आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषीणां देवतानां च वंशांस्तावाहतुस्तदा |
७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६
भीष्म उवाच
ऋषीणां देवतानां च सदा भवति विग्रहः |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२४
भीष्म उवाच
ऋषीणां नामधेय़ानि याश्च वेदेषु सृष्टय़ः |
५६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२९
महेश्वर उवाच
ऋषीणां निय़मा ह्येते यैर्जय़न्त्यजितां गतिम् ||
५२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषीणां नैमिषेय़ाणामवेक्षार्थं महात्मनाम् ||
३५ ख
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
ऋषीणां परमं गुह्यमिदं भरतसत्तम |
३८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३४
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषीणां पाण्डवानां च शृण्वतोः कृष्णभीष्मय़ोः ||
१२ ग
शल्य पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषीणां पुण्यतपसां कारुण्याज्जनमेजय़ ||
५१ ख
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
ऋषीणां यत्र सत्राणि समाप्तानि नराधिप |
१३३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०
भीष्म उवाच
ऋषीणां वदतां पूर्वं श्रुतमासीद्यथा मय़ा ||
३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषीणां वहुलत्वात्तु सरस्वत्या विशां पते |
४१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
ऋषीणां व्रह्मवादानां स्वर्गस्य गमनं प्रति |
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३६
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषीणां संनिधौ राजञ्शृण्वतोः कृष्णभीष्मय़ोः |
६० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९०
भीष्म उवाच
ऋषीणां समय़ं नित्यं ये चरन्ति युधिष्ठिर |
४२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७४
भीष्म उवाच
ऋषीणां सर्वलोकेषु यानीतो यान्ति देवताः ||
१६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११६
भीष्म उवाच
ऋषीणामत्र संवादो वहुशः कुरुपुङ्गव |
९ क
आदि पर्व
अध्याय
६८
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषीणामपि का शक्तिः स्रष्टुं रामामृते प्रजाः ||
५१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५६
भीष्म उवाच
ऋषीणामपि राजेन्द्र सत्यमेव परं धनम् |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१६
वासुदेव उवाच
ऋषीणामभिगम्यश्च सूत्रकर्ता सुतस्तव |
६९ क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
ऋषीणामवकाशः स्याद्यथा तुष्टिकरो महान् ||
९३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
दुर्योधन उवाच
ऋषीणामाश्रमान्पुण्यान्यूपाञ्जनपदांस्तथा |
३० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८३
वसिष्ठ उवाच
ऋषीणामाश्रमाश्चैव वभूवुरसुरैर्हृताः ||
५६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२११
भीष्म उवाच
ऋषीणामाहुरेकं यं कामादवसितं नृषु |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७९
भीष्म उवाच
ऋषीणामितरेषां च साधु चेदमसंशय़म् ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३६
व्यास उवाच
ऋषीणामुग्रतपसां धर्मनैपुणदर्शिनाम् ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८०
भीष्म उवाच
ऋषीणामुत्तमं धीमान्कृष्णद्वैपाय़नं शुकः |
७ ख
आदि पर्व
अध्याय
१८८
युधिष्ठिर उवाच
ऋषीनध्यासितवती सप्त धर्मभृतां वर ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५३
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषीनभ्यर्चय़ामासुः करानुद्यम्य दक्षिणान् ||
२५ ग
आदि पर्व
अध्याय
२२३
सारिसृक्व उवाच
ऋषीनस्मान्वालकान्पालय़स्व; परेणास्मान्प्रैहि वै हव्यवाह ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२२
भीष्म उवाच
ऋषीनुवाच तान्सर्वानदृश्यः पुरुषोत्तमः ||
३५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
उपमन्युरु उवाच
ऋषीन्विद्याधरान्यक्षान्गन्धर्वाप्सरसस्तथा ||
१९८ ख
आदि पर्व
अध्याय
२२५
मन्दपाल उवाच
ऋषीन्वेद हुताशोऽपि व्रह्म तद्विदितं च वः ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९९
भीष्म उवाच
ऋषीन्स्वाध्याय़दीक्षाभिर्देवान्यज्ञैरनुत्तमैः ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४५
जनमेजय़ उवाच
ऋषे यदकरोद्वीरस्तच्च व्याख्यातुमर्हसि ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय
७१
देवय़ान्यु उवाच
ऋषेः पुत्रं तमथो वापि पौत्रं; कथं न शोचेय़महं न रुद्याम् ||
३७ ख
आदि पर्व
अध्याय
१६६
गन्धर्व उवाच
ऋषेः पुत्रं वसिष्ठस्य वसिष्ठमिव तेजसा ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय
४६
मन्त्रिण ऊचुः
ऋषेः पुत्रो महातेजा वालोऽपि स्थविरैर्वरः ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४
भीष्म उवाच
ऋषेः प्रभावाद्राजेन्द्र व्रह्मर्षिं व्रह्मवादिनम् ||
४६ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
ऋषेः प्रसादात्कृष्णस्य दृष्ट्वाश्चर्यमनुत्तमम् |
२१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
ऋषेः प्रसादात्कृष्णस्य सत्यवत्याः सुतस्य च |
५७ क
आदि पर्व
अध्याय
७२
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषेरङ्गिरसः पौत्र वृत्तेनाभिजनेन च |
२ क
आदि पर्व
अध्याय
७१
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषेरङ्गिरसः पौत्रं पुत्रं साक्षाद्वृहस्पतेः |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१९
भीष्म उवाच
ऋषेरथ वदान्यस्य कन्यां वव्रे महात्मनः ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय
९८
भीष्म उवाच
ऋषेरुतथ्यस्य तदा सन्तानकुलवृद्धय़े ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७०
भीष्म उवाच
ऋषेरुद्दालकेर्वाक्यं नाचिकेतस्य चोभय़ोः ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय
२९
सूत उवाच
ऋषेर्मानं करिष्यामि वज्रं यस्यास्थिसम्भवम् |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२०१
भीष्म उवाच
ऋषेर्मेधातिथेः पुत्रः कण्वो वर्हिषदस्तथा |
२६ क
वन पर्व
अध्याय
१२२
लोमश उवाच
ऋषेर्वचनमाज्ञाय़ शर्यातिरविचारय़न् |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१९
भीष्म उवाच
ऋषेर्व्याहरतो वाक्यं प्रतिवक्ष्यामहे वय़म् ||
२९ ख
आदि पर्व
अध्याय
४६
सूत उवाच
ऋषेर्हि शृङ्गेर्वचनं कृत्वा दग्ध्वा च पार्थिवम् |
३७ क