अनुशासन पर्व
अध्याय
११०
भीष्म उवाच
दिवसे यश्चतुर्थे तु प्राश्नीय़ादेकभोजनम् |
१६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११०
भीष्म उवाच
दिवसे यस्तु षष्ठे वै मुनिः प्राशेत भोजनम् |
२३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११०
भीष्म उवाच
दिवसे सप्तदशमे यः प्राप्ते प्राशते हविः |
७२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११०
भीष्म उवाच
दिवसे सप्तमे यस्तु प्राश्नीय़ादेकभोजनम् |
२९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३५
विदुर उवाच
दिवसेनैव तत्कुर्याद्येन रात्रौ सुखं वसेत् |
५७ क
वन पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
दिवस्तेजः समुद्धृत्य जनय़ामास वारिणा ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
दिवस्पुत्रो वृहद्भानुश्चक्षुरात्मा विभावसुः |
४० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
दिवस्पृक्सुमहान्केतुः स्यन्दनेऽस्य समुच्छ्रितः |
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५२
सञ्जय़ उवाच
दिवस्पृङ्नरवीराणां निघ्नतामितरेतरम् |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय
६४
वैशम्पाय़न उवाच
दिवस्पृशोऽथ सङ्घुष्टाः पक्षिभिर्मधुरस्वरैः |
९ क
आदि पर्व
अध्याय
१३५
वैशम्पाय़न उवाच
दिवा चरन्ति मृगय़ां पाण्डवेय़ा वनाद्वनम् ||
१९ ख
आदि पर्व
अध्याय
११४
वैशम्पाय़न उवाच
दिवा मध्यगते सूर्ये तिथौ पुण्येऽभिपूजिते ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८४
धृतराष्ट्र उवाच
दिवा रात्रौ च भात्येष सुतेजा विमलो मणिः |
११ क
आदि पर्व
अध्याय
५३
सूत उवाच
दिवा वा यदि वा रात्रौ नास्य सर्पभय़ं भवेत् ||
२३ ख
आदि पर्व
अध्याय
२०
सूत उवाच
दिवाकरः परिकुपितो यथा दहे; त्प्रजास्तथा दहसि हुताशनप्रभ |
१३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
दिवाकरकरप्रख्यानङ्गश्चिक्षेप तोमरान् |
१६ क
सभा पर्व
अध्याय
१०
नारद उवाच
दिवाकरनिभे पुण्ये दिव्यास्तरणसंवृते |
६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
दिवाकरपथं प्राप्य छादय़ामास भास्करम् ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७९
सञ्जय़ उवाच
दिवाकरपथं प्राप्य छादय़ामासुरम्वरम् ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
दिवाकरपथं प्राप्य रजस्तीव्रमदृश्यत ||
१९ ख
आदि पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
दिवाकरस्य तं विद्धि देवस्यांशमनुत्तमम् ||
८९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४६
वैशम्पाय़न उवाच
दिवाकरांशुप्रभमाशुगामिनं; विचित्रनानामणिरत्नभूषितम् |
३४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५२
वैशम्पाय़न उवाच
दिवाकरापीतरसास्तथौषधीः; पुनः स्वकेनैव गुणेन योजय़न् ||
३३ ख
वन पर्व
अध्याय
१६१
वैशम्पाय़न उवाच
दिवाकराभाणि विभूषणानि; प्रीतः प्रिय़ाय़ै सुतसोममात्रे ||
२६ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
५४
विशोक उवाच
दिवाकराभो मणिरेष दिव्यो; विभ्राजते चैव किरीटसंस्थः ||
२६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२९
सञ्जय़ उवाच
दिवाकरेणापि समं तपन्तं; समाप्तरश्मिं यशसा ज्वलन्तम् |
१३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
दिवाकरेन्दुज्वलनग्रहत्विषं; सुवर्णमुक्तामणिजालभूषितम् |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
दिवाकरेऽथ रजसा सर्वतः संवृते भृशम् |
३४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
दिवाकरेऽस्तङ्गिरिमास्थिते शनै; रुभे प्रय़ाते शिविराय़ भारत ||
७७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१९९
मनुरु उवाच
दिवाकरो गुणमुपलभ्य निर्गुणो; यथा भवेद्व्यपगतरश्मिमण्डलः |
३१ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१
सञ्जय़ उवाच
दिवाचराश्च ये सत्त्वास्ते निद्रावशमागताः ||
२६ ख
विराट पर्व
अध्याय
२१
भीमसेन उवाच
दिवात्र कन्या नृत्यन्ति रात्रौ यान्ति यथागृहम् ||
३ ख
विराट पर्व
अध्याय
२१
द्रौपद्यु उवाच
दिवात्र कन्या नृत्यन्ति रात्रौ यान्ति यथागृहम् ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय
२८१
सत्यवानु उवाच
दिवापि मय़ि निष्क्रान्ते सन्तप्येते गुरू मम |
८२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०१
याज्ञवल्क्य उवाच
दिवास्वप्ने विवादे च प्रमादेषु च वै रतिः |
२७ क
आदि पर्व
अध्याय
८१
वैशम्पाय़न उवाच
दिवि चेह च पुण्यार्थां सर्वपापप्रणाशिनीम् ||
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२७
सिद्ध उवाच
दिवि ज्योतिर्यथादित्यः पितॄणां चैव चन्द्रमाः |
७३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१०
शल्य उवाच
दिवि देवर्षय़श्चापि देवराजविनाकृताः |
४७ क
आदि पर्व
अध्याय
७
सूत उवाच
दिवि देवा मुमुदिरे भूतसङ्घाश्च लौकिकाः |
२५ क
सभा पर्व
अध्याय
४५
धृतराष्ट्र उवाच
दिवि देवाः प्रसादं नः करिष्यन्ति न संशय़ः ||
५३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
दिवि देवाः सगन्धर्वा मुनय़श्चापि विस्मिताः ||
६३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
दिवि वा देवराजस्य त्वय़ा यत्कृतमाहवे ||
५८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२६
वासुदेव उवाच
दिवि वा भुवि वा किञ्चित्पश्याम्यमलदर्शनाः ||
४१ ख
वन पर्व
अध्याय
४१
भगवानु उवाच
दिवि वा विद्यते क्षत्रं त्वत्प्रधानमरिन्दम ||
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३४
उमो उवाच
दिवि वा सागरगमास्तेन वो मानय़ाम्यहम् ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८
धृतराष्ट्र उवाच
दिवि शक्र इव श्रेष्ठो महासत्त्वो महावलः |
३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८
धृतराष्ट्र उवाच
दिवि शक्रमिव श्रेष्ठं महामात्रं धनुर्भृताम् |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७२
भीष्म उवाच
दिवि सञ्चरमाणानि ह्रस्वानि च महान्ति च |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
दिवि सूर्यसहस्रस्य भवेद्युगपदुत्थिता |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२४
भीष्म उवाच
दिवि सूर्यास्तथा सप्त दहन्ति शिखिनोऽर्चिषा |
७५ क