chevron_left  सिंहनादरवांश्चोग्रांश्चक्रिरेarrow_drop_down
द्रोण पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादरवांश्चोग्रांश्चक्रिरे तत्र मारिष ||
२० ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४१
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादरवाश्चात्र प्रादुरासन्समागमे |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७६
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादरवाश्चासञ्शङ्खदुन्दुभिमिश्रिताः |
४० क
द्रोण पर्व
अध्याय १३५
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादरवाश्चासन्दध्मुः शङ्खांश्च मारिष |
४४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादरवो ह्यासीत्साधु साध्विति भाषताम् ||
२२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादश्च वीराणामभवद्दारुणस्तदा ||
२८ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय १
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादश्च शूराणां श्रूय़ते सुमहानय़म् ||
६१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादश्च सञ्जज्ञे दृष्ट्वा घोरं महाद्भुतम् ||
५५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादश्च सञ्जज्ञे पाण्डवानां महात्मनाम् |
१५ क
कर्ण पर्व
अध्याय ७
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादश्च सञ्जज्ञे शूराणां जय़गृद्धिनाम् ||
३६ ख
शल्य पर्व
अध्याय ११
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादश्च सञ्जज्ञे शूराणां हर्षवर्धनः ||
४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादश्च सञ्जज्ञे शूराणामनिवर्तिनाम् ||
८३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ११
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादश्च सञ्जज्ञे समेतानां दिवौकसाम् |
३२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादस्ततो घोरः पाण्डवानामजाय़त ||
६८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादांश्च कुर्वाणा विमिश्राञ्शङ्खनिस्वनैः ||
७६ ख
शल्य पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादांश्च वहुशः शृणु घोरान्भय़ानकान् |
३४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४१
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादांश्च विविधान्विनेदुः पुरुषर्षभाः ||
९८ ख
शल्य पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादांस्ततश्चक्रुः क्ष्वेडांश्च भरतर्षभ |
४७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४६
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादांस्तदा चक्रुस्तर्जय़न्तः स्म सात्यकिम् ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय २७४
मातलिरु उवाच
सिंहनादाः सपटहा दिवि दिव्याश्च नानदन् ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादान्भृशं चक्रुः शङ्खशव्दांश्च भारत ||
३८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादान्भृशं चक्रुः शङ्खान्दध्मुश्च हर्षिताः |
३७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८२
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादान्वहुविधांश्चक्रुः शङ्खविमिश्रितान् ||
२७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादाश्च पाण्डूनां प्रतिज्ञाते महात्मना ||
४३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५३
वैशम्पाय़न उवाच
सिंहनादाश्च विविधा वाहनानां च निस्वनाः |
२८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादाश्च सञ्जज्ञुर्भेरीणां च महास्वनाः ||
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादेन भीमस्य पाञ्चजन्यस्वनेन च |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६५
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादेन महता नरसिंहो धनञ्जय़ः |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८९
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादेन महता नेमिघोषेण चैव हि |
१६ क
वन पर्व
अध्याय २३०
वैशम्पाय़न उवाच
सिंहनादेन महता पूरय़न्तो दिशो दश ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२१
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादेन महता पूरय़ामास रोदसी ||
४२ ख
सभा पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
सिंहनादेन महता योधानां गर्जितेन च |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७०
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादेन महता व्यपोह्य सुमहद्भय़म् ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७४
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादेन महता सर्वतः पर्यवारय़न् ||
३४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३४
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादेन महता सर्वाः संनादय़न्दिशः ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादेन महता हर्षय़न्तस्तवात्मजम् ||
३२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादैः सवादित्रैः समाहूतैर्महारथैः ||
२७ ख
आदि पर्व
अध्याय ६३
वैशम्पाय़न उवाच
सिंहनादैश्च योधानां शङ्खदुन्दुभिनिस्वनैः |
३ क
शल्य पर्व
अध्याय ५४
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादैश्च शूराणां दिशः सर्वाः प्रपूरिताः ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १११
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादैश्च सैन्यानां दारुणः समपद्यत ||
३६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
सिंहनादो महानासीद्धतं मत्वा धनञ्जय़म् ||
१५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
सिंहप्रगर्जनो वीरः सिंहस्कन्धो महाद्युतिः ||
२२ ख
आदि पर्व
अध्याय १२६
वैशम्पाय़न उवाच
सिंहर्षभगजेन्द्राणां तुल्यवीर्यपराक्रमः |
४ क
वन पर्व
अध्याय १५७
वैशम्पाय़न उवाच
सिंहर्षभगतिः श्रीमानुदारः कनकप्रभः |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५९
वासुदेव उवाच
सिंहर्षभगतिः श्रीमान्द्विषतस्ते हनिष्यति ||
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२०
सञ्जय़ उवाच
सिंहलाङ्गूलकेतुस्तु दर्शय़ञ्शक्तिमात्मनः |
४६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८०
सञ्जय़ उवाच
सिंहलाङ्गूलमुग्रास्यं धजं वानरलक्षणम् |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
सिंहलाङ्गूललक्ष्माणं पितुरर्थे व्यवस्थितम् ||
३० ख
वन पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
सिंहलान्वर्वरान्म्लेच्छान्ये च जाङ्गलवासिनः ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०५
सञ्जय़ उवाच
सिंहवद्विनदन्नुच्चैर्धनुर्ज्यां विक्षिपन्मुहुः |
१२ क