भीष्म पर्व
अध्याय
३५
श्रीभगवानु उवाच
उपद्रष्टानुमन्ता च भर्ता भोक्ता महेश्वरः |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११५
सञ्जय़ उवाच
उपधानं कुरुश्रेष्ठ फल्गुनोपनय़स्व मे |
३९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११५
सञ्जय़ उवाच
उपधानं ततो दत्त्वा पितुस्तव जनेश्वर |
५७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११५
सञ्जय़ उवाच
उपधानानि मुख्यानि नैच्छत्तानि पितामहः ||
३३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११५
सञ्जय़ उवाच
उपधानेन दत्तेन प्रत्यनन्दद्धनञ्जय़म् |
४४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०९
भीष्म उवाच
उपधार्य मतं तेषां वृद्धानां धर्मदर्शिनाम् |
१२ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२३
गान्धार्यु उवाच
उपधाय़ोपधानाग्र्यं दत्तं गाण्डीवधन्वना ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९४
मन्त्रिणः ऊचुः
उपधिं शङ्कमानास्ते हित्वेमानि फलानि वै |
३७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४४
कर्ण उवाच
उपनह्य परैर्वैरं ये मां नित्यमुपासते |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०९
भीष्म उवाच
उपनिधिभिरसुखकृत्स परमनिरय़गो; भृशमसुखमनुभवति दुष्कृतकर्मा ||
३० ख
सभा पर्व
अध्याय
४७
दुर्योधन उवाच
उपनिन्युर्महाराज हय़ान्गान्धारदेशजान् ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय
३९
सूत उवाच
उपनिन्युस्तथा राज्ञे दर्भानापः फलानि च ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०६
भीष्म उवाच
उपनिषदमुपाकरोत्तदा वै; जनकनृपस्य पुरा हि याज्ञवल्क्यः |
१०८ क
सभा पर्व
अध्याय
२६
वैशम्पाय़न उवाच
उपनिष्क्रम्य नगरात्प्रत्यगृह्णात्परन्तपः ||
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११६
सञ्जय़ उवाच
उपनीतं च तद्दृष्ट्वा भीष्मः शान्तनवोऽव्रवीत् |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३१
महेश्वर उवाच
उपनीतो व्रतपरो द्विजो भवति सत्कृतः ||
३४ ख
सभा पर्व
अध्याय
३३
युधिष्ठिर उवाच
उपनीय़मानं युक्तं च तन्मे व्रूहि पितामह ||
२६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
उपन्यस्तमपन्यस्तं गदाय़ुद्धविशारदौ ||
१९ ग
वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
उपन्यस्य महातेजा विप्रेभ्यः पाण्डवांस्तदा |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१०१
भीष्म उवाच
उपन्यासोऽपसर्पाणां पदातीनां च गूहनम् |
१५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१७
सिद्ध उवाच
उपपत्तिं तु गर्भस्य वक्ष्याम्यहमतः परम् |
३९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६७
असित उवाच
उपपत्त्या गुणान्विद्धि पञ्च पञ्चसु पञ्चधा ||
१३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२८
व्राह्मण उवाच
उपपत्त्या यतिस्तूष्णीं वर्तमानस्ततः परम् |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५५
भीष्म उवाच
उपपत्त्या हि सम्पन्नान्नित्यं सद्भिर्निषेवितान् ||
४१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५४
भीष्म उवाच
उपपत्त्या हि सम्पन्नो यतिभिश्चैव सेव्यते |
५२ क
वन पर्व
अध्याय
२८५
सूर्य उवाच
उपपत्त्युपपन्नार्थैर्माधुर्यकृतभूषणैः |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२३०
व्यास उवाच
उपपत्त्युपलव्धिभ्यां वर्णय़िष्यामि तच्छृणु ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७७
भीष्म उवाच
उपपत्त्योपलव्धेषु लाभेषु च समो भव ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२०
व्यास उवाच
उपपद्यति धर्मज्ञ यथाधर्मं यथागमम् ||
९ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
२९२
वसिष्ठ उवाच
उपपद्यति संय़ोगाद्गुणैः सह गुणक्षय़ात् ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय
७८
वृहदश्व उवाच
उपपद्यस्व कौन्तेय़ प्रसन्नोऽहं व्रवीमि ते ||
१५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८८
भीष्म उवाच
उपपद्येत्कथं देव स्त्रिय़ो मम जय़ो युधि |
९ ख
विराट पर्व
अध्याय
६७
विराट उवाच
उपपन्नं कुरुश्रेष्ठे कुन्तीपुत्रे धनञ्जय़े |
१० क
सभा पर्व
अध्याय
६२
भीष्म उवाच
उपपन्नं च पाञ्चालि तवेदं वृत्तमीदृशम् |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय
१९४
वैशम्पाय़न उवाच
उपपन्नं महाप्राज्ञे कृतास्त्रे सूतनन्दने |
२३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५७
उत्तङ्क उवाच
उपपन्नं महाभाग शातकुम्भमय़ैस्तथा ||
३४ ख
सभा पर्व
अध्याय
२३
वैशम्पाय़न उवाच
उपपन्नं महावाहो त्वय़ि पाण्डवनन्दन |
२१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१७९
भीष्म उवाच
उपपन्नं महाशस्त्रैः सर्वोपकरणान्वितम् |
११ क
आदि पर्व
अध्याय
१४८
व्राह्मण उवाच
उपपन्नं सतामेतद्यद्व्रवीषि तपोधने |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२९
व्यास उवाच
उपपन्नं हि यच्चेष्टा विशिष्येत विशेष्ययोः ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२७
व्यास उवाच
उपपन्नं हि यत्प्राज्ञो निस्तरेन्नेतरो जनः |
१८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
७
वासुदेव उवाच
उपपन्नमिदं पार्थ यत्स्पर्धेथा मय़ा सह |
३५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१७६
अकृतव्रण उवाच
उपपन्नमिदं भद्रे यदेवं वरवर्णिनि |
९ क
आदि पर्व
अध्याय
१५०
युधिष्ठिर उवाच
उपपन्नमिदं मातस्त्वय़ा यद्वुद्धिपूर्वकम् |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५२
वासुदेव उवाच
उपपन्नमिदं वाक्यं कौरवाणां धुरन्धरे |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
५
वासुदेव उवाच
उपपन्नमिदं वाक्यं सोमकानां धुरन्धरे |
१ क
आदि पर्व
अध्याय
१३९
वैशम्पाय़न उवाच
उपपन्नश्चिरस्याद्य भक्षो मम मनःप्रिय़ः |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१०७
मुनिरु उवाच
उपपन्नस्त्वमेतेन यथा क्षत्रिय़ भाषसे |
४ क
वन पर्व
अध्याय
७५
दमय़न्त्यु उवाच
उपपन्ना त्वय़ा भैमी त्वं च भैम्या महीपते |
१४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५५
उत्तङ्क उवाच
उपपन्ना द्विजश्रेष्ठ शतशोऽथ सहस्रशः ||
१७ ख