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द्रोण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
नार्हसे मान्यथा ज्ञातुं घटमानं तव प्रिय़े ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय १०९
मृग उवाच
नार्हस्त्वं सुरसङ्काश कर्तुमस्वर्ग्यमीदृशम् ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय २३८
वैशम्पाय़न उवाच
नार्हस्येवङ्गते मन्युं कर्तुं प्राकृतवद्यथा |
३७ क
सभा पर्व
अध्याय १६
कृष्ण उवाच
नार्हामि विषय़े राज्ञो वसन्ती पुत्रगृद्धिनः |
४६ क
वन पर्व
अध्याय २८१
मार्कण्डेय़ उवाच
नार्हो मत्पुरुषैर्नेतुमतोऽस्मि स्वय़मागतः ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४९
वासुदेव उवाच
नार्होऽसि भगवन्नद्य वक्तुमेवंविधं वचः |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ८८
भीष्म उवाच
नारय़ः प्रतिदास्यन्ति यद्धरेय़ुर्वलादितः ||
२८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३१
भीष्म उवाच
नालं गन्तुं च विश्वासं नास्तिके भय़शङ्किनि ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०४
याज्ञवल्क्य उवाच
नालं चालय़ितुं शक्यस्तथा युक्तस्य लक्षणम् ||
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय १७२
व्यास उवाच
नालं द्रष्टुं यमजं भिन्नवृत्ता; व्रह्मद्विषघ्नममृतस्य योनिम् ||
६१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
नालं लोका रणे जेतुं पाल्यमानं किरीटिना ||
१० ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय ५
कृप उवाच
नालं वेदय़ितुं कृत्स्नौ धर्मार्थाविति मे मतिः ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१६
नारद उवाच
नालं स दुःखमोक्षाय़ सङ्गो वै दुःखलक्षणम् ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय १७१
और्व उवाच
नालं स मनुजः सम्यक्त्रिवर्गं परिरक्षितुम् ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
नालं सुखाय़ सुहृदो नालं दुःखाय़ दुर्हृदः |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६८
व्राह्मण उवाच
नालं सुखाय़ सुहृदो नालं दुःखाय़ शत्रवः |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय १०७
सञ्जय़ उवाच
नालक्षय़ञ्जय़ं व्यक्तमेकैकस्य निवारणे ||
३० ख
द्रोण पर्व
अध्याय १७१
सञ्जय़ उवाच
नालक्षय़त तं कश्चिद्वारुणास्त्रेण संवृतम् |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
नालताडनविभ्रष्टं पलाशं नलिनादिव ||
४२ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५
सञ्जय़ उवाच
नालभञ्शर्म ते पुत्रा हिमवन्तमृते गिरिम् ||
४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०३
सञ्जय़ उवाच
नालभन्त तदा शान्तिं भृशं भीष्मेण पीडिताः ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय ५५
वैशम्पाय़न उवाच
नालभन्त महाराज ततो युद्धमवर्तत ||
४१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४९
युधिष्ठिर उवाच
नालभ्यं चोपलभ्येत नृणां भरतसत्तम ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८६
वैशम्पाय़न उवाच
नालमन्यमवज्ञातुमवज्ञातोऽपि केशवः ||
८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३९
विदुर उवाच
नालमेकस्य तत्सर्वमिति पश्यन्न मुह्यति ||
६९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४६
सञ्जय़ उवाच
नालमेष क्षय़ं कर्तुं परसैन्यस्य मारिष |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३८
भीष्म उवाच
नालसाः प्राप्नुवन्त्यर्थान्न क्लीवा न च मानिनः |
२३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४९
युधिष्ठिर उवाच
नालाभकाले लभते प्रय़त्नेऽपि कृते सति |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६२
सञ्जय़ उवाच
नालीकक्षुरनाराचैर्नखरैः शक्तितोमरैः |
४१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
नालीढय़ा परिहतं भक्षय़ीत कदाचन |
८२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
नालोपय़त धर्मात्मा भक्त्या प्रेम्णा च सर्वदा ||
३ ख
विराट पर्व
अध्याय १९
वैशम्पाय़न उवाच
नाल्पं कृतं मय़ा भीम देवानां किल्विषं पुरा |
२८ क
आदि पर्व
अध्याय १२१
वैशम्पाय़न उवाच
नाल्पधीर्नामहाभागस्तथानानास्त्रकोविदः |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२०
भीष्म उवाच
नाल्पमर्थं परिभवेन्नावमन्येत शात्रवान् |
३४ क
वन पर्व
अध्याय १९८
व्याध उवाच
नावं धृतिमय़ीं कृत्वा जन्मदुर्गाणि सन्तर ||
६७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०९
भीष्म उवाच
नावं धृतिमय़ीं कृत्वा जन्मदुर्गाणि सन्तर ||
१६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४९
व्रह्मो उवाच
नावं न शक्यमारुह्य स्थले विपरिवर्तितुम् |
३० क
सभा पर्व
अध्याय ५६
विदुर उवाच
नावं समुद्र इव वालनेत्रा; मारुह्य घोरे व्यसने निमज्जेत् ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय १६६
अर्जुन उवाच
नावः सहस्रशस्तत्र रत्नपूर्णाः समन्ततः ||
२ ग
शान्ति पर्व
अध्याय २०५
गुरुरु उवाच
नावगच्छन्त्यविज्ञानादात्मजं पार्थिवं गुणम् ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय १९७
स्त्र्यु उवाच
नावजानाम्यहं विप्रान्देवैस्तुल्यान्मनस्विनः |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ७८
राजो उवाच
नावजानाम्यहं वृद्धान्न वैद्यान्न तपस्विनः |
२३ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३७
विदुर उवाच
नावज्ञेय़ा मनुष्येण सर्वे ते ह्यतितेजसः ||
५५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६२
भीष्म उवाच
नावज्ञेय़ो महावीर्यः शङ्खचक्रगदाधरः ||
१४ ख
विराट पर्व
अध्याय २८
वैशम्पाय़न उवाच
नावज्ञेय़ो रिपुस्तात प्राकृतोऽपि वुभूषता |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६२
भीष्म उवाच
नावज्ञेय़ो वासुदेवो मानुषोऽय़मिति प्रभुः ||
१८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४५
सञ्जय़ उवाच
नावतिष्ठत सङ्ग्रामे ताड्यमाना समन्ततः ||
२४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४५
सञ्जय़ उवाच
नावतिष्ठत सा सेना वध्यमाना महात्मभिः ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
नावधीत्कृतवर्माणं प्राप्तमप्यरिसूदनः ||
३४ ख
आदि पर्व
अध्याय १०
सूत उवाच
नावधीद्भय़संविग्न ऋषिं मत्वाथ डुण्डुभम् ||
५ ख