वन पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
स तु लव्ध्वा पुनः सञ्ज्ञां समुत्थाय़ महीतलात् |
३ क
विराट पर्व
अध्याय
५२
वैशम्पाय़न उवाच
स तु लव्ध्वा पुनः स्थानं गौतमः सव्यसाचिनम् |
११ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
दुर्योधन उवाच
स तु लव्ध्वा वरं वीरस्तारकाक्षसुतो हरिः |
२५ क
विराट पर्व
अध्याय
५३
वैशम्पाय़न उवाच
स तु लव्ध्वान्तरं तूर्णमपाय़ाज्जवनैर्हय़ैः |
६९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२५
सञ्जय़ उवाच
स तु लव्ध्वान्तरं नागस्त्वरितो रथमण्डलात् |
३८ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
२
कृप उवाच
स तु वक्तव्यतां याति द्वेष्यो भवति प्राय़शः ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५६
वासुदेव उवाच
स तु वद्धाङ्गुलित्राणो नैषादिर्दृढविक्रमः |
१८ क
शल्य पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
स तु वव्रे वरं देवांस्त्रातुमर्हथ मामितः |
४५ क
शल्य पर्व
अध्याय
३९
वैशम्पाय़न उवाच
स तु वव्रे वरं राजन्स्यामहं व्राह्मणस्त्विति |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२६
वैशम्पाय़न उवाच
स तु वह्निर्महाज्वालो दग्ध्वा सर्वमशेषतः |
१९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८३
वैशम्पाय़न उवाच
स तु वाजी समुद्रान्तां पर्येत्य पृथिवीमिमाम् |
१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
स तु वाणः समासाद्य तव पुत्रं महारथम् |
२७ क
वन पर्व
अध्याय
२२
वासुदेव उवाच
स तु वाणवरोत्पीडाद्विस्रवत्यसृगुल्वणम् |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४६
सञ्जय़ उवाच
स तु वाणैः शितैस्तूर्णं प्रत्यविध्यत मारिष |
१४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
स तु वाणैर्दिशो राजन्नाच्छाद्य परवीरहा |
६० क
आदि पर्व
अध्याय
४६
सूत उवाच
स तु वारितवान्मोहात्काश्यपं द्विजसत्तमम् |
३९ क
शल्य पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
स तु वालोऽपि भगवान्महाय़ोगवलान्वितः |
३३ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१८
वासुदेव उवाच
स तु विद्राव्य तत्सर्वं शितिकण्ठोऽवहस्य च |
१८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
स तु विद्राव्य समरे पाण्डवान्सृञ्जय़ानपि |
३५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६३
भीष्म उवाच
स तु विप्रः परिश्रान्तः स्पृष्टः पुण्येन वाय़ुना |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६२
भीष्म उवाच
स तु विप्रगृहान्वेषी शूद्रान्नपरिवर्जकः |
४० क
वन पर्व
अध्याय
१९९
मार्कण्डेय़ उवाच
स तु विप्रमथोवाच धर्मव्याधो युधिष्ठिर |
१ क
वन पर्व
अध्याय
१९८
मार्कण्डेय़ उवाच
स तु विप्रो महाप्राज्ञो धर्मव्याधमपृच्छत |
५६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
स तु विष्टभ्य गात्राणि दन्ताभ्यामवनिं यय़ौ |
३९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
स तु वैकर्तनः कर्णः सामात्यः सह वन्धुभिः |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४१
सञ्जय़ उवाच
स तु शक्त्या विभिन्नाङ्गो निपपात रथोत्तमात् |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय
१६६
गन्धर्व उवाच
स तु शप्तस्तदा तेन शक्तिना वै नृपोत्तमः |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
१६६
अर्जुन उवाच
स तु शव्दो दिवं स्तव्ध्वा प्रतिशव्दमजीजनत् |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय
१७३
गन्धर्व उवाच
स तु शापवशं प्राप्तः क्रोधपर्याकुलेक्षणः |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४१
भीष्म उवाच
स तु शीतहतैर्गात्रैर्जगामैव न तस्थिवान् |
२३ क
शल्य पर्व
अध्याय
३८
वैशम्पाय़न उवाच
स तु शुश्राव विप्रेन्द्रो मुनीनां वचनं महत् ||
१५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
स तु शूरो रणे यत्तः पीडितस्तैर्महारथैः |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६७
अर्जुन उवाच
स तु शोकेन चाविष्टो विमुखः पुत्रवत्सलः |
३७ क
मौसल पर्व
अध्याय
७
वसुदेव उवाच
स तु श्रुत्वा महातेजा यदूनामनय़ं प्रभो |
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
११७
भीष्म उवाच
स तु श्वा व्याघ्रतां प्राप्य वलवान्पिशिताशनः |
२० क
आदि पर्व
अध्याय
१२३
वैशम्पाय़न उवाच
स तु श्वा शरपूर्णास्यः पाण्डवानाजगाम ह |
२० क
विराट पर्व
अध्याय
६४
उत्तर उवाच
स तु श्वो वा परश्वो वा मन्ये प्रादुर्भविष्यति ||
३२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
स तु संवर्तय़ामास द्वैधीभावेन पाण्डवः |
१७ क
स्त्री पर्व
अध्याय
७
विदुर उवाच
स तु संसारचक्रेऽस्मिंश्चक्रवत्परिवर्तते ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय
२१५
मार्कण्डेय़ उवाच
स तु सम्पूजितस्तेन सह मातृगणेन ह |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६३
भीष्म उवाच
स तु सार्थो महाराज कस्मिंश्चिद्गिरिगह्वरे |
३ क
सभा पर्व
अध्याय
२०
वैशम्पाय़न उवाच
स तु सेनापती राजा सस्मार भरतर्षभ |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९७
भीष्म उवाच
स तु स्वभावसम्पन्नस्तच्छ्रुत्वा मुनिभाषितम् |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५१
युधिष्ठिर उवाच
स तु हत्वा सहस्राणि द्विपाश्वरथसादिनाम् |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४
भीष्म उवाच
स तुतोष च विप्रर्षिस्तस्या वृत्तेन भारत |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८१
सञ्जय़ उवाच
स तुद्यमानस्तु शरैर्धनञ्जय़ः; पदा हतो नाग इव श्वसन्वली |
१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६२
सञ्जय़ उवाच
स तुद्यमानो नकुलः पृषत्कै; र्विव्याध वीरं स चुकोप विद्धः ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३२
सञ्जय़ उवाच
स तुद्यमानो नाराचैर्वृष्टिवेगैरिवर्षभः |
२१ क
शल्य पर्व
अध्याय
५३
नारद उवाच
स तुद्यमानो वलवान्वाग्भी राम समन्ततः |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
स तुद्यमानो विशिखैर्वहुभिस्तिग्मतेजनैः |
४२ क