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द्रोण पर्व
अध्याय १७३
व्यास उवाच
शतधा सहस्रधा चैव तथा शतसहस्रधा ||
६९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४५
वासुदेव उवाच
शतधा सहस्रधा चैव तथा शतसहस्रधा ||
४० ख
वन पर्व
अध्याय २७५
व्रह्मो उवाच
शतधास्य फलेद्देह इत्युक्तः सोऽभवत्पुरा ||
३३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५३
भीष्म उवाच
शतपाकेन तैलेन महार्हेणोपतस्थतुः ||
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
शतमप्सरसश्चैव दिव्यमाल्यविभूषिताः |
८५ क
वन पर्व
अध्याय २२२
वैशम्पाय़न उवाच
शतमश्वसहस्राणि दश नागाय़ुतानि च |
४८ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३५
सुधन्वो उवाच
शतमश्वानृते हन्ति सहस्रं पुरुषानृते ||
२६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८४
धृतराष्ट्र उवाच
शतमस्मै प्रदास्यामि दासानामपि तावतः ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
शतमाय़स्तु शकुनिः सहदेवं समाद्रवत् |
२१ क
कर्ण पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
शतमेकं च पातानां त्वं काक पतिता ध्रुवम् |
२८ क
कर्ण पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
शतमेकं च पातानां पतितास्मि न संशय़ः |
२३ क
कर्ण पर्व
अध्याय २८
हंस उवाच
शतमेकं च पातानां यत्प्रभाषसि वाय़स |
४८ क
आदि पर्व
अध्याय ११९
वैशम्पाय़न उवाच
शतमेकोत्तरं तेषां कुमाराणां महौजसाम् |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय १०७
वैशम्पाय़न उवाच
शतमेकोनमप्यस्तु पुत्राणां ते महीपते |
३१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०५
धृतराष्ट्र उवाच
शतवर्षजीवी यश्च शूरो मनुष्यो; वेदाध्याय़ी यश्च यज्वाप्रमत्तः |
३९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५५
उत्तङ्क उवाच
शतवर्षोषितं हि त्वं न मामभ्यनुजानथाः ||
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २६
सञ्जय़ उवाच
शतशः पाणय़श्छिन्नाः सेषुज्यातलकार्मुकाः |
२१ क
उद्योग पर्व
अध्याय १२०
नारद उवाच
शतशः पुण्डरीका मे गोसवाश्च चिताः प्रभो |
१३ क
वन पर्व
अध्याय २७४
मातलिरु उवाच
शतशः पुरुषव्याघ्र रथोदारेण जघ्निवान् ||
१३ ग
द्रोण पर्व
अध्याय १०१
सञ्जय़ उवाच
शतशः शेरते भूमौ निकृत्ता गोवृषा इव |
७३ क
सभा पर्व
अध्याय ४८
दुर्योधन उवाच
शतशश्च कुथांस्तत्र सिंहलाः समुपाहरन् ||
३० ख
विराट पर्व
अध्याय ३०
वैशम्पाय़न उवाच
शतशश्च तनुत्राणि यथास्वानि महारथाः |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १००
सञ्जय़ उवाच
शतशश्चापरान्योधान्सद्विपांश्च रथान्रणे |
३१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२८
सञ्जय़ उवाच
शतशश्चापरान्योधान्सद्विपाश्वरथान्रणे |
२५ क
वन पर्व
अध्याय १५८
वैशम्पाय़न उवाच
शतशश्चापि गन्धर्वास्तथैवाप्सरसां गणाः |
३७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १०१
नारद उवाच
शतशीर्षास्तथा केचित्केचित्त्रिशिरसोऽपि च ||
६ ख
सभा पर्व
अध्याय ७०
वैशम्पाय़न उवाच
शतशृङ्गान्मृते पाण्डौ नागमिष्यं गजाह्वय़म् ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय ११०
वैशम्पाय़न उवाच
शतशृङ्गे महाराज तापसः समपद्यत ||
४५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२२
सञ्जय़ उवाच
शतशो निहताः शूराः सात्वतेनार्जुनेन च ||
८७ ख
वन पर्व
अध्याय २७१
मार्कण्डेय़ उवाच
शतशो नैरृतान्वन्या जघ्नुर्वन्यांश्च नैरृताः |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९५
सञ्जय़ उवाच
शतशो न्यपतंस्तत्र व्यसवो वसुधातले ||
३६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
शतशो यानपाश्रित्य धर्मराजो व्यवस्थितः ||
४५ ख
आदि पर्व
अध्याय १७७
धृष्टद्युम्न उवाच
शतसङ्ख्या महात्मानः प्रथिताः क्षत्रिय़र्षभाः ||
४ ग
उद्योग पर्व
अध्याय १८०
भीष्म उवाच
शतसङ्ख्यैः शरैः क्रुद्धस्तदा राममवाकिरम् ||
३४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९४
भीष्म उवाच
शतसाहस्रघातीनि हन्यां मासेन भारत ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय ८२
पुलस्त्य उवाच
शतसाहस्रिकं तत्र तीर्थं भरतसत्तम |
६७ क
विराट पर्व
अध्याय ३०
वैशम्पाय़न उवाच
शतसूर्यं शतावर्तं शतविन्दु शताक्षिमत् |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१८
नारद उवाच
शतस्य सहजातस्य सप्तमीं दशमीं दशाम् |
२८ क
विराट पर्व
अध्याय ५६
वैशम्पाय़न उवाच
शतह्रदामिवाय़ान्तीं स्तनय़ित्नोरिवाम्वरे ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय १७९
वैशम्पाय़न उवाच
शताङ्गानि च तूर्याणि वादकाश्चाप्यवादय़न् |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९
वैशम्पाय़न उवाच
शताद्विशिष्टं यं युद्धे समपश्यन्त वृष्णय़ः |
५० क
सभा पर्व
अध्याय ४८
दुर्योधन उवाच
शतानि चत्वार्यददद्धय़ानां वातरंहसाम् ||
२२ ख
विराट पर्व
अध्याय ३२
वैशम्पाय़न उवाच
शतानि त्रीणि शूराणां सहदेवः प्रतापवान् |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय ९८
भीष्म उवाच
शतानि दश वाहूनां निकृत्तान्यर्जुनस्य वै ||
१ ग
उद्योग पर्व
अध्याय ५९
वैशम्पाय़न उवाच
शतानि पञ्च चैवेषूनुद्वपन्निव दृश्यते |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७२
भीष्म उवाच
शतानि विस्तरेणाथ त्रीण्येवाभ्यधिकानि तु ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
वासुदेव उवाच
शतानि सप्त चैवाहं वाय़ुभक्षस्तदाभवम् ||
८७ ग
विराट पर्व
अध्याय ३८
उत्तर उवाच
शतानि सप्त तिष्ठन्ति नाराचा रुधिराशनाः ||
२८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३९
सञ्जय़ उवाच
शतानीकं च नवभिर्धर्मपुत्रं च सप्तभिः ||
१५ ग
भीष्म पर्व
अध्याय ११३
सञ्जय़ उवाच
शतानीकं च समरे हत्वा भीष्मः प्रतापवान् |
२५ क