वन पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
तमध्यात्मरतिर्विद्वाञ्शौनको नाम वै द्विजः |
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४३
भीष्म उवाच
तमध्वरे शंसितारः स्तुवन्ति; रथन्तरे सामगाश्च स्तुवन्ति |
१५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२८
व्राह्मण उवाच
तमध्वर्युः प्रत्युवाच नाय़ं छागो विनश्यति |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२२
वैशम्पाय़न उवाच
तमनर्थं परिहरन्नात्मश्रेय़ः करिष्यसि ||
११ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७३
वैशम्पाय़न उवाच
तमनादृत्य ते सर्वे शरैरभ्यहनंस्तदा |
५ क
वन पर्व
अध्याय
१५२
राक्षसा ऊचुः
तमनादृत्य पद्मानि जिहीर्षसि वलादितः |
७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७७
वैशम्पाय़न उवाच
तमनार्यं नृशंसं च विस्मृत्यास्य पितामहम् |
३८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७७
वासुदेव उवाच
तमनार्यं सदा क्षुद्रं पुरुषं कामचारिणम् |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
तमनुद्रुत्य सान्त्वेन परमेण धनञ्जय़म् |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२६
भीष्म उवाच
तमनुध्यान्तमालक्ष्य राजा परमदुर्मनाः |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
तमनुप्रय़तो वाय़ुः पुण्यगन्धवहः शुचिः |
२४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
तमन्तकमिव क्रुद्धं निःश्वसन्तं मुहुर्मुहुः |
८० क
शल्य पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
तमन्तकमिव क्रुद्धं परिघं प्रेक्ष्य पाण्डवः |
३१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
तमन्तकमिव क्रुद्धमनिवार्यं महारथम् |
१८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
तमन्तकमिव क्रुद्धमन्तकालान्तकोपमम् |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
तमन्तकमिव क्रुद्धमापतन्तं यतव्रतम् |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
तमन्तकमिवाय़स्तमापतन्तं वृकोदरः |
१० क
विराट पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
तमन्तकमिवाय़ान्तं गन्धर्वं प्रेक्ष्य ते तदा |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
तमन्तरिक्षे नाराचं द्रौणिश्चिच्छेद पत्रिणा |
८८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०४
सञ्जय़ उवाच
तमन्तर्धाय़ निनदं ध्वनिर्भीमस्य नर्दतः |
३२ क
वन पर्व
अध्याय
१३८
लोमश उवाच
तमन्धं शूद्रमासीनं गृहपालमथाव्रवीत् ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११६
सञ्जय़ उवाच
तमन्ये शूरसेनानां शूराः सङ्ख्ये न्यवारय़न् |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७
युधिष्ठिर उवाच
तमन्येऽप्युपजीवन्ति मन्दवेगञ्चरा मृगाः ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५२
भीष्म उवाच
तमन्वगच्छतां तौ तु क्षुधितौ श्रमकर्शितौ |
३७ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
तमन्वगच्छद्विदुरो विद्वान्सूतश्च सञ्जय़ः |
३ क
वन पर्व
अध्याय
२६१
मार्कण्डेय़ उवाच
तमन्वगच्छल्लक्ष्मीवान्धनुष्माँल्लक्ष्मणस्तदा |
२८ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
५
सञ्जय़ उवाच
तमन्वगात्कृपो राजन्कृतवर्मा च सात्वतः ||
३६ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
११
वैशम्पाय़न उवाच
तमन्वगात्सुदुःखार्ता द्रौपदी शोककर्शिता |
४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५१
युधिष्ठिर उवाच
तमन्वगाद्वानरवर्यकेतनः; ससात्यकिर्माद्रवतीसुतावपि |
५४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
तमन्वगेवास्य पिता पुत्रगृद्धी न्यवर्तत |
९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५९
वासुदेव उवाच
तमन्वधावत्सङ्क्रुद्धो भीमसेनः प्रतापवान् |
२७ क
विराट पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
तमन्वधावद्धावन्तं राजपुत्रं धनञ्जय़ः |
२७ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३३
वैशम्पाय़न उवाच
तमन्वधावन्नृपतिरेक एव युधिष्ठिरः |
१९ क
विराट पर्व
अध्याय
३८
वैशम्पाय़न उवाच
तमन्वशासच्छत्रुघ्नो रथे तिष्ठन्धनञ्जय़ः |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
तमन्विय़ाम भवतां प्रभावाद्रजनीचराः |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
तमन्वय़ात्सत्यधृतिः सौचित्तिर्युद्धदुर्मदः |
३४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८९
सञ्जय़ उवाच
तमन्वय़ात्सत्यधृतिः सौचित्तिर्युद्धदुर्मदः |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४
नारद उवाच
तमन्वय़ाद्रथी खड्गी भद्धगोधाङ्गुलित्रवान् |
१४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
तमन्वय़ान्महाराज स्वय़ं दुर्योधनो नृपः |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
तमन्वय़ान्महेष्वासो भारद्वाजः प्रतापवान् |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
तमन्वय़ुर्महाराज शिक्षाक्षरविदस्तथा |
३८ क
मौसल पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
तमन्वय़ुस्तत्र तत्र दुःखशोकसमाहताः |
२० क
वन पर्व
अध्याय
५३
वृहदश्व उवाच
तमपश्यंस्तथाय़ान्तं लोकपालाः सहेश्वराः |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२७
भीष्म उवाच
तमपश्यत्सुतपसमृषिं वै गौतमं मुनिम् ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
तमपश्यदथाय़ान्तं श्येनं श्येनस्तथापरः |
४५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५२
सञ्जय़ उवाच
तमपश्यद्धृषीकेशः पाण्डवानां हिते रतः |
४७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
तमपश्यन्महावाहुमहं विन्दामि कश्मलम् ||
३९ ग
मौसल पर्व
अध्याय
९
अर्जुन उवाच
तमपश्यन्विषीदामि घूर्णामीव च सत्तम |
२२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
तमपश्याम संनद्धं मेघं विद्युत्प्रभं यथा |
४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४
व्यास उवाच
तमपास्य च तद्राष्ट्रं तस्य पुत्रं सुवर्चसम् |
९ क