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शान्ति पर्व
अध्याय २१४
भीष्म उवाच
वेदोक्तेषु च भुञ्जाना व्रतलुप्ता युधिष्ठिर ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९३
भीष्म उवाच
वेदोक्तेषु तु भुञ्जाना व्रतलुप्ता युधिष्ठिर ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय २०५
व्याध उवाच
वेदोच्चारणकार्यार्थमय़ुक्तं तत्त्वय़ा कृतम् ||
७ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय ८३
युधिष्ठिर उवाच
वेदोपनिषदे चैव सर्वकर्मसु दक्षिणा |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६१
वैशम्पाय़न उवाच
वेदोपवादेष्वपरे युक्ताः स्वाध्याय़पारगाः |
३० क
उद्योग पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
वेदोऽधीतश्चरितं व्रह्मचर्यं; यज्ञैरिष्टं व्राह्मणेभ्यश्च दत्तम् |
७ क
आदि पर्व
अध्याय ७७
यय़ातिरु उवाच
वेद्मि त्वां शीलसम्पन्नां दैत्यकन्यामनिन्दिताम् |
१४ क
सभा पर्व
अध्याय २८
वैशम्पाय़न उवाच
वेद्मि सर्वमभिप्राय़ं तव धर्मसुतस्य च ||
३३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४३
भीष्म उवाच
वेद्यं च यद्वेदय़ते च वेदा; न्विधिश्च यश्चाश्रय़ते विधेय़ान् |
३४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३१
श्रीभगवानु उवाच
वेद्यं पवित्रमोङ्कार ऋक्साम यजुरेव च ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय १७७
सर्प उवाच
वेद्यं यच्चात्थ निर्दुःखमसुखं च नराधिप |
१९ क
वन पर्व
अध्याय १७७
युधिष्ठिर उवाच
वेद्यं यद्व्राह्मणेनेह तद्भवान्वेत्ति केवलम् |
१४ क
वन पर्व
अध्याय १७७
युधिष्ठिर उवाच
वेद्यं सर्प परं व्रह्म निर्दुःखमसुखं च यत् |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
वेद्यावेद्यं तथा राजन्नचलं चलमेव च |
२९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
वेद्यो वैद्यः सदाय़ोगी वीरहा माधवो मधुः |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
व्यास उवाच
वेदय़ज्ञाधिपतय़े वेदाङ्गपतय़ेऽपि च ||
९२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९५
सञ्जय़ उवाच
वेदय़न्त्यो महाराज महद्वैशसमागतम् ||
४६ ग
भीष्म पर्व
अध्याय १०८
सञ्जय़ उवाच
वेदय़ानो भय़ं घोरं राज्ञां देहावकर्तनम् ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
वेदय़ोगं सविज्ञानं धर्मोऽर्थः काम एव च ||
४६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
वेधः पातश्च लक्षश्च योगश्चैव तवार्जुन |
५३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
वेधाः स्वाङ्गोऽजितः कृष्णो दृढः सङ्कर्षणोऽच्युतः |
७२ क
आदि पर्व
अध्याय ७०
वैशम्पाय़न उवाच
वेनं धृष्णुं नरिष्यन्तं नाभागेक्ष्वाकुमेव च |
१३ क
कर्ण पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
वेपथुं च शरीरे मे रोमहर्षं च पश्य वै |
५६ क
भीष्म पर्व
अध्याय २३
सञ्जय़ उवाच
वेपथुश्च शरीरे मे रोमहर्षश्च जाय़ते ||
२९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७६
वैशम्पाय़न उवाच
वेपथुश्चाभवद्राजन्कैलासस्य महागिरेः ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय १२०
वैशम्पाय़न उवाच
वेपथुश्चास्य तां दृष्ट्वा शरीरे समजाय़त ||
९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
वेपमान इव क्रोधाद्युद्धशौण्डः परन्तपः |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०८
सञ्जय़ उवाच
वेपमान इव क्रोधाद्व्यादिदेशाथ दुर्जय़म् ||
३४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८१
वैशम्पाय़न उवाच
वेपमानश्च कौन्तेय़ः प्राक्रोशन्महतो रवान् |
५५ क
शल्य पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
वेपमानस्ततो राज्ञः प्रविवेश निवेशनम् ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय १७२
वैशम्पाय़न उवाच
वेपमानाः प्राञ्जलय़स्ते सर्वे पिहिताननाः |
११ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
वेपमानान्क्षितौ भीतान्नैव कांश्चिदमुञ्चताम् ||
१०१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५३
भीष्म उवाच
वेपमानौ विराहारौ पञ्चाशद्रात्रकर्शितौ |
४२ क
आदि पर्व
अध्याय १९
सूत उवाच
वेलादोलानिलचलं क्षोभोद्वेगसमुत्थितम् |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७४
सञ्जय़ उवाच
वेलाभूतस्तदा पार्थः पत्रिभिः समवारय़त् ||
५३ ख
आदि पर्व
अध्याय २१८
वैशम्पाय़न उवाच
वेलामिव समासाद्य व्यातिष्ठन्त महौजसः ||
२७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ३
व्यास उवाच
वेलामुद्वर्तय़न्ति स्म क्षोभय़न्तः पुनः पुनः ||
३६ ख
वन पर्व
अध्याय २६७
मार्कण्डेय़ उवाच
वेलावनं समासाद्य निवासमकरोत्तदा ||
२२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९
भीष्म उवाच
वेलाय़ां न तु कस्याञ्चिद्गच्छेद्विप्रो ह्यपूजितः ||
२४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १५
धृतराष्ट्र उवाच
वेलेव मकरावासं के वीराः पर्यवारय़न् ||
२८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
वेलेव सागरं क्षुव्धं मद्रराट्समवारय़त् ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६९
भीष्म उवाच
वेशेषु चत्वरे चैव सभास्वावसथेषु च ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय १३२
वैशम्पाय़न उवाच
वेश्मन्येवं कृते तत्र कृत्वा तान्परमार्चितान् |
१३ क
वन पर्व
अध्याय १७३
वैशम्पाय़न उवाच
वेश्मानि तान्यप्रतिमानि पश्य; न्क्रीडाश्च नानाद्रुमसंनिकर्षाः |
३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६९
वैशम्पाय़न उवाच
वेश्मानि समलञ्चक्रुः पौराश्चापि जनाधिप ||
१४ ख
सभा पर्व
अध्याय ७
नारद उवाच
वेश्मासनवती रम्या दिव्यपादपशोभिता ||
३ ख
सभा पर्व
अध्याय ९
नारद उवाच
वेश्मासनवती रम्या सिता वरुणपालिता ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय ११०
लोमश उवाच
वेश्याः सर्वत्र निष्णातास्ता उवाच स पार्थिवः ||
३० ख
आदि पर्व
अध्याय २०४
नारद उवाच
वेषमाक्षिप्तमाधाय़ रक्तेनैकेन वाससा ||
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५३
भीष्म उवाच
वेसवारविकारांश्च पानकानि लघूनि च ||
१६ ख