chevron_left  अभवंश्चामृतस्पर्शाद्दर्भास्तेऽथarrow_drop_down
आदि पर्व
अध्याय ३०
सूत उवाच
अभवंश्चामृतस्पर्शाद्दर्भास्तेऽथ पवित्रिणः ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय २५८
मार्कण्डेय़ उवाच
अभवंस्तस्य चत्वारः पुत्रा धर्मार्थकोविदाः |
७ क
शल्य पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
अभवच्च तय़ोर्युद्धं तुमुलं रोमहर्षणम् |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७३
व्यास उवाच
अभवच्च पुनर्वाहुर्यथाप्रकृति वज्रिणः ||
६३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
उपमन्युरु उवाच
अभवच्छूलिनोऽभ्याशे दीप्तवह्निशिखोपमः ||
१३९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८६
भीष्म उवाच
अभवत्कार्त्तिकेय़ः स त्रैलोक्ये सचराचरे |
१४ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
अभवत्तव पुत्रस्य तत्सैन्यमिषुभिस्तदा |
७६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १७०
सञ्जय़ उवाच
अभवत्तस्य सैन्यस्य सुमहानद्भुतोपमः ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६६
सञ्जय़ उवाच
अभवत्तुमुलः शव्दः संस्पृशन्गगनं महत् ||
३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३३
सञ्जय़ उवाच
अभवत्तुमुलः शव्दो योधानां तत्र भारत |
४७ क
सभा पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
अभवत्तुमुलो नादः सर्वप्राणिभय़ङ्करः ||
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७८
सञ्जय़ उवाच
अभवत्तुमुलो नादो भय़ाद्दृष्ट्वा किरीटिनम् ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय १४३
वैशम्पाय़न उवाच
अभवत्तेन नामास्य घटोत्कच इति स्म ह ||
३४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २
भीष्म उवाच
अभवत्प्रीतिमानग्निर्गर्भं तस्यां समादधे ||
३५ ख
आदि पर्व
अध्याय १६३
गन्धर्व उवाच
अभवत्प्रेतराजस्य पुरं प्रेतैरिवावृतम् ||
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७१
सञ्जय़ उवाच
अभवत्संवृतं सर्वं न प्राज्ञाय़त किञ्चन ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७०
सञ्जय़ उवाच
अभवत्सर्वतो दीप्तं शुष्कं वनमिवाग्निना ||
३२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १००
सञ्जय़ उवाच
अभवत्सर्वसैन्यानामभावकरणो महान् ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२८
सञ्जय़ उवाच
अभवत्सर्वसैन्यानामभावकरणो महान् ||
१४ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३५
वैशम्पाय़न उवाच
अभवद्गौतमो नित्यं पिता धर्मरतः सदा ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय २०
सूत उवाच
अभवद्दुःखसन्तप्ता दासीभावं समास्थिता ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १७६
अम्वो उवाच
अभवद्धृदि सङ्कल्पो घातय़ेय़ं महाव्रतम् ||
४१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३११
भीष्म उवाच
अभवद्भगवान्व्यासो वने तस्मिन्युधिष्ठिर ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २६
सञ्जय़ उवाच
अभवद्भूय़सी वुद्धिः संशप्तकवधे स्थिरा ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
सञ्जय़ उवाच
अभवद्भैरवो नादो वध्यतां शरशक्तिभिः ||
६१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३६
भीष्म उवाच
अभवद्भय़सन्तप्तश्चक्रे चेमां परां गतिम् ||
३५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २७
सिद्ध उवाच
अभवद्या परा प्रीतिर्गङ्गाय़ाः पुलिने नृणाम् ||
५९ ख
आदि पर्व
अध्याय ९४
वैशम्पाय़न उवाच
अभवद्विस्मितो राजा कर्म दृष्ट्वातिमानुषम् ||
२५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४५
सञ्जय़ उवाच
अभवद्व्याकुलं भीतैः पुत्राणां ते महद्वलम् ||
२५ ख
शल्य पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
अभवन्नादिता भूमिर्निर्घातैरिव भारत ||
१५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३५
सञ्जय़ उवाच
अभवन्मे भय़ं तीव्रं कथमेतद्भविष्यति ||
५९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३५
सञ्जय़ उवाच
अभवन्मे मती राजन्नैषामस्तीति जीवितम् ||
५८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७३
भीष्म उवाच
अभवन्यानि लिङ्गानि शरीरे तानि मे शृणु ||
१ ख
शल्य पर्व
अध्याय ६१
सञ्जय़ उवाच
अभवन्विस्मिता राजन्नर्जुनश्चेदमव्रवीत् ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २४२
व्यास उवाच
अभवप्रतिपत्त्यर्थमेतद्वर्त्म विधीय़ते ||
२३ ख
आदि पर्व
अध्याय १२९
वैशम्पाय़न उवाच
अभविष्यः स्थिरो राज्ये यदि हि त्वं पुरा नृप |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९२
वसिष्ठ उवाच
अभवो भवमात्मानमभय़ो भय़मात्मनः |
४८ क
वन पर्व
अध्याय २६२
मार्कण्डेय़ उवाच
अभव्यो भव्यरूपेण भस्मच्छन्न इवानलः |
३० ख
आदि पर्व
अध्याय ११२
वैशम्पाय़न उवाच
अभाग्यया मय़ा नूनं विय़ुक्ताः सहचारिणः |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३१
सञ्जय़ उवाच
अभाग्यस्येव सङ्कल्पस्तन्मोघं न्यपतद्भुवि ||
४२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५०
सञ्जय़ उवाच
अभाग्यस्येव सङ्कल्पस्तन्मोघमपतद्भुवि ||
४४ ख
विराट पर्व
अध्याय १९
वैशम्पाय़न उवाच
अभाग्या यत्तु जीवामि मर्तव्ये सति पाण्डव ||
२८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९५
अरुन्धत्यु उवाच
अभाग्यावीरसूरस्तु विसस्तैन्यं करोति या ||
७१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ३
व्यास उवाच
अभावं हि विशेषेण कुरूणां प्रतिपश्यति |
१२ क
वन पर्व
अध्याय १८८
मार्कण्डेय़ उवाच
अभावः सर्वभूतानां युगान्ते च भविष्यति ||
७३ ग
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
अभावः सुमहान्राजन्कुरूनागादतन्द्रितः ||
१०५ ख
स्त्री पर्व
अध्याय ९
वैशम्पाय़न उवाच
अभावः स्यादय़ं प्राप्त इति भूतानि मेनिरे ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय ८५
अष्टक उवाच
अभावभूतः स विनाशमेत्य; केनात्मानं चेतय़ते पुरस्तात् ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६८
भीष्म उवाच
अभावमचिरेणैव गच्छेय़ुर्नात्र संशय़ः ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २४९
स्थाणुरु उवाच
अभावमभिगच्छेय़ुरुत्सन्नप्रजनाः प्रजाः |
११ क