उद्योग पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
सहस्राणां सहस्रं तु योधानां प्राप्य भारत |
२० क
वन पर्व
अध्याय
२३४
वैशम्पाय़न उवाच
सहस्राणां सहस्रं स प्राहिणोद्यमसादनम् |
७ क
आदि पर्व
अध्याय
२४
विनतो उवाच
सहस्राणामनेकानां तान्भुक्त्वामृतमानय़ ||
२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
सहस्राणि च योधानां त्वामेव पुरुषर्षभ |
३० क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१०
वैशम्पाय़न उवाच
सहस्राणि निकृन्तद्भिर्निःशेषं ते वलं कृतम् ||
४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११३
सञ्जय़ उवाच
सहस्राणि महाराज राज्ञां भल्लैर्न्यपातय़त् ||
२५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५
कृष्ण उवाच
सहस्राणि मुनीनां च अय़ुतान्यर्वुदानि च |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय
५२
सूत उवाच
सहस्राणि वहून्यस्मिन्प्रय़ुतान्यर्वुदानि च |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
सहस्रानुचरान्सौरानष्टौ दशशतानि च ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
१८६
मार्कण्डेय़ उवाच
सहस्रान्ते नराः सर्वे प्राय़शोऽनृतवादिनः ||
२४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
सहस्रार्चिः सप्तजिह्वः सप्तैधाः सप्तवाहनः |
१०२ क
वन पर्व
अध्याय
२७४
मातलिरु उवाच
सहस्राय़ुतशो रामे शस्त्राणि विविधानि च ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७५
समङ्ग उवाच
सहस्रिणश्च जीवन्ति जीवन्ति शतिनस्तथा |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३९
विदुर उवाच
सहस्रिणोऽपि जीवन्ति जीवन्ति शतिनस्तथा |
६८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४९
व्रह्मो उवाच
सहस्रेणापि दुर्मेधा न वृद्धिमधिगच्छति |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९०
भीष्म उवाच
सहस्रेषु नरः कश्चिन्मोक्षवुद्धिं समाश्रितः |
३९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
सहस्रैः पञ्चभिस्तात यदुक्तं वाहुदन्तकम् ||
८९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२०
स्त्र्यु उवाच
सहस्रैका यता नारी प्राप्नोतीह कदाचन |
६५ क
वन पर्व
अध्याय
१९५
मार्कण्डेय़ उवाच
सहस्रैरेकविंशत्या पुत्राणामरिमर्दनः |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
सहस्रोदरवाहुश्च अव्यक्त इति च क्वचित् |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५९
सञ्जय़ उवाच
सहस्रय़ामप्रतिमा वभूव प्राणहारिणी |
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२४
भीष्म उवाच
सहस्रय़ुगपर्यन्तमहर्यद्व्रह्मणो विदुः |
३० क
भीष्म पर्व
अध्याय
३०
श्रीभगवानु उवाच
सहस्रय़ुगपर्यन्तमहर्यद्व्रह्मणो विदुः |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१०५
मुनिरु उवाच
सहस्व श्रिय़मन्येषां यद्यपि त्वय़ि नास्ति सा |
३३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
सहाक्रूरप्रभृतिभिर्गदसाम्वोल्मुकादिभिः |
१६ क
विराट पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
सहाद्यानेन दह्येत तदनुज्ञातुमर्हसि ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८१
सञ्जय़ उवाच
सहानीकं ततो द्रोणो न्यवारय़त वीर्यवान् ||
११ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
सहानीकान्महावाहुरेक एवाभ्यवारय़त् ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय
२०१
नारद उवाच
सहान्योन्येन भुञ्जाते विनान्योन्यं न गच्छतः ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय
२३५
वैशम्पाय़न उवाच
सहाप्सरोभिः संहृष्टाश्चित्रसेनमुखा यय़ुः ||
१६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३३
महेश्वर उवाच
सहाप्सरोभिर्मुदितो रमित्वा नन्दनादिषु ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय
८४
यय़ातिरु उवाच
सहाप्सरोभिर्विहरन्पुण्यगन्धा; न्पश्यन्नगान्पुष्पितांश्चारुरूपान् ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७३
भीष्म उवाच
सहामः सततं देव तथा छेदनभेदनम् ||
३७ ख
वन पर्व
अध्याय
४९
वैशम्पाय़न उवाच
सहामहे भवन्मूलं वासुदेवेन पालिताः ||
१० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
सहामात्यः कुशली पाण्डुपुत्रो; भूय़श्चातो यच्च तेऽग्रे मनोऽभूत् |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
सहामात्यः सहपुत्रश्च राज; न्समेत्य तां वाचमिमां निवोध ||
१० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
२२
धृतराष्ट्र उवाच
सहामात्यः सोमकानां प्रवर्हः; सन्त्यक्तात्मा पाण्डवानां जय़ाय़ ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
सहाम्वुपतिमित्राभ्यां यथेन्द्रस्तारकामय़े ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८१
भीष्म उवाच
सहार्थो भजमानश्च सहजः कृत्रिमस्तथा ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४१
सञ्जय़ उवाच
सहास्माभिर्निववृते राधेय़ो दीनमानसः ||
४८ ख
वन पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
सहास्माभिर्भवाञ्श्रान्तः पुराकल्पेषु नित्यशः ||
३२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७५
व्राह्मणा ऊचुः
सहास्माभिर्महात्मानः पुनः प्रतिनिवर्त्स्यथ ||
१७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१३६
वैशम्पाय़न उवाच
सहाय़ं वासुदेवं च न क्षंस्यति युधिष्ठिरः ||
५ ग
सभा पर्व
अध्याय
४४
शकुनिरु उवाच
सहाय़ः पृथिवीलाभे वासुदेवश्च वीर्यवान् ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
११३
भीष्म उवाच
सहाय़युक्तेन मही कृत्स्ना शक्या प्रशासितुम् ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय
२७६
मार्कण्डेय़ उवाच
सहाय़वति सर्वार्थाः सन्तिष्ठन्तीह सर्वशः |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३७
विदुर उवाच
सहाय़वन्धना ह्यर्थाः सहाय़ाश्चार्थवन्धनाः |
३४ क
विराट पर्व
अध्याय
४०
उत्तर उवाच
सहाय़वानस्मि रणे युध्येय़ममरैरपि |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५४
भीष्म उवाच
सहाय़वान्द्रव्यवान्यः सुभगोऽन्योऽपरस्तथा |
२७ क
वन पर्व
अध्याय
२
युधिष्ठिर उवाच
सहाय़विपरिभ्रंशस्त्वय़ं सादय़तीव माम् ||
७ ख