अनुशासन पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यवादी नरश्रेष्ठ दैवतैः सह मोदते ||
१८ ख
विराट पर्व
अध्याय
४
धौम्य उवाच
सत्यवादी मृदुर्दान्तः स राजवसतिं वसेत् ||
३७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३६
हंस उवाच
सत्यवादी मृदुर्दान्तो यः स उत्तमपूरुषः ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय
२४५
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यवादी लभेताय़ुरनाय़ासमथार्जवी |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय
९९
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यवादी शमपरस्तपस्वी दग्धकिल्विषः |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय
४
तमृषय़ ऊचुः
सत्यवादी शमपरस्तपस्वी निय़तव्रतः |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१०
ऋषय़ ऊचुः
सत्यवादी ह्यदीनश्च धर्मवित्सुविनिश्चितः ||
२५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४९
कृष्ण उवाच
सत्यवादीति विख्यातः स तदासीद्धनञ्जय़ ||
४२ ख
वन पर्व
अध्याय
२७८
मार्कण्डेय़ उवाच
सत्यवाननुरूपो मे भर्तेति मनसा वृतः ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय
२७९
मार्कण्डेय़ उवाच
सत्यवानपि भार्यां तां लव्ध्वा सर्वगुणान्विताम् |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
२८०
मार्कण्डेय़ उवाच
सत्यवानाह पश्येति सावित्रीं मधुराक्षरम् ||
३१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
सत्यवान्हि नृलोकेऽस्मिन्भवान्ख्यातो जनाधिप ||
१०४ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
सत्यव्रत महाभाग द्विषतामघवर्धन |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
सत्यव्रतं च नवभिर्विजय़ं दशभिः शरैः ||
८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६९
सञ्जय़ उवाच
सत्यव्रतं च सप्तत्या विद्ध्वा शक्रसमो युधि |
२४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
सत्यव्रतं तु समरे पुरुमित्रं च भारत |
२६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५१
भीष्म उवाच
सत्यव्रतं महाभागं देवकल्पं विशां पते ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
सत्यव्रतः पुरुमित्रो जय़ो भूरिश्रवाः शलः ||
११ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५७
धृतराष्ट्र उवाच
सत्यव्रतः पुरुमित्रो जय़ो भूरिश्रवास्तथा ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
सत्यव्रतः शान्तभय़ः सुमित्रः सुवलः प्रभुः |
१७६ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यव्रतधरः शूरो व्रह्मचारी च पाण्डवः |
१० क
वन पर्व
अध्याय
११
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यव्रतपराः सर्वे सर्वे पुरुषमानिनः |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६९
सञ्जय़ उवाच
सत्यव्रतश्च नवभिः पुरुमित्रश्च सप्तभिः ||
२५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
सत्यव्रतश्च भद्रं ते पुरुमित्रश्च भारत |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८८
हंस उवाच
सत्यव्रता ये तु नराः कृतज्ञा; धर्मे रतास्तैः सह सम्भजन्ते ||
३७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५७
दुर्योधन उवाच
सत्यव्रते पुरुमित्रे भूरिश्रवसि वा पुनः |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५२
सञ्जय़ उवाच
सत्यव्रतो महावाहुर्विकर्णो दुर्मुखः सहः ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६१
कपिल उवाच
सत्यव्रतो मितभाषोऽप्रमत्त; स्तथास्य वाग्द्वारमथो सुगुप्तम् ||
२४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६४
भीष्म उवाच
सत्यव्रतो रथवरो राजपुत्रो महारथः |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२०५
गुरुरु उवाच
सत्यशौचार्जवत्यागैर्यशसा विक्रमेण च |
१५ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
७
द्रौणिरु उवाच
सत्यशौचार्जवत्यागैस्तपसा निय़मेन च |
६० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८१
श्रीरु उवाच
सत्यश्च लोकवादोऽय़ं लोके चरति सुव्रताः |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय
६९
शकुन्तलो उवाच
सत्यश्चापि प्रवादोऽय़ं यं प्रवक्ष्यामि तेऽनघ |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
सत्यश्रवसमादत्त व्याघ्रो मृगमिवोल्वणम् ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
सत्यश्रवसि चाक्षिप्ते त्वरमाणा महारथाः |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६१
भीम उवाच
सत्यश्रीधर्मय़शसां वीर्येणानृण्यमाप्नुहि |
९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यसन्धं महेष्वासं भृशं मे व्यथितं मनः ||
३९ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यसन्धस्य शूरस्य सङ्ग्रामेष्वपलाय़िनः ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५०
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यसन्धान्महावीर्याच्छूराद्धर्मैकतत्परात् ||
२१ ख
सभा पर्व
अध्याय
२०
वैशम्पाय़न उवाच
सत्यसन्धो जरासन्धं भुवि भीमपराक्रमम् |
३३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
११०
भीष्म उवाच
सत्यसम्प्रतिपत्त्यर्थं ये व्रूय़ुः साक्षिणः क्वचित् |
१७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
सत्यसेनं च दशभिः साश्वसूतध्वजाय़ुधम् |
४९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
सत्यसेनं शरैस्तीक्ष्णैर्दारय़ित्वा महावलः ||
१६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
सत्यसेनं सुषेणं च द्वाभ्यां द्वाभ्यामविध्यत ||
३४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
सत्यसेनः सत्यकीर्तिर्मित्रदेवः श्रुतञ्जय़ः |
३ क
शल्य पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
सत्यसेनः सुषेणश्च पाण्डवं पर्यधावताम् ||
२८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
सत्यसेनस्तु सङ्क्रुद्धस्तोमरं व्यसृजन्महत् |
१२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
सत्यसेनस्त्रिभिर्वाणैर्विव्याध युधि पाण्डवम् |
८ क
शल्य पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
सत्यसेनस्य च धनुर्हस्तावापं च मारिष |
३२ क
शल्य पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
सत्यसेनो रथेषां तु नकुलस्य धनुस्तथा |
३६ क