chevron_left  इत्युक्तःarrow_drop_down
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८१
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तः स्थापय़ामास तस्योरसि मणिं तदा |
११ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५०
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तवचनं कृष्णं प्रत्युवाच धनञ्जय़ः |
५० क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तवचनं तात नृपो राजानमव्रवीत् |
२३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५४
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तवचनं धीमान्महावुद्धिर्जनार्दनः |
२४ क
वन पर्व
अध्याय २६६
मार्कण्डेय़ उवाच
इत्युक्तवचनं रामं प्रत्युवाचानिलात्मजः |
३६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४२
व्राह्मणा ऊचुः
इत्युक्तवचनं वाय़ुमर्जुनः प्रत्यभाषत |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय ३०
सूत उवाच
इत्युक्तवचनं वीरं किरीटी श्रीमतां वरः |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४४
वासुदेव उवाच
इत्युक्तवचनस्तेन प्रद्युम्नेन तदा त्वहम् |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२१
भीष्म उवाच
इत्युक्तवचनां देवीमत्यर्थं तौ ननन्दतुः |
८४ क
स्त्री पर्व
अध्याय २०
गान्धार्यु उवाच
इत्युक्तवचनामेतामपकर्षन्ति दुःखिताम् |
२७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५२
वासुदेव उवाच
इत्युक्तवचने कृष्णे भृशं क्रोधसमन्वितः |
१९ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४३
सूत उवाच
इत्युक्तवचने तस्मिन्नृपे व्यासः प्रतापवान् |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६५
भीष्म उवाच
इत्युक्तवचने तस्मिन्राक्षसेन्द्रे महात्मनि |
२० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९१
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तवति तस्मिंस्ते भ्रातरो द्रौपदी च सा |
१४ क
स्त्री पर्व
अध्याय २५
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तवति दाशार्हे पाण्डवास्त्रस्तचेतसः |
४६ क
सभा पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तवति धर्मज्ञे धर्मराजे युधिष्ठिरे |
५ क
सभा पर्व
अध्याय ६८
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तवति पार्थे तु श्रीमान्माद्रवतीसुतः |
३७ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६१
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तवति भीष्मे तु तूष्णीम्भूते युधिष्ठिरः |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४७
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तवति वाक्यं तु कृष्णे देवकिनन्दने |
१ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तवत्यां गान्धार्यां कुन्ती व्रतकृशानना |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०६
भीष्म उवाच
इत्युक्तवन्तं तं व्रह्मा राजानं स्म भगीरथम् |
४२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४८
गुरुरु उवाच
इत्युक्तवन्तं ते विप्रास्तदा लोकपितामहम् |
१३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६२
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तवाक्ये नृपतौ तदा कुरुकुलोद्वह |
१० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९३
श्वशुर उवाच
इत्युक्तवाक्यो धर्मेण यानमारुह्य स द्विजः |
८२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
इत्युक्तवानधर्मज्ञस्तदा परमदुर्मतिः |
८० क
सौप्तिक पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तवान्गुरुः पुत्रं द्रोणः पश्चादथोक्तवान् |
९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८५
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तस्तदनादृत्य वाक्यमज्ञानमोहितः |
१० क
शल्य पर्व
अध्याय ५०
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तस्तर्पय़ामास स पितॄन्देवतास्तथा |
३८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७७
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तस्तस्य पितरं स पप्रच्छार्जुनस्तदा |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २४
व्यास उवाच
इत्युक्तस्तस्य वचनात्सुद्युम्नं वसुधाधिपम् |
११ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तस्तामुत्तङ्कस्तु भर्तुर्वाक्यमथाव्रवीत् |
३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५४
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तस्तेन स मुनिस्तत्तोय़ं नाभ्यनन्दत |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३६
भीष्म उवाच
इत्युक्तस्त्वरता तेन मतिमान्पलितोऽव्रवीत् |
८७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४१
भीष्म उवाच
इत्युक्तस्त्वर्जुनस्तूष्णीमभूद्वाय़ुस्तमव्रवीत् |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४१
भीष्म उवाच
इत्युक्तस्त्वर्जुनस्तूष्णीमभूद्वाय़ुस्तमव्रवीत् |
१५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५६
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तस्त्वव्रवीद्राजा तमुत्तङ्कं पुनर्वचः |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय ९१
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्ता तान्वसून्गङ्गा तथेत्युक्त्वाव्रवीदिदम् |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २
भीष्म उवाच
इत्युक्ता तेन विप्रेण राजपुत्री यशस्विनी |
५० क
वन पर्व
अध्याय २६५
मार्कण्डेय़ उवाच
इत्युक्ता तेन वैदेही परिवृत्य शुभानना |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १५
शल्य उवाच
इत्युक्ता देवराजेन पत्नी सा कमलेक्षणा |
५ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्ता धर्मराजेन वाष्पव्याकुललोचना |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६६
भीष्म उवाच
इत्युक्ता राक्षसेन्द्रेण राक्षसा घोरविक्रमाः |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ३८
भीष्म उवाच
इत्युक्ता सा कृतमतिरभवच्चारुहासिनी |
१० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९३
नकुल उवाच
इत्युक्ता सा ततः प्राह धर्मार्थौ नौ समौ द्विज |
२३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १५४
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्ता सा तु कृष्णेन व्यासेन च सरिद्वरा |
३३ क
आदि पर्व
अध्याय ४३
सूत उवाच
इत्युक्ता सानवद्याङ्गी प्रत्युवाच पतिं तदा |
३० क
शल्य पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्ता सापचत्तानि व्राह्मणप्रिय़काम्यया |
३५ क
वन पर्व
अध्याय २५१
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्ता सिन्धुराजेन वाक्यं हृदय़कम्पनम् |
१९ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २४
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्ता सौवलेय़ी तु राज्ञा कुन्तीमुवाच ह |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय १४९
भीष्म उवाच
इत्युक्ताः संन्यवर्तन्त शोकार्ताः पुत्रवत्सलाः |
६५ क