शान्ति पर्व
अध्याय
१६७
भीष्म उवाच
तस्य वाक्यं समाज्ञाय़ वासवः पुरुषर्षभ |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१८
वैशम्पाय़न उवाच
तस्य वाक्यस्य निधने पार्थ जातो ह्यहं मृगः |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
तस्य वाक्यस्य निधने प्रादुरासीच्छिवोऽनिलः |
३६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५
भीष्म उवाच
तस्य वाक्येन सौम्येन हर्षितः पाकशासनः |
२६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
देवा ऊचुः
तस्य वाजांस्ततो देवाः कल्पय़ां चक्रिरे विभोः |
९२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२५
भीष्म उवाच
तस्य वाणपथं त्यक्त्वा तस्थिवान्प्रहसन्निव ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
तस्य वाणपथं प्राप्य नाभ्यवर्तन्त सर्वशः ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय
१७
वासुदेव उवाच
तस्य वाणमय़ं वर्षं जाम्ववत्याः सुतो महत् |
१२ क
विराट पर्व
अध्याय
५३
वैशम्पाय़न उवाच
तस्य वाणमय़ं वर्षं शलभानामिवाय़तम् |
५९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
तस्य वाणसहस्राणि सृजतो दृढधन्विनः |
११३ क
शल्य पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
तस्य वाणसहस्रैस्तु प्रच्छन्ना ह्यभवन्मही |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
तस्य वारणराजस्य जवेनापततो रथी |
३६ क
वन पर्व
अध्याय
१९५
मार्कण्डेय़ उवाच
तस्य वारि महाराज सुस्राव वहु देहतः |
२७ क
सभा पर्व
अध्याय
१७
कृष्ण उवाच
तस्य वालस्य यत्कृत्यं तच्चकार नृपस्तदा |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
तस्य वासः सहस्राक्ष नाकपृष्ठे महीय़ते ||
७७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५
व्यास उवाच
तस्य वासवतुल्योऽभून्मरुत्तो नाम वीर्यवान् |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०२
भीष्म उवाच
तस्य वाहय़तः कालो मुनिमुख्यांस्तपोधनान् |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३७
पूजन्यु उवाच
तस्य वाय़ुरुजात्यर्थं नेत्रय़ोर्भवति ध्रुवम् ||
७३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२००
भीष्म उवाच
तस्य विक्रमणादेव देवानां श्रीर्व्यवर्धत |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
तस्य विक्षिपतश्चापं रथे विष्टभ्य तिष्ठतः |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७०
सञ्जय़ उवाच
तस्य विक्षिपतश्चापं शरानन्यांश्च मुञ्चतः |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
तस्य विक्षिपतश्चापं श्रुतकीर्तेर्महात्मनः |
३९ क
विराट पर्व
अध्याय
४०
वैशम्पाय़न उवाच
तस्य विक्षिप्यमाणस्य धनुषोऽभून्महास्वनः |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५६
भीष्म उवाच
तस्य विख्यातवीर्यस्य श्रुत्वा वाक्यानि स द्विजः |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
तस्य विज्ञाय़ सङ्कल्पं शक्रो वृत्रनिषूदनः |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३४
सञ्जय़ उवाच
तस्य विद्धस्य वेगेन कराच्चापं पपात ह ||
४३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
तस्य विद्युदिवाभ्रेषु चरन्केतुरदृश्यत ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
तस्य विद्युदिवाभ्रेषु चापं हेमपरिष्कृतम् |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
तस्य विद्युदिवाभ्रेषु चापं हेमपरिष्कृतम् |
२९ क
सभा पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
तस्य विप्लवते वुद्धिरेवं चेदिपतेर्यथा ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
तस्य विव्याध वलवाञ्शरैरश्वानजिह्मगैः |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५१
भीष्म उवाच
तस्य विश्रमणादेव प्रसादो यः कृतस्तव |
८ क
शल्य पर्व
अध्याय
५७
वासुदेव उवाच
तस्य विष्यन्दमानेन रुधिरेणामितौजसः |
३६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१५
धृतराष्ट्र उवाच
तस्य विस्तरतो व्रूहि प्रवीरस्याद्य विक्रमम् |
२ क
आदि पर्व
अध्याय
८१
जनमेजय़ उवाच
तस्य विस्तीर्णय़शसः सत्यकीर्तेर्महात्मनः |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
११८
भीष्म उवाच
तस्य विस्तीर्यते राज्यं ज्योत्स्ना ग्रहपतेरिव ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६२
भीष्म उवाच
तस्य विस्तीर्यते राष्ट्रं ज्योत्स्ना ग्रहपतेरिव ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय
१४७
हनूमानु उवाच
तस्य वीरस्य चरितं गाय़न्त्यो रमय़न्ति माम् ||
३९ ख
आदि पर्व
अध्याय
१०६
वैशम्पाय़न उवाच
तस्य वीरस्य विक्रान्तैः सहस्रशतदक्षिणैः |
५ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
तस्य वीरस्य शव्देन मार्यमाणस्य वेश्मनि |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६०
सञ्जय़ उवाच
तस्य वीर्यं महावाहो शृणु सत्येन कौरव ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५०
धृतराष्ट्र उवाच
तस्य वीर्येण सङ्क्लिष्टा नित्यमेव सुता मम |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६३
भीष्म उवाच
तस्य वुद्धिः प्रादुरासीद्यदि दद्यां महद्धनम् |
३७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४५
वासुदेव उवाच
तस्य वुद्धिः समुत्पन्ना द्वितीय़ः स्यात्कथं सुतः |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२१
भीष्म उवाच
तस्य वुद्धिरिय़ं किं नु मोहस्तत्त्वमिदं भवेत् |
७ क
शल्य पर्व
अध्याय
४१
वैशम्पाय़न उवाच
तस्य वुद्धिरिय़ं ह्यासीद्धर्मनित्यस्य भारत ||
१० ग
द्रोण पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
तस्य वुद्ध्या विचार्यैतदर्जुनस्य कुरूद्वह |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय
२५
कश्यप उवाच
तस्य वृंहितशव्देन कूर्मोऽप्यन्तर्जलेशय़ः |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६०
भीष्म उवाच
तस्य वृत्तिं प्रवक्ष्यामि यच्च तस्योपजीवनम् |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६०
भीष्म उवाच
तस्य वृत्तिं प्रवक्ष्यामि यच्च तस्योपजीवनम् |
३१ क