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उद्योग पर्व
अध्याय ४८
वैशम्पाय़न उवाच
जम्भस्य ग्रसमानस्य यज्ञमर्जुन आहवे ||
१५ ख
शल्य पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
जम्भो यथा शक्रसमागमे वै; नागेन्द्रमैरावणमिन्द्रवाह्यम् ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४९
भीष्म उवाच
जम्वुकस्य वचः श्रुत्वा कृपणं परिदेवतः |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय १४९
भीष्म उवाच
जम्वुकेन स्वकार्यार्थं वान्धवास्तस्य धिष्ठिताः ||
९० ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
जम्वूखण्डविनिर्माणं पर्वोक्तं तदनन्तरम् |
५५ क
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
जम्वूखण्डविनिर्माणं यत्रोक्तं सञ्जय़ेन ह ||
१५४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १२
धृतराष्ट्र उवाच
जम्वूखण्डस्त्वय़ा प्रोक्तो यथावदिह सञ्जय़ |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
जम्वूद्वीपप्रमाणेन द्विगुणः स नराधिप |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
जम्वूद्वीपात्प्रवर्तन्ते रत्नानि विविधान्युत |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
जम्वूद्वीपेन विख्यातस्तस्य मध्ये महाद्रुमः ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४
वैशम्पाय़न उवाच
जम्वूद्वीपेन सदृशः क्रौञ्चद्वीपो नराधिप |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १४
वैशम्पाय़न उवाच
जम्वूद्वीपो महाराज नानाजनपदाय़ुतः |
२१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८७
वैशम्पाय़न उवाच
जम्वूद्वीपो हि सकलो नानाजनपदाय़ुतः |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७
वैशम्पाय़न उवाच
जम्वूनदी च सीता च गङ्गा सिन्धुश्च सप्तमी ||
४५ ख
आदि पर्व
अध्याय १९९
वैशम्पाय़न उवाच
जम्वूभिः पाटलाभिश्च कुव्जकैरतिमुक्तकैः |
४२ क
वन पर्व
अध्याय ८०
पुलस्त्य उवाच
जम्वूमार्गं समाविश्य देवर्षिपितृसेवितम् |
६० क
वन पर्व
अध्याय ८०
पुलस्त्य उवाच
जम्वूमार्गादुपावृत्तो गच्छेत्तण्डुलिकाश्रमम् |
६२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २६
अङ्गिरा उवाच
जम्वूमार्गे त्रिभिर्मासैः संय़तः सुसमाहितः |
४८ क
वन पर्व
अध्याय ८७
धौम्य उवाच
जम्वूमार्गो महाराज ऋषीणां भावितात्मनाम् |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७
वैशम्पाय़न उवाच
जम्वूषण्डश्च तत्रैव सुमहान्नन्दनोपमः ||
२९ ख
वन पर्व
अध्याय ६१
वृहदश्व उवाच
जम्व्वाम्रलोध्रखदिरशाकवेत्रसमाकुलम् |
४ क
आदि पर्व
अध्याय ४३
सूत उवाच
जरत्कारुं जरत्कारुश्चिन्ताशोकपराय़णा ||
३० ख
आदि पर्व
अध्याय ४१
पितर ऊचुः
जरत्कारुं तपोलुव्धं मन्दात्मानमचेतसम् ||
२५ ग
आदि पर्व
अध्याय ३५
सूत उवाच
जरत्कारुं स्वसारं वै परं हर्षमवाप च ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय १३
सूत उवाच
जरत्कारुः सुमहता कालेन स्वर्गमीय़िवान् ||
४४ ख
आदि पर्व
अध्याय ३६
शौनक उवाच
जरत्कारुनिरुक्तं त्वं यथावद्वक्तुमर्हसि ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय १३
सूत उवाच
जरत्कारुरिति ख्यात ऊर्ध्वरेता महानृषिः |
१० क
आदि पर्व
अध्याय ३४
व्रह्मो उवाच
जरत्कारुरिति ख्यातस्तेजस्वी निय़तेन्द्रिय़ः ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय ३४
एलापत्र उवाच
जरत्कारुरिति ख्यातां तां तस्मै प्रतिपादय़ ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय ४१
पितर ऊचुः
जरत्कारुरिति ख्यातो वेदवेदाङ्गपारगः |
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय ३६
शौनक उवाच
जरत्कारुरिति प्रोक्तं यत्त्वय़ा सूतनन्दन |
१ क
आदि पर्व
अध्याय ३६
सूत उवाच
जरत्कारुरिति व्रह्मन्वासुकेर्भगिनी तथा ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय १३
सूत उवाच
जरत्कारुर्गतः स्वर्गं सहितः स्वैः पितामहैः ||
४३ ख
आदि पर्व
अध्याय ४९
व्रह्मो उवाच
जरत्कारुर्जरत्कारुं यां भार्यां समवाप्स्यति |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय ३५
सूत उवाच
जरत्कारुर्यदा भार्यामिच्छेद्वरय़ितुं प्रभुः |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय ४४
सूत उवाच
जरत्कारुस्ततो वाक्यमित्युक्ता प्रत्यभाषत |
९ क
आदि पर्व
अध्याय ४३
सूत उवाच
जरत्कारुस्तदा वेश्म भुजगस्य जगाम ह ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय १३
वासुकिरु उवाच
जरत्कारो जरत्कारुः स्वसेय़मनुजा मम |
३४ क
आदि पर्व
अध्याय ४८
सूत उवाच
जरत्कारोः पुरा दत्ता सा त्राह्यस्मान्सवान्धवान् ||
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय ५३
सूत उवाच
जरत्कारोर्जरत्कार्वां समुत्पन्नो महाय़शाः |
२२ क
मौसल पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
जरा कृष्णं महात्मानं शय़ानं भुवि भेत्स्यति ||
१० ख
सभा पर्व
अध्याय १७
राक्षस्यु उवाच
जरा नामास्मि भद्रं ते राक्षसी कामरूपिणी |
१ क
वन पर्व
अध्याय २४७
देवदूत उवाच
जरा मृत्युः कुतस्तेषां हर्षः प्रीतिः सुखं न च |
२३ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३५
विदुर उवाच
जरा रूपं हरति हि धैर्यमाशा; मृत्युः प्राणान्धर्मचर्यामसूय़ा |
४३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १६
व्राह्मण उवाच
जरा रोगाश्च सततं वासनानि च भूरिशः |
३६ क
आदि पर्व
अध्याय ७९
वैशम्पाय़न उवाच
जरा वली च मां तात पलितानि च पर्यगुः |
२ क
आदि पर्व
अध्याय ७९
यय़ातिरु उवाच
जरा वली च मे तात पलितानि च पर्यगुः |
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय ७८
शुक्र उवाच
जरां त्वेतां त्वमन्यस्मै सङ्क्रामय़ यदीच्छसि ||
३८ ख
आदि पर्व
अध्याय ७९
वैशम्पाय़न उवाच
जरां प्राप्य यय़ातिस्तु स्वपुरं प्राप्य चैव ह |
१ क
आदि पर्व
अध्याय ७९
वैशम्पाय़न उवाच
जरां वर्षसहस्रं मे यौवनं स्वं ददस्व च ||
१५ ख