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शल्य पर्व
अध्याय २१
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सञ्जय़ उवाच
नकुलश्च ततो वीरो राजानं नवभिः शरैः |  १२   क
घोररूपैर्महेष्वासो विव्याध च ननाद च ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति