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शान्ति पर्व
अध्याय २५३
भीष्म उवाच
अथ तस्य जटाः क्लिन्ना वभूवुर्ग्रथिताः प्रभो |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय १६
सूत उवाच
अथ तस्य समुद्रस्य तज्जातमुदकं पय़ः |
२७ क
आदि पर्व
अध्याय १६८
गन्धर्व उवाच
अथ तस्यां समुत्पन्ने गर्भे स मुनिसत्तमः |
२३ क
शल्य पर्व
अध्याय ५०
वैशम्पाय़न उवाच
अथ तस्यामतीताय़ामनावृष्ट्यां महर्षय़ः |
३९ क
आदि पर्व
अध्याय १६१
गन्धर्व उवाच
अथ तस्यामदृश्याय़ां नृपतिः काममोहितः |
१ क
विराट पर्व
अध्याय ३५
वैशम्पाय़न उवाच
अथ ता व्रुवतीः कन्याः सहिताः पाण्डुनन्दनः |
२४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
अथ तां पतितां दृष्ट्वा गृह्यान्यां महतीं गदाम् |
६३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २
भीष्म उवाच
अथ तां पुनरेवेदं प्रोवाच स सुदर्शनः |
६१ क
वन पर्व
अध्याय १२
विदुर उवाच
अथ तां राक्षसीं माय़ामुत्थितां घोरदर्शनाम् |
१९ क
वन पर्व
अध्याय ७६
वृहदश्व उवाच
अथ तां व्युषितो रात्रिं नलो राजा स्वलङ्कृतः |
१ क
वन पर्व
अध्याय ५०
वृहदश्व उवाच
अथ तां वय़सि प्राप्ते दासीनां समलङ्कृतम् |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २०
अष्टावक्र उवाच
अथ तां संविशन्प्राह शय़ने भास्वरे तदा |
४८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ७९
युधिष्ठिर उवाच
अथ तात यदा सर्वाः शस्त्रमाददते प्रजाः |
१२ क
वन पर्व
अध्याय ६७
वृहदश्व उवाच
अथ तानव्रवीद्भैमी सर्वराष्ट्रेष्विदं वचः |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
अथ तान्द्रौपदीपुत्राः सौभद्रश्च महारथः |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८४
देवा ऊचुः
अथ तान्द्विरदः कश्चित्सुरेन्द्रद्विरदोपमः |
३३ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५९
सञ्जय़ उवाच
अथ तान्द्विरदान्सर्वान्नानालिङ्गैर्महाशरैः |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४१
सञ्जय़ उवाच
अथ तान्समभिप्रेक्ष्य युय़ुत्सुरिदमव्रवीत् |
९० क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०
वासुदेव उवाच
अथ तामलभत्कन्यां नारदः सृञ्जय़ात्मजाम् |
२९ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३
शल्य उवाच
अथ तामव्रवीद्दृष्ट्वा नहुषो देवराट्तदा |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४
भीष्म उवाच
अथ तामव्रवीन्माता सुतां किञ्चिदवाङ्मुखीम् ||
२२ ख
आदि पर्व
अध्याय ९२
वैशम्पाय़न उवाच
अथ तामष्टमे पुत्रे जाते प्रहसितामिव |
४६ क
आदि पर्व
अध्याय १६१
गन्धर्व उवाच
अथ तामसितापाङ्गीमावभाषे नराधिपः |
६ क
कर्ण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
अथ तूर्यसहस्राणि प्रावाद्यन्त महामृधे |
४५ क
वन पर्व
अध्याय ७०
वृहदश्व उवाच
अथ ते गणिते राजन्विद्यते न परोक्षता |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४१
भीष्म उवाच
अथ ते तमसा ग्रस्ता निहन्यन्ते स्म दानवैः |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
अथ ते तोमरैः प्रासैर्वाणौघैश्च समन्ततः |
६७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५३
भीष्म उवाच
अथ ते दिवसं चारीं गत्वा साय़ं पुनर्नृप |
३४ क
उद्योग पर्व
अध्याय २१
वैशम्पाय़न उवाच
अथ ते धर्ममुत्सृज्य युद्धमिच्छन्ति पाण्डवाः |
१५ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३
सात्यकिरु उवाच
अथ ते न व्यवस्यन्ति प्रणिपाताय़ धीमतः |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २०
भीष्म उवाच
अथ ते राक्षसाः सर्वे येऽभिरक्षन्ति पद्मिनीम् |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २१५
भीष्म उवाच
अथ ते लक्ष्यते वुद्धिः समा वालजनैरिह |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय २९
भीष्म उवाच
अथ ते वै जय़न्त्येनं तालाग्रादिव पात्यते ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय २२४
वैशम्पाय़न उवाच
अथ ते सर्व एवैनं नाभ्यनन्दन्त वै सुताः ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय ५८
वैशम्पाय़न उवाच
अथ ते सर्वशोंऽशैः स्वैर्गन्तुं भूमिं कृतक्षणाः |
४९ क
आदि पर्व
अध्याय १९७
विदुर उवाच
अथ ते हृदय़े राजन्विशेषस्तेषु वर्तते |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३४६
भीष्म उवाच
अथ तेन नरश्रेष्ठ व्राह्मणेन तपस्विना |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९७
भीष्म उवाच
अथ तेन स शव्देन ज्यातलस्य शरस्य च |
८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५४
वैशम्पाय़न उवाच
अथ तेनैव मार्गेण शङ्खचक्रगदाधरः |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय १
महाभारत कथा
अथ तेषूपविष्टेषु सर्वेष्वेव तपस्विषु |
५ क
आदि पर्व
अध्याय २००
वैशम्पाय़न उवाच
अथ तेषूपविष्टेषु सर्वेष्वेव महात्मसु |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४६
वासुदेव उवाच
अथ तेऽद्य मतिर्नष्टा विनाशे प्रत्युपस्थिते |
२३ ख
वन पर्व
अध्याय २२१
मार्कण्डेय़ उवाच
अथ तैर्दानवैः सार्धं महिषस्त्रासय़न्सुरान् |
५५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३५
व्यास उवाच
अथ तौ दानवश्रेष्ठौ वेदान्गृह्य सनातनान् |
२७ क
आदि पर्व
अध्याय १२४
वैशम्पाय़न उवाच
अथ तौ नित्यसंहृष्टौ सुय़ोधनवृकोदरौ |
३० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५३
भीष्म उवाच
अथ तौ भगवान्प्राह प्रहृष्टश्च्यवनस्तदा |
५४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
अथ तौ वध्यमानौ तु द्रोणेन रथसत्तमौ |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १९३
भीष्म उवाच
अथ तौ सहितौ राजन्नन्योन्येन विधानतः |
१५ क
कर्ण पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
अथ तौ साय़कैस्तीक्ष्णैश्छादय़ामास दुःसहैः ||
१६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
अथ त्यक्त्वा धनुर्वीरः पार्षतं त्वरितोऽन्वगात् ||
३८ ख