भीष्म पर्व
अध्याय
६२
भीष्म उवाच
नरनाराय़णौ देवौ नान्यो द्विष्याद्धि मानवः ||
३१ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
नरनाराय़णौ देवौ पूर्वदेवाविति श्रुतिः |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय
१७
सूत उवाच
नरनाराय़णौ देवौ समाजग्मतुराहवम् ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३१
जनमेजय़ उवाच
नरनाराय़णौ द्रष्टुं किं नु तत्कारणं मुने ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
नरनाराय़णौ द्रष्टुं प्राद्रवद्वदराश्रमम् ||
९९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३०
श्रीभगवानु उवाच
नरनाराय़णौ पूर्वं तपस्तेपतुरव्ययम् |
४१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९४
राम उवाच
नरनाराय़णौ यौ तौ तावेवार्जुनकेशवौ |
४२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६२
भीष्म उवाच
नरनाराय़णौ यौ तौ पुराणावृषिसत्तमौ |
११ क
वन पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
नरनाराय़णौ यौ तौ पुराणावृषिसत्तमौ |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
नरनाराय़णौ व्रह्मा मनुः स्थाणुश्च पञ्चमः ||
४३ ग
सभा पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
नरनाराय़णौ व्रह्मा यमः स्थाणुश्च पञ्चमः |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२११
भीष्म उवाच
नरपतिरभिवीक्ष्य विस्मितः; पुनरनुय़ोक्तुमिदं प्रचक्रमे ||
४८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
नरमीनामश्वनक्रां केशशैवलशाद्वलाम् ||
३९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३
व्यास उवाच
नरमेधं च नृपते त्वमाहर युधिष्ठिर ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
नरमेधस्य यत्पुण्यं तत्प्राप्नोति कुरूद्वह ||
१३४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७३
सञ्जय़ उवाच
नरवीरप्रमुदितैः शोणैरश्वैर्महाजवैः ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
६७
दमय़न्त्यु उवाच
नरवीरस्य वै तस्य नलस्यानय़ने यत ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७३
धृतराष्ट्र उवाच
नरव्याघ्रः शिनेः पौत्रे द्रोणः किमकरोद्युधि ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
नरशीर्षकपालैश्च शङ्खैरिव समाचितम् ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८९
भीष्म उवाच
नरश्चेत्कृषिगोरक्ष्यं वाणिज्यं चाप्यनुष्ठितः |
२४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१४
वैशम्पाय़न उवाच
नरसिंहः पिता तेऽद्य पाञ्चाल्येन निपातितः ||
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५७
वासुदेव उवाच
नरसिंहौ प्रशंसन्तौ विप्रजग्मुर्यथागतम् ||
५९ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२३
गान्धार्यु उवाच
नरसूर्योऽस्तमभ्येति सूर्योऽस्तमिव केशव ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७
सूत उवाच
नरस्ततो वरकनकाग्रभूषणै; र्महेषुभिर्गगनपथं समावृणोत् |
२७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६३
नारद उवाच
नरस्तरति दुर्गाणि क्षुरधारांश्च पर्वतान् ||
८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३८
व्रह्मो उवाच
नरस्तु यो वेद गुणानिमान्सदा; गुणान्स भुङ्क्ते न गुणैः स भुज्यते ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
४१
भगवानु उवाच
नरस्त्वं पूर्वदेहे वै नाराय़णसहाय़वान् |
१ क
वन पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
नरस्त्वमसि दुर्धर्ष हरिर्नाराय़णो ह्यहम् |
३९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७३
युधिष्ठिर उवाच
नरस्य का प्रतिष्ठा स्यादेतत्पृष्टो वदस्व मे ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६४
सञ्जय़ उवाच
नरस्य च यथातत्त्वं यन्मां त्वं परिपृच्छसि |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
नरस्याश्वस्य नागस्य समसज्जत शोणितम् |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२९
सञ्जय़ उवाच
नरस्याश्वस्य नागस्य समसज्जत शोणितम् |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५२
वैशम्पाय़न उवाच
नरहस्तिरथाश्वानां सारं मध्यं च फल्गु च |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५२
वैशम्पाय़न उवाच
नरा दश हय़स्यासन्पादरक्षाः समन्ततः ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय
१८९
मार्कण्डेय़ उवाच
नरा दानेषु निरता व्रतेषु निय़मेषु च |
११ क
सभा पर्व
अध्याय
८
नारद उवाच
नरा दुष्कृतकर्माणो दक्षिणाय़नमृत्यवः ||
२८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
नरा नरवरैः पेतुरश्वाश्चाश्वैः सहस्रशः ||
३२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८९
सञ्जय़ उवाच
नरा नरान्समासाद्य क्रोधरक्तेक्षणा भृशम् |
३० क
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
नरा नरैः समाजग्मुर्वारणा वरवारणैः |
४६ क
शल्य पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
नरा रथा गजौघाश्च सादिनश्च सहस्रशः |
२ क
शल्य पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
नरा विनिहताः सर्वे गजाश्च विनिपातिताः |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०९
भीष्म उवाच
नरां कदने रुधिरपा गुरुवचन; नुदमुपरतं विशसन्ति ||
२८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
नरांश्च कार्ष्णाय़सवर्मभूषणा; न्निपात्य साश्वानपि पत्तिभिः सह |
८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
नरांश्च नागांश्च रथान्हय़ान्ममृदुराहवे |
३४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३३
उमो उवाच
नराः क्लीवाश्च दृश्यन्ते कारणं व्रूहि तत्र वै ||
४५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
वृहस्पतिरु उवाच
नराः पापसमाचारा लोभमोहसमन्विताः ||
१०८ ख
मौसल पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
नराः शासनमाज्ञाय़ तस्य राज्ञो महात्मनः ||
२० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११३
सञ्जय़ उवाच
नराणां च महाय़ुद्धे सहस्राणि चतुर्दश ||
२२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८९
सञ्जय़ उवाच
नराणां चैव काय़ेभ्यः शिरसां पततां रणे |
२६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५२
वैशम्पाय़न उवाच
नराणां पञ्चपञ्चाशदेषा पत्तिर्विधीय़ते |
२४ क