भीष्म पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
ध्वजा वहुविधाकारा व्यदृश्यन्त समुच्छ्रिताः |
२९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
ध्वजा वहुविधाकारास्तावकानां नराधिप |
६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
ध्वजाः कणकणाय़न्ते वातेनाभिसमीरिताः |
५१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
ध्वजाः पताकाश्च ततः प्रपेतु; र्वज्राहतानीव गिरेः शिरांसि ||
६० ख
विराट पर्व
अध्याय
३८
वैशम्पाय़न उवाच
ध्वजाः शराश्च शूराणां दिव्यानि कवचानि च ||
५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
ध्वजाः शिरांसि च्छत्राणि द्विपहस्ता नृणां भुजाः |
३३ क
शल्य पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
ध्वजाग्रं चास्य समरे कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः |
५६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
ध्वजाग्रं दृश्यते त्वस्य ज्याशव्दश्चापि श्रूय़ते ||
५२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
ध्वजाग्रं समपश्याम वालसूर्यसमप्रभम् ||
१० ख
विराट पर्व
अध्याय
४३
कर्ण उवाच
ध्वजाग्रे वानरस्तिष्ठन्भल्लेन निहतो मय़ा |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
ध्वजाग्रेऽलोहितार्काभो हेमजालपरिष्कृतः ||
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२४
वैशम्पाय़न उवाच
ध्वजाङ्कुशपताकाङ्कं दक्षिणं ते सुदक्षिणः |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
ध्वजानां चर्मणां चैव व्यजनानां च सर्वशः |
३१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
ध्वजानां छिद्यमानानां कार्मुकाणां च संय़ुगे |
२३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
ध्वजानां धूय़मानानां सहसा मातरिश्वना |
४१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
ध्वजान्वहुविधाकाराञ्शृणु तेषां महात्मनाम् |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८०
धृतराष्ट्र उवाच
ध्वजान्वहुविधाकारान्भ्राजमानानतिश्रिय़ा |
१ क
सभा पर्व
अध्याय
७२
धृतराष्ट्र उवाच
ध्वजाश्च व्यवशीर्यन्त भरतानामभूतय़े ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२०
सञ्जय़ उवाच
ध्वजाश्छत्राणि चापानि चामराणि शिरांसि च ||
३५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
ध्वजिनीं धार्तराष्ट्राणां दीनशत्रुरदीनवत् |
६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
ध्वजिनो हेमचित्राङ्गा विचरन्तो रणाजिरे |
१३ क
सभा पर्व
अध्याय
२४
वैशम्पाय़न उवाच
ध्वजिन्या व्यजय़द्राजन्पुरं पौरवरक्षितम् ||
१४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३
सञ्जय़ उवाच
ध्वजिन्यां हतनेत्राय़ां यथेष्टं श्वेतवाहनः |
३५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
ध्वजिन्युत्सवसङ्केतास्त्रिगर्ताः सर्वसेनय़ः ||
५९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८३
वैशम्पाय़न उवाच
ध्वजे पताकादण्डेषु रथय़न्त्रे हय़ेषु च |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय
२१६
वैशम्पाय़न उवाच
ध्वजे भूतानि तत्रासन्विविधानि महान्ति च |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
ध्वजे वाचो रौद्ररूपा वदन्ति; कदा रथो योक्ष्यते ते किरीटिन् ||
९७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६३
सञ्जय़ उवाच
ध्वजे शरासने चैव शरावापे च भारत ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
ध्वजे हि तस्मिन्रूपाणि चक्रुस्ते देवमाय़या |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८०
भीष्म उवाच
ध्वजेन च महावाहो सोमालङ्कृतलक्ष्मणा |
८ क
विराट पर्व
अध्याय
४१
उत्तर उवाच
ध्वजेन पिहिताः सर्वा दिशो न प्रतिभान्ति मे |
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
ध्वजेन महता सङ्ख्ये कुरूणामृषभस्तदा ||
२७ ख
विराट पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
ध्वजेन सर्वानभिभूय़ शत्रू; न्स हेमजालेन विराजमानः ||
२८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
ध्वजेनादित्यवर्णेन प्रविवेश महाचमूम् ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
ध्वजेनोच्छ्रिततुण्डेन गृध्रराजेन राजता ||
२७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४२
सञ्जय़ उवाच
ध्वजेनोच्छ्रिततुण्डेन गृध्रराजेन राजता ||
३६ ख
विराट पर्व
अध्याय
४१
द्रोण उवाच
ध्वजेषु च निलीय़न्ते वाय़सास्तन्न शोभनम् |
२१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९३
भीष्म उवाच
ध्वजैः पताकाभिरलङ्कृतं च; भक्ष्यान्नपेय़ामिषदत्तहोमम् ||
३२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७३
सञ्जय़ उवाच
ध्वजैराभरणैश्चित्रैः कवचैश्च हिरण्मय़ैः ||
२५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
ध्वजैस्तत्रापविद्धैश्च कार्मुकैस्तोमरैस्तथा |
१८ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१०
वैशम्पाय़न उवाच
ध्वजोत्तमाग्रोच्छ्रितधूमकेतुं; शरार्चिषं कोपमहासमीरम् |
२० क
कर्ण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
ध्वजौ च दृष्ट्वा संसक्तौ विस्मय़ः समपद्यत |
७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
ध्वजय़ष्टिं च सहसा शिश्रिय़े कश्मलावृतः ||
७४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
ध्वस्ताकारं समालक्ष्य शिविरं परवीरहा |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४९
भीष्म उवाच
ध्वाङ्क्षाभ्रसमवर्णस्तु विलान्निःसृत्य जम्वुकः |
१४ क