कर्ण पर्व
अध्याय
६९
सञ्जय़ उवाच
दन्तवर्णैर्हय़ैर्युक्तं कालवालैर्महारथः ||
२६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३५
सञ्जय़ उवाच
दन्तवेष्टेषु नेत्रेषु कम्भेषु स कटेषु च |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
दन्तसङ्घातसङ्घर्षात्सधूमोऽग्निरजाय़त ||
३९ ख
आदि पर्व
अध्याय
२५
कश्यप उवाच
दन्तहस्ताग्रलाङ्गूलपादवेगेन वीर्यवान् ||
२२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१९
व्राह्मण उवाच
दन्तांस्तालु च जिह्वां च गलं ग्रीवां तथैव च |
३५ क
सभा पर्व
अध्याय
४१
शिशुपाल उवाच
दन्तान्तरविलग्नं यत्तदादत्तेऽल्पचेतना ||
२१ ख
सभा पर्व
अध्याय
३९
वैशम्पाय़न उवाच
दन्तान्सन्दशतस्तस्य कोपाद्ददृशुराननम् |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३८
भीष्म उवाच
दन्ताश्च परिघृष्यन्ते रसश्चापि न लभ्यते ||
५६ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
दन्ताश्च पितरो राजन्सोमपा इति विश्रुताः |
४८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
दन्ताश्चैवातिविद्धानां नाराचैर्भूषणानि च ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
दन्तिदन्तावभिन्नानां मृदितानां च दन्तिभिः ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८६
सञ्जय़ उवाच
दन्तिनः सादिनश्चैव रथिनोऽथ हय़ास्तथा ||
७९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९९
सञ्जय़ उवाच
दन्तिनश्च नरश्रेष्ठ विहीना वरसादिभिः |
२४ क
शल्य पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
दन्तिनां च शतं साग्रं त्रिसाहस्राः पदातय़ः ||
१५ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
८३
सञ्जय़ उवाच
दन्तिनां युध्यमानानां सङ्घर्षात्पावकोऽभवत् |
३३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
दन्तिभिश्चापरैस्तत्र सप्रासैर्गाढवेदनैः |
६६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८३
सञ्जय़ उवाच
दन्तेषु भरतश्रेष्ठ सधूमः सर्वतोदिशम् ||
३३ ख
आदि पर्व
अध्याय
६८
वैशम्पाय़न उवाच
दन्तैः शुक्लैः शिखरिभिः सिंहसंहननो युवा |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
दन्तैरभिहतास्तत्र चुक्रुशुः परमातुराः ||
८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
दन्तैरिव महानागौ शृङ्गैरिव महर्षभौ |
१४ क
विराट पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
दन्तैर्दन्तांस्तदा रोषान्निष्पिपेष महामनाः ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३६
व्यास उवाच
दन्तोलूखलिनः केचिदश्मकुट्टास्तथापरे |
१२ क
शल्य पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
दन्तोलूखलिनश्चान्ये सम्प्रक्षालास्तथापरे ||
४५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५४
भीष्म उवाच
दमं निःश्रेय़सं प्राहुर्वृद्धा निश्चय़दर्शिनः |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३३
विदुर उवाच
दमं शौचं दैवतं मङ्गलानि; प्राय़श्चित्तं विविधाँल्लोकवादान् |
९७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७९
भीष्म उवाच
दमः क्षमा धृतिस्तेजः सन्तोषः सत्यवादिता |
१९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१८
व्राह्मण उवाच
दमः प्रशान्तता चैव भूतानां चानुकम्पनम् ||
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७४
भीष्म उवाच
दमः सत्यफलावाप्तिरुक्ता सर्वात्मना मय़ा |
३३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३४
विदुर उवाच
दमः सत्यमनाय़ासो न भवन्ति दुरात्मनाम् ||
६९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३५
विदुर उवाच
दमः सत्यमार्जवमानृशंस्यं; चत्वार्येतान्यन्ववय़न्ति सन्तः ||
४८ ख
सभा पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
दमघोषात्मजं वीरं संसाधय़त मा चिरम् |
३० ख
वन पर्व
अध्याय
१५
कृष्ण उवाच
दमघोषात्मजो वीरः शिशुपालो मय़ा हतः ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
दमनं चापि दाय़ादं पौरवस्य महात्मनः |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
दमनाद्दण्डनाच्चैव तस्माद्दण्डं विदुर्वुधाः ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२१३
भीष्म उवाच
दममेव प्रशंसन्ति वृद्धाः श्रुतिसमाधय़ः |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६०
भीष्म उवाच
दममेव महाराज धर्ममाहुः पुरातनम् |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५४
भीष्म उवाच
दमस्तेजो वर्धय़ति पवित्रं च दमः परम् |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१३
भीष्म उवाच
दमस्तेजो वर्धय़ति पवित्रं दम उच्यते |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
दमस्त्यागो धृतिः सत्यं भवत्ववभृथाय़ ते ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४३
सनत्सुजात उवाच
दमस्त्यागोऽप्रमादश्च एतेष्वमृतमाहितम् |
१४ क
स्त्री पर्व
अध्याय
७
विदुर उवाच
दमस्त्यागोऽप्रमादश्च ते त्रय़ो व्रह्मणो हय़ाः ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७४
भीष्म उवाच
दमस्य तु फलं राजञ्शृणु त्वं विस्तरेण मे |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७४
युधिष्ठिर उवाच
दमस्येह फलं किं च वेदानां धारणे च किम् |
३ क
वन पर्व
अध्याय
१९८
व्याध उवाच
दमस्योपनिषत्त्यागः शिष्टाचारेषु नित्यदा ||
६२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२४३
व्यास उवाच
दमस्योपनिषद्दानं दानस्योपनिषत्तपः ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८८
हंस उवाच
दमस्योपनिषन्मोक्ष एतत्सर्वानुशासनम् ||
१३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३५
भीष्म उवाच
दमस्वाध्याय़निरताः सर्वान्कामानवाप्स्यथ ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२८
श्रीभगवानु उवाच
दमात्सिद्धिं परीप्सन्तो मां जनाः कामय़न्ति हि |
३९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८०
पराशर उवाच
दमान्वितः पुरुषो धर्मशीलो; भूतानि चात्मानमिवानुपश्येत् |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५१
वासुदेव उवाच
दमे तपसि सत्ये च दाने च निरतः शुचिः ||
१२ ख