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द्रोण पर्व
अध्याय ११३
सञ्जय़ उवाच
तथैव कर्णनिर्मुक्तैः सविषैरिव पन्नगैः |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७२
व्यास उवाच
तथैव कर्मणः कृत्स्नं महतस्तपसोऽपि च |
८२ क
शल्य पर्व
अध्याय ५४
सञ्जय़ उवाच
तथैव कालस्य समौ मृत्योश्चैव परन्तपौ ||
२६ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
तथैव कुन्ती गान्धार्यां गुरुवृत्तिमवर्तत |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय ९७
सञ्जय़ उवाच
तथैव कुरवः सर्वे नाश्मय़ुद्धविशारदाः |
३१ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०४
सञ्जय़ उवाच
तथैव कुरवो राजन्भीष्मं कृत्वा महावलम् |
११ क
शल्य पर्व
अध्याय १५
सञ्जय़ उवाच
तथैव कुरुराजोऽपि प्रगृह्य रुचिरं धनुः |
३३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४५
सञ्जय़ उवाच
तथैव कृतवर्मा च कृपः शल्यश्च मारिष |
१९ क
शल्य पर्व
अध्याय २१
सञ्जय़ उवाच
तथैव कृतवर्मा तु शैनेय़ं शत्रुतापनम् |
२८ क
आदि पर्व
अध्याय १९७
विदुर उवाच
तथैव कृतिनौ युद्धे यमौ यमसुताविव |
१८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६२
सञ्जय़ उवाच
तथैव कृष्णं नवभिः समार्दय़; त्पुनश्च पार्थं दशभिः शिताग्रैः ||
५८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
तथैव कौरवे राजन्नवध्यन्त परे रणे ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
तथैव कौरवेय़ाणां भीमसेनो महावलः |
२४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४१
सञ्जय़ उवाच
तथैव कौरवो युद्धे शैनेय़ं युद्धदुर्मदम् |
३ क
स्त्री पर्व
अध्याय १
जनमेजय़ उवाच
तथैव कौरवो राजा धर्मपुत्रो महामनाः |
२ क
शल्य पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
तथैव क्रोधसंरक्तो भीमः परवलार्दनः |
६ क
सभा पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
तथैव क्षत्रिय़श्रेष्ठा धर्मराजमुपासते |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय १०२
वैशम्पाय़न उवाच
तथैव गजशिक्षाय़ां नीतिशास्त्रे च पारगाः ||
१७ ख
विराट पर्व
अध्याय ४८
वैशम्पाय़न उवाच
तथैव गत्वा वीभत्सुर्नाम विश्राव्य चात्मनः |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६८
भीष्म उवाच
तथैव गाः प्रशंसन्ति न च देय़ं ततः परम् |
६ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
तथैव गुल्मे सम्प्रेक्ष्य शय़ानान्मध्यगौल्मिकान् |
३८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३५३
भीष्म उवाच
तथैव च कथामेतां राजन्कथितवांस्तदा ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १७७
राम उवाच
तथैव च करिष्यामि यथा साम्नैव लप्स्यते ||
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
तथैव च चमूं सर्वां पाण्डवानां महारथः |
८६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
सञ्जय़ उवाच
तथैव च पुनः क्रुद्धो भारद्वाजः प्रतापवान् |
८४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
तथैव च मनुष्येषु ये मनुष्याः प्रधानतः |
१५६ क
वन पर्व
अध्याय ७७
वृहदश्व उवाच
तथैव च मम प्रीतिस्त्वय़ि वीर न संशय़ः ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७४
भीष्म उवाच
तथैव च महात्मानावश्विनौ भिषजां वरौ |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
तथैव च महाराज समेत्यान्योन्यमाहवे |
१९ क
शल्य पर्व
अध्याय ६१
सञ्जय़ उवाच
तथैव च महावाहो पर्याय़ैर्वहुभिर्मय़ा |
२९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९९
सञ्जय़ उवाच
तथैव च रथान्राजन्संममर्द रणे गजः |
३१ क
विराट पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
तथैव च विराटस्य सपुत्रस्य विशां पते ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१२
भीष्म उवाच
तथैव च शुकस्तत्र निर्मन्युः समतिष्ठत ||
२७ ख
आदि पर्व
अध्याय ५८
वैशम्पाय़न उवाच
तथैव च समानीय़ गन्धर्वाप्सरसां गणान् |
४७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०५
याज्ञवल्क्य उवाच
तथैव च सहस्रांशुं सप्तरात्रेण मृत्युभाक् ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
तथैव चम्पकाशोकान्केतकान्वकुलांस्तथा ||
४४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९६
सञ्जय़ उवाच
तथैव चरतस्तस्य सौभद्रस्य महात्मनः |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४
सञ्जय़ उवाच
तथैव चरतो मार्गान्मण्डलानि च भागशः |
१४ क
शल्य पर्व
अध्याय ११
सञ्जय़ उवाच
तथैव चरतो मार्गान्मण्डलेषु महात्मनः |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १००
पृथिव्यु उवाच
तथैव चानुपूर्व्येण वलिकर्म प्रय़ोजय़ेत् ||
१० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५१
वैशम्पाय़न उवाच
तथैव चानुय़ात्राणि चोदय़ामास पाण्डवः |
२ क
वन पर्व
अध्याय १५९
वैश्रवण उवाच
तथैव चान्नपानानि स्वादूनि च वहूनि च |
१४ क
वन पर्व
अध्याय १७४
वैशम्पाय़न उवाच
तथैव चान्यानि महावनानि; मृगद्विजानेकपसेवितानि |
४ क
कर्ण पर्व
अध्याय १
जनमेजय़ उवाच
तथैव चान्यान्सुहृदः पुत्रपौत्रांश्च पातितान् |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २०२
भीष्म उवाच
तथैव चान्ये वहवो दानवा युद्धदुर्मदाः |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय १०४
भीष्म उवाच
तथैव चान्यै रतिशास्त्रवेदिभिः; स्वलङ्कृतैः शास्त्रविधानदृष्टिभिः |
४३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
तथैव चापनिर्घोषं चक्रतुस्तौ महारथौ ||
५५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
तथैव चाभिगम्यैनमुवाच स नराधिपः |
३५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६५
कृप उवाच
तथैव चार्जुनो वाहादवरुह्यैनमाद्रवत् ||
१२१ ख
विराट पर्व
अध्याय ४
धौम्य उवाच
तथैव चावमन्यन्ते मन्त्रिणं वादिनं मृषा ||
१३ ख