शल्य पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्ततो राजंस्तव पुत्रेण धन्विना |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७१
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्ततो राजञ्ज्वलन्तमिव पावकम् |
३६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्ततो राजञ्शनकैरव्रवीद्वचः |
५५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१११
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्ततो राजन्पाण्डवश्च युधिष्ठिरः |
१७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३१
युधिष्ठिर उवाच
धृष्टद्युम्नस्तथा द्रौणिं स्वय़ं यास्याम्यहं कृपम् ||
३४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्तथा राजन्सौभद्रश्च महारथः |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०५
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्तथा शूरो राक्षसश्च घटोत्कचः |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्तदा राजन्गभस्तिभिरिवांशुमान् |
२५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्तमारोप्य स्वरथे रथिनां वरः |
१०९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्तव सुतं ताडय़ामास साय़कैः ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्तु तं दृष्ट्वा कलिङ्गैः समभिद्रुतम् |
९० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्तु तद्राजन्भारद्वाजशिरो महत् |
५४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्तु तान्हित्वा तव राजन्रथर्षभान् |
१५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्तु निर्विद्धः शरं घोरममर्षणः |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४५
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्तु निर्विद्धो द्रोणेन भरतर्षभ |
८ क
आदि पर्व
अध्याय
१८४
वैशम्पाय़न उवाच
धृष्टद्युम्नस्तु पाञ्चाल्यः पृष्ठतः कुरुनन्दनौ |
१ क
शल्य पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्तु मां दृष्ट्वा हसन्सात्यकिमव्रवीत् |
३५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४२
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्तु राधेय़ं शरेण नतपर्वणा |
७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३८
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्तु वलवाञ्जित्वा शत्रुं महारथम् |
४१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४८
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्तु विरथो हताश्वो हतसारथिः |
६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्तु शल्येन पीडितो नवभिः शरैः |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९९
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्तु समरे क्रोधादग्निरिव ज्वलन् |
८ क
शल्य पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्तु समरे पराजित्य नराधिपम् |
३४ क
शल्य पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्तु समरे वलवान्दृढविक्रमः |
४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३८
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्तु समरे हार्दिक्यं नवभिः शरैः |
३३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्तु सैन्यानि प्राक्रोशत पुनः पुनः |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्त्रिभिश्चापि कृतवर्माणमार्दय़त् |
१२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५९
वासुदेव उवाच
धृष्टद्युम्नस्त्वभून्नेता पाण्डवानां महास्त्रवित् |
१५ क
शल्य पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्य च तथा वलेनाभ्यधिको रणे ||
२८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्य च स्वय़ं भीमेन परिपालितम् ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
धृष्टद्युम्नस्य चोत्पत्तिमुत्पत्तिं च शिखण्डिनः |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६८
भीष्म उवाच
धृष्टद्युम्नस्य तनय़ो वाल्यान्नातिकृतश्रमः ||
७ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्य निलय़ं शनकैरभ्युपागमत् ||
१० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८०
वैशम्पाय़न उवाच
धृष्टद्युम्नस्य भगिनी तव कृष्ण प्रिय़ा सखी ||
२१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७५
व्राह्मणा ऊचुः
धृष्टद्युम्नस्य भगिनी द्रोणशत्रोः प्रतापिनः ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
धृष्टद्युम्नस्य भगिनी सभां कृष्येत मादृशी ||
५३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्य भल्लेन क्रुद्धश्चिच्छेद कार्मुकम् ||
३० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्य भीमस्य शतानीकस्य वा विभो |
२४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४६
युधिष्ठिर उवाच
धृष्टद्युम्नस्य यमय़ोर्वीरस्य च शिखण्डिनः |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६६
धृतराष्ट्र उवाच
धृष्टद्युम्नस्य यो मृत्युः सृष्टस्तेन महात्मना |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नहतानन्यानपश्याम महागजान् |
४१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
धृष्टद्युम्नात्मजा वीराः के तान्द्रोणादवारय़न् ||
४९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नादहं मुक्तः कथञ्चिच्छ्रान्तवाहनः |
५० क
द्रोण पर्व
अध्याय
८
धृतराष्ट्र उवाच
धृष्टद्युम्नादृते रौद्रात्पाल्यमानात्किरीटिना ||
२६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४१
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नादय़ः सर्वे पुनर्जहृषिरे मुदा ||
९९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
धृष्टद्युम्नाभिमन्युभ्यां हैडिम्वस्य च रक्षसः ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नाय़ वलवान्सुहृद्भ्यश्च पुनः पुनः |
४५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२७
वैशम्पाय़न उवाच
धृष्टद्युम्ने च सङ्क्रुद्धे न स्युः सर्वाः प्रजा ध्रुवम् ||
४८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७
युधिष्ठिर उवाच
धृष्टद्युम्ने विराटे च द्रुपदे च महीपतौ ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७२
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्ने सात्यकौ च भीमे चापि पराजिते |
१० क