अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
सर्वभूतात्मभूतस्य हरस्यामिततेजसः ||
२८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२७
श्रीभगवानु उवाच
सर्वभूतात्मभूतात्मा कुर्वन्नपि न लिप्यते ||
७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११६
भीष्म उवाच
सर्वभूतात्मभूतैस्तैर्विज्ञातार्थपरावरैः ||
६४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६१
कपिल उवाच
सर्वभूतात्मभूतो यस्तं देवा व्राह्मणं विदुः ||
३२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
सर्वभूतात्मभूतो हि वासुदेवो महावलः ||
३१ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
३२
नारद उवाच
सर्वभूतात्मय़ोनींश्च तान्नमस्याम्यहं द्विजान् ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२८
श्रीभगवानु उवाच
सर्वभूताधिवासश्च वासुदेवस्ततो ह्यहम् ||
३६ ख
वन पर्व
अध्याय
३३
द्रौपद्यु उवाच
सर्वभूतानि कौन्तेय़ कारय़त्यवशान्यपि ||
२२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३१
श्रीभगवानु उवाच
सर्वभूतानि कौन्तेय़ प्रकृतिं यान्ति मामिकाम् |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३२
सञ्जय़ उवाच
सर्वभूतानि च परं त्रासं जग्मुर्महीपते ||
३४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२४
भीष्म उवाच
सर्वभूतानि चादाय़ तपसश्चरणाय़ च |
४४ क
वन पर्व
अध्याय
२९
प्रह्लाद उवाच
सर्वभूतानि चाप्यस्य न नमन्ते कदाचन |
८ क
वन पर्व
अध्याय
२८
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वभूतानि तं पार्थ सदा परिभवन्त्युत ||
३५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६३
भीष्म उवाच
सर्वभूतानि भूतात्मा महात्मा पुरुषोत्तमः |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
सर्वभूतानि मन्यन्ते मां ददातीति वासव ||
५९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३१
धृतराष्ट्र उवाच
सर्वभूतानि यो ह्येकः खाण्डवे जितवान्पुरा |
९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११७
भीष्म उवाच
सर्वभूतानि रक्षन्ति समेषु विषमेषु च ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२९
श्रीभगवानु उवाच
सर्वभूतानि संमोहं सर्गे यान्ति परन्तप ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
सर्वभूतानुकम्पा च सर्वमत्रोपवर्णितम् |
८४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३०
महेश्वर उवाच
सर्वभूतानुकम्पी यः सर्वभूतार्जवव्रतः |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२३
भीष्म उवाच
सर्वभूतानुलोमश्च मृदुशीलः प्रिय़ंवदः ||
२८ ख
आदि पर्व
अध्याय
११२
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वभूतान्यति यथा तपनः शिशिरात्यये ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७६
सञ्जय़ उवाच
सर्वभूतान्यमन्यन्त द्रोणास्त्रवलविस्मय़ात् ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वभूतान्यमन्यन्त मम वादय़तीत्ययम् ||
६९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८१
सञ्जय़ उवाच
सर्वभूतान्यमन्यन्त हतमेव युधिष्ठिरम् ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१७१
भीष्म उवाच
सर्वभूतान्यहं देहे पश्यन्मनसि चात्मनः |
३१ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
७
द्रौणिरु उवाच
सर्वभूताशय़ विभो हविर्भूतमुपस्थितम् |
५७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६४
भीष्म उवाच
सर्वभूतेश्वरं देवं प्रभुं नाराय़णं पुरा |
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२०२
पितामह उवाच
सर्वभूतेश्वरो योगी योनिरात्मा तथात्मनः |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय
२३१
व्यास उवाच
सर्वभूतेषु चात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१३
जनक उवाच
सर्वभूतेषु चात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि |
२९ क
आदि पर्व
अध्याय
२०९
वर्गो उवाच
सर्वभूतेषु धर्मज्ञ मैत्रो व्राह्मण उच्यते |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३०
महेश्वर उवाच
सर्वभूतेषु यः सम्यग्ददात्यभय़दक्षिणाम् |
२७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४०
श्रीभगवानु उवाच
सर्वभूतेषु येनैकं भावमव्ययमीक्षते |
२० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११६
भीष्म उवाच
सर्वभूतेषु यो विद्वान्ददात्यभय़दक्षिणाम् |
२० क
वन पर्व
अध्याय
१८७
देव उवाच
सर्वभूतेषु विप्रेन्द्र न च मां वेत्ति कश्चन ||
३५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३२
महेश्वर उवाच
सर्वभूतेषु सस्नेहो यथात्मनि तथापरे ||
५५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८५
वसिष्ठ उवाच
सर्वभूतेष्वथ तथा सत्त्वं तेजस्तथा तमः |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६६
भीष्म उवाच
सर्वभूतेष्वनुक्रोशं कुर्वतस्तस्य भारत |
१३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१६
धृतराष्ट्र उवाच
सर्वभूतेष्वनुज्ञातः शङ्करेण महात्मना ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३३
कापव्य उवाच
सर्वभूतेष्वपि च वै व्राह्मणो मोक्षमर्हति |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५२
भीष्म उवाच
सर्वभूतेष्वभिद्रोहः सर्वभूतेष्वय़ुक्तता |
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३७
व्यास उवाच
सर्वभूतेष्वभय़दस्तं देवा व्राह्मणं विदुः ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२१
श्रीरु उवाच
सर्वभूतेष्ववर्तन्त यथात्मनि दय़ां प्रति ||
४३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५२
भीष्म उवाच
सर्वभूतेष्वविश्वासः सर्वभूतेष्वनार्जवम् |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५५
तुलाधार उवाच
सर्वभूतोपघातश्च फलभावे च संय़मः ||
१६ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
७
द्रौणिरु उवाच
सर्वभूतोपहारेण यक्ष्येऽहं शुचिना शुचिम् ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
१४६
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वभूषणसम्पूर्णं भूमेर्भुजमिवोच्छ्रितम् ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय
२२३
स्तम्वमित्र उवाच
सर्वमग्ने त्वमेवैकस्त्वय़ि सर्वमिदं जगत् |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
सर्वमङ्गलमङ्गल्यं सर्वपापप्रणाशनम् |
२३ क