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भीष्म पर्व
अध्याय १०४
सञ्जय़ उवाच
काममभ्यस वा मा वा न मे जीवन्विमोक्ष्यसे |
४७ क
वन पर्व
अध्याय २९४
शक्र उवाच
काममस्तु तथा तात तव कर्ण यथेच्छसि |
१९ क
शल्य पर्व
अध्याय ५९
सञ्जय़ उवाच
काममस्त्वेवमिति वै कृच्छ्राद्यदुकुलोद्वहः ||
३५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ३८
श्रीभगवानु उवाच
काममाश्रित्य दुष्पूरं दम्भमानमदान्विताः |
१० क
वन पर्व
अध्याय ८
कर्ण उवाच
काममीक्षामहे सर्वे दुर्योधन तवेप्सितम् |
१२ क
वन पर्व
अध्याय १२
विदुर उवाच
काममूर्तिधरः क्षुद्रः कालकल्पो व्यदृश्यत ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय ५३
सूत उवाच
काममेतद्भवत्वेवं यथास्तीकस्य भाषितम् ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४९
सत्यवत्यु उवाच
काममेवं भवेत्पौत्रो ममेह तव चैव ह |
२५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
उपमन्युरु उवाच
काममेष वरो मेऽस्तु शापो वापि महेश्वरात् |
१०४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५७
भीष्म उवाच
कामरागाद्विहिंसन्ति वहिर्वेद्यां पशून्नराः ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय १४३
वैशम्पाय़न उवाच
कामरूपधराश्चैव भवन्ति वहुरूपिणः ||
३२ ख
आदि पर्व
अध्याय ५२
सूत उवाच
कामरूपाः कामगमा दीप्तानलविषोल्वणाः |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय २५
श्रीभगवानु उवाच
कामरूपेण कौन्तेय़ दुष्पूरेणानलेन च ||
३९ ख
वन पर्व
अध्याय १९८
व्याध उवाच
कामलोभग्रहाकीर्णां पञ्चेन्द्रिय़जलां नदीम् |
६७ क
वन पर्व
अध्याय ३२
युधिष्ठिर उवाच
कामलोभानुगो मूढो नरकं प्रतिपद्यते ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २६३
भीष्म उवाच
कामलोभानुवन्धेन पुरा ते यदसूय़ितम् |
५० क
आदि पर्व
अध्याय १०९
मृग उवाच
कामलोभाभिभूतस्य कथं ते चलिता मतिः ||
११ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४५
युधिष्ठिर उवाच
कामलोभाभिभूतस्य मन्दस्य प्राज्ञमानिनः ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय २४३
व्यास उवाच
कामवन्धनमुक्तो हि व्रह्मभूय़ाय़ कल्पते ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २४३
व्यास उवाच
कामवन्धनमेवैकं नान्यदस्तीह वन्धनम् |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५०
सञ्जय़ उवाच
कामवर्णजवा युक्ता वलवन्तोऽवहन्हय़ाः ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
कामवर्णजवैरश्वैः संवृतो वहुभिर्नृप ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय १५८
गन्धर्व उवाच
कामवर्णाः कामजवाः कामतः समुपस्थिताः |
५१ क
वन पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
कामवश्योत्सुककरान्कामस्येव शरोत्करान् ||
५८ ग
वन पर्व
अध्याय २६४
मार्कण्डेय़ उवाच
कामवाणाभिसन्तप्तः सौमित्रिस्तमथाव्रवीत् ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय २७
सूत उवाच
कामवीर्यः कामगमो देवराजभय़प्रदः |
१३ क
शल्य पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
कामवीर्यधरान्सिद्धान्महापारिषदान्प्रभुः ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय २६०
मार्कण्डेय़ उवाच
कामवीर्यधराश्चैव सर्वे युद्धविशारदाः |
१३ क
वन पर्व
अध्याय २१५
मार्कण्डेय़ उवाच
कामवीर्या घ्नन्तु चैनं तथेत्युक्त्वा च ता यय़ुः ||
१६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५
शल्य उवाच
कामवृत्तः स दुष्टात्मा वाहय़ामास तानृषीन् ||
२१ ख
विराट पर्व
अध्याय १४
द्रौपद्यु उवाच
कामवृत्ता भविष्यामि पतीनां व्यभिचारिणी ||
१२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३७
व्रह्मो उवाच
कामवृत्ताः प्रमोदन्ते सर्वकामसमृद्धिभिः |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय १८५
वैशम्पाय़न उवाच
कामश्च योऽसौ द्रुपदस्य राज्ञः; स चापि सम्पत्स्यति पार्थिवस्य ||
२५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३४
विदुर उवाच
कामश्च राजन्क्रोधश्च तौ प्रज्ञानं विलुम्पतः ||
६३ ख
वन पर्व
अध्याय २१३
मार्कण्डेय़ उवाच
कामसन्तप्तहृदय़ो देहत्यागे सुनिश्चितः |
४९ क
आदि पर्व
अध्याय ६०
वैशम्पाय़न उवाच
कामस्य तु रतिर्भार्या शमस्य प्राप्तिरङ्गना |
३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १७१
भीष्म उवाच
कामस्य वशगो नित्यं दुःखमेव प्रपद्यते ||
४८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
कामहा कामकृत्कान्तः कामः कामप्रदः प्रभुः ||
४५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
कामा मनुष्यं प्रसजन्त एव; धर्मस्य ये विघ्नमूलं नरेन्द्र |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२१
भीष्म उवाच
कामाकामावृतुर्मासः शर्वरी दिवसः क्षणः |
२५ क
वन पर्व
अध्याय ८०
पुलस्त्य उवाच
कामाख्यं तत्र रुद्रस्य तीर्थं देवर्षिसेवितम् |
११३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २०६
गुरुरु उवाच
कामात्क्रोधमवाप्याथ लोभमोहौ च मानवाः |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६६
सञ्जय़ उवाच
कामात्क्रोधादवज्ञानाद्दर्पाद्वाल्येन वा पुनः |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
कामात्क्रोधाद्भय़ाल्लोभाद्दैन्यादानार्यकात्तथा |
९० क
वन पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
कामात्परिभवाद्वापि न मे जीवन्विमोक्ष्यसे |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय १९४
मनुरु उवाच
कामात्मकाश्छन्दसि कर्मय़ोगा; एभिर्विमुक्तः परमश्नुवीत |
११ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
कामात्मनां श्लाघसे द्यूतकाले; नान्यच्छमात्पश्य विपाकमस्य ||
२८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
कामात्मा प्राज्ञमानी च मित्रध्रुक्सर्वशङ्कितः |
४ क
आदि पर्व
अध्याय ९८
भीष्म उवाच
कामात्मानं तदात्मानं न शशाक निय़च्छितुम् ||
११ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १३
वासुदेव उवाच
कामात्मानं न प्रशंसन्ति लोके; न चाकामात्काचिदस्ति प्रवृत्तिः |
९ क