजो भूत्वा च तत्रैव पुनर्दासोऽपि जाय़ते ||
५४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२४
भीष्म उवाच
द्विजोत्तम महाभाग गम्यतां वचनान्मम |
३१ क
आदि पर्व
अध्याय २५
सूत उवाच
द्विजोत्तम विनिर्गच्छ तूर्णमास्यादपावृतात् |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२०
भीष्म उवाच
द्विजोत्तमैः सर्वगतैरभिष्टुतो; विदीप्ततेजा गतमन्युरीश्वरः |
११८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५७
भीष्म उवाच
द्विट्छिद्रदर्शी नृपतिर्नित्यमेव प्रशस्यते |
१७ क
वन पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
द्वितीय़ इव मार्तण्डो युगान्ते समुपस्थिते ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९०
भीष्म उवाच
द्वितीय़ं कर्म विज्ञाय़ नृपते विषय़ैषिणाम् ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८६
पराशर उवाच
द्वितीय़ं कारणं तत्र नान्यत्किञ्चन विद्यते |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय १००
वैशम्पाय़न उवाच
द्वितीय़ं कुरुवंशस्य राजानं दातुमर्हसि ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २३५
व्यास उवाच
द्वितीय़ं क्रमशः प्राप्य स्वर्गलोके महीय़ते ||
२६ ग
द्रोण पर्व
अध्याय १४१
सञ्जय़ उवाच
द्वितीय़ं च तृतीय़ं च चतुर्थं पञ्चमं तथा ||
४९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
द्वितीय़ं चापरं नागं सहस्रशिरसं वरम् |
६९ क
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
द्वितीय़ं तु सभापर्व वहुवृत्तान्तमुच्यते |
९७ क
सभा पर्व
अध्याय ६३
धृतराष्ट्र उवाच
द्वितीय़ं ते वरं भद्रे ददामि वरय़स्व माम् |
३१ क
शल्य पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
द्वितीय़ं नेह पश्यामि ससहाय़ाश्च पाण्डवाः ||
४८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९७
वैशम्पाय़न उवाच
द्वितीय़ं प्रेषय़ामास वलस्कन्धं युधिष्ठिरः ||
७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४२
व्रह्मो उवाच
द्वितीय़ं मारुतो भूतं त्वगध्यात्मं च विश्रुतम् |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ७३
वाय़ुरु उवाच
द्वितीय़ं वर्णमकरोत्प्रजानामनुगुप्तय़े ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २१८
श्रीरु उवाच
द्वितीय़ं शक्र पादं मे तस्मात्सुनिहितं कुरु ||
२२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
वासुदेव उवाच
द्वितीय़ं शीर्णपर्णाशी तृतीय़ं चाम्वुभोजनः |
८७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९८
याज्ञवल्क्य उवाच
द्वितीय़ं सर्गमित्याहुरेतद्वुद्ध्यात्मकं स्मृतम् ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
द्वितीय़ः शलभस्तेषामसुराणां वभूव यः |
२९ क
वन पर्व
अध्याय १५८
वैशम्पाय़न उवाच
द्वितीय़मपराध्यन्तं भीमं श्रुत्वा धनेश्वरः |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २३४
भीष्म उवाच
द्वितीय़माय़ुषो भागं गृहमेधिव्रती भवेत् ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २३५
व्यास उवाच
द्वितीय़माय़ुषो भागं गृहमेधी गृहे वसेत् |
१ क